- आय बढ़ाने के नए मॉडल तलाशेगा राज्य वित्त आयोग

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मप्र के पंचायतों और नगरीय निकायों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर सरकार का फोकस है। निकायों की आय बढ़ाने के लिए छठा राज्य वित्त आयोग नए मॉडल तलाशेगा। इसके लिए आयोग ने संभागवार दौरे शुरू कर स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा प्रारंभ कर दी है। शुरुआती अध्ययन में यह सामने आया है कि प्रदेश के अधिकांश पंचायत और नगरीय निकाय गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं तथा उनके पास आय के स्थायी और प्रभावी स्रोत नहीं हैं। यही कारण है कि आयोग इस बार स्थानीय निकायों की आय बढ़ाने के व्यावहारिक उपायों पर विशेष ध्यान दे रहा है।
आयोग ने सागर संभाग के जिलों की समीक्षा पूरी कर ली है। समीक्षा के दौरान कई पंचायतों और नगर निकायों ने बताया कि वे पूरी तरह सरकारी अनुदान पर निर्भर हैं। संपत्ति कर, बाजार शुल्क, जल कर, स्थानीय सेवाओं से मिलने वाली आय और अन्य संसाधनों का उपयोग अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पा रहा है। इसके चलते विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और कर्मचारियों के भुगतान तक में कठिनाइयां सामने आ रही हैं। आयोग का मानना है कि लंबे समय तक केवल सरकारी सहायता के भरोसे स्थानीय निकायों का संचालन संभव नहीं है। राज्य सरकार पहले से ही भारी वित्तीय दबाव में है और प्रदेश पर पांच लाख करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज है। ऐसे में पंचायतों और नगरीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाना समय की आवश्यकता बन गया है।
दूसरे राज्यों में सफल मॉडल का अध्ययन करेगा आयोग
पंचायतों और नगर निकायों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से आयोग अब दूसरे राज्यों में सफल मॉडल का अध्ययन करेगा। जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र के स्थानीय निकायों ने अपने राजस्व स्रोत बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय काम किया है। वहां कई पंचायतों और नगर निकायों ने स्थानीय कर व्यवस्था को मजबूत कर, सार्वजनिक संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग, बाजारों के सुव्यवस्थित संचालन, जल प्रबंधन और डिजिटल कर संग्रहण जैसे उपायों से अपनी आय में वृद्धि की है। आयोग इन मॉडलों का अध्ययन कर मप्र के लिए उपयुक्त व्यवस्था विकसित करने की तैयारी कर रहा है। आयोग केवल रिपोर्ट तैयार करने तक सीमित नहीं रहना चाहता। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार आयोग को अक्टूबर तक अपनी अनुशंसा रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी है, लेकिन प्रयास यह है कि अगस्त-सितंबर तक रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी जाए ताकि सरकार समय रहते स्थानीय निकायों को अनुदान वितरण और नई वित्तीय व्यवस्थाओं पर निर्णय ले सके। खास बात यह है कि रिपोर्ट सौंपने के बाद भी आयोग सक्रिय रहेगा। सरकार आयोग को उसकी सिफारिशों के क्रियान्वयन की निगरानी की जिम्मेदारी भी सौंपने पर विचार कर रही है।
आय के स्रोत बढ़ाने के उपाय बताएगा आयोग
आयोग का मानना है कि राज्य सरकार स्थानीय निकायों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है, लेकिन सरकार की अपनी सीमा है, क्योंकि मप्र सरकार 5 लाख करोड़ से ज्यादा के कर्ज तले दबी है। लॉन्ग टर्म में सर्वाइव करने के लिए निकायों का आत्मनिर्भर होना जरूरी है। इस पूरी प्रक्रिया का संबंध सोलहवां वित्त आयोग की सिफारिशों से भी जुड़ा हुआ है। सोलहवें वित्त आयोग ने वर्ष 2026-31 की अवधि के लिए देशभर के ग्रामीण और नगरीय निकायों को 7.91 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि देने की अनुशंसा की है। इसमें ग्रामीण निकायों के लिए 4.35 लाख करोड़ और नगरीय निकायों के लिए लगभग 3.56 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इन सिफारिशों का उद्देश्य पंचायतों और शहरों का समग्र विकास सुनिश्चित करना है। राज्य वित्त आयोग अब इन्हीं सिफारिशों के अनुरूप मप्र सरकार को यह सुझाव देगा कि राज्य के विभाजनीय कर कोष से पंचायतों और नगरीय निकायों को किस प्रकार राशि आवंटित की जाए। आयोग की अनुशंसाओं के आधार पर अगले पांच वर्षों तक स्थानीय निकायों की वित्तीय संरचना तय होगी। माना जा रहा है कि यदि आय के स्थायी स्रोत विकसित करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में प्रदेश के स्थानीय निकाय आर्थिक रूप से कहीं अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
दो दिन ग्वालियर-चंबल संभाग के दौरे पर आयोग
छठा राज्य वित्त आयोग दो दिन(20 और 21 मई )क्रमश: ग्वालियर एवं चंबल संभाग के दौरे पर रहेगा। इस दौरान आयोग स्थानीय स्वशासी संस्थाओं की वित्तीय स्थिति, पारदर्शिता, गुणवत्ता और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के संबंध मैं जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से सुझाव प्राप्त करेगा। साथ ही नगरीय एवं पंचायत क्षेत्रों सहकारिता आधारित नवाचारों पर भी चर्चा होगी। आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया, सदस्य केके सिंह और सदस्य सचिव वीरेन्द्र कुमार आज ग्वालियर में जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। आयोग की टीम 21 मई को मुरैना में चंबल संभाग के जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के साथ बैठक करेगी। आयोग की टीम केंद्र एवं राज्य पोषित योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति जानने के लिए औचक निरीक्षण भी करेगी।
