- पीडब्ल्यूडी में प्रभार का खेल

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में इन दिनों प्रभार का जमकर खेल चल रहा है। जिन्हें वास्तव में मुख्य अभियंता के पद पर पदस्थ होना चाहिए, उनके बजाय कार्यपालन यंत्री (ईई) स्तर के इंजीनियर को प्रभारी मुख्य अभियंता बनाकर खेल किया जा गया है। जबकि मुख्य अभियंता स्तर के इंजीनियर तृतीय श्रेणी स्तर का काम कर रहे हैं। इसे लेकर इंजीनियरों में बड़े पैमाने पर नाराजगी उभर कर सामने आई है। अभी कुछ समय पहले राज्य शासन ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में पदस्थ अधीक्षण यंत्री (सिविल) जो प्रभारी मुख्य अभियंता के पद पर प्रमुख अभियंता (भवन) के पद पर पदस्थ थे। उन्हें प्रभारी मुख्य अभियंता (भवन) जबलपुर के रिक्त पद पर पदस्थ किया गया है। दरअसल, पदोन्नति में आरक्षण मामले की वजह से अधीक्षण यंत्री को अभी तक प्रभारी मुख्य अभियंता के पद पर कार्यरत किया जाता रहा है। इस अनुसार अधीक्षण यंत्री जिले सिंह बघेल को प्रभारी मुख्य अभियंता जबलपुर में पदस्थ किया गया।
कंपनी तो ब्लैकलिस्ट नहीं हुई, पर योगेंद्र कुमार को जरूर हट गए
सूत्रों ने बताया कि अभी कुछ दिन पहले ही प्रभारी अधीक्षण यंत्री योगेंद्र कुमार ने नर्मदापुरम में करीब 16 करोड़ रुपए के कई रोड निर्माण कार्य में यूएस इंफ्रा को ब्लैक लिस्ट करने मुख्य अभियंता राजधानी परिक्षेत्र को पत्र लिखा था। उन्हें अपने पत्र में खुलासा किया था कि यूएस इंफ्रा ने पांच सडक़ों के निर्माण में गंभीर अनियमितता की है। यहां तक कि कुछ सडक़ों में तो महज 20 से 30 फीसदी कार्य भी नहीं हुआ, पर पेमेंट 90 फीसदी तक हो गया। उन्होंने बड़े पैमाने पर अनियमितता का खुलासा की करते हुए उक्त ठेकेदार को तत्काल प्रभाव से ब्लैक लिस्ट करने का पत्र जारी किया था। किंतु उसे पत्र को दबा दिया गया। इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि उक्त फर्म ने शासन को करोड़ों रुपए का चुना लगाया। प्रभारी अधीक्षण यंत्री योगेंद्र कुमार ने जांच रिपोर्ट भेजी थी।
