
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रही बहुचर्चित सुनवाई एक बार फिर आगे बढ़ गई है। दरअसल 13, 14 और 15 मई को इस मामले की अंतिम सुनवाई तय थी, जिससे अभ्यर्थियों और दोनों पक्षों में जल्दी निर्णय की आशा जागी थी। हालांकि गुरुवार को भी मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष सुनवाई हुई। इसमें अब यह मामला अब 16 जून 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। उच्च न्यायालय की ग्रीष्मकालीन छुट्टियां शुरू होने के कारण अब जून में दोपहर ढाई बजे से आगे की सुनवाई होगी।
निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत लागू किया गया आरक्षण
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान अनारक्षित वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी ने सर्वोच्च न्यायालय के इंदिरा साहनी, एम नागराज और अनुराधा भसीन मामलों का दृष्टांत देते हुए न्यायालय में अपने तर्क दिए। अमन लेखी ने कहा कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत लागू किया गया। लेखी ने सरकार पर राजनीतिक लाभ के लिए आरक्षण का प्रतिशत तय करने का आरोप लगाते हुए कहा यदि पिछड़े वर्गों के लिए बनाई गई योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिला, तो यह प्रशासनिक विफलता है। इसका भार सामान्य वर्ग पर नहीं डाला जा सकता। उन्होंने कहा सरकार प्रतिनिधित्व बढ़ाना चाहती थी, तो उसे सभी आरक्षित वर्गों की समीक्षा कर संतुलित ढांचा तैयार करना चाहिए।
