
- मप्र में हेरिटेज आधारित उद्योगों का विकास करेगी सरकार
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मप्र निवेश और औद्योगिक विस्तार के नए आयाम स्थापित कर रहा है। आईटी एवं प्रौद्योगिकी, पर्यटन, खनन, ऊर्जा, खाद्य प्र-संस्करण, फार्मा, कपड़ा, लॉजिस्टिक्स, कौशल विकास, ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस और पेट्रो केमिकल जैसे प्रमुख क्षेत्रों में मप्र ने खुद को निवेशकों के लिए फेवरेट डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित किया है। अब मप्र सरकार राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आर्थिक विकास से जोडऩे के लिए हेरिटेज आधारित उद्योगों का विकास कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में, राज्य में कल्चरल एंटरप्रिन्योरशिप को बढ़ावा देने के लिए एक रोडमैप तैयार किया गया है। प्रदेश में अब जल्द हेरिटेज आधारित उद्योगों का विकास किया जाएगा। हेरिटेज के रेप्लिका उत्पाद, हस्तशिल्प आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें कारीगरों और समूहों को जोडकऱ प्रदेश में कल्चरल एंटरप्रिन्योरशिप को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए अलग ई-कॉमर्स प्लेटफार्म विकसित किया जाएगा और विरासत-आधारित उत्पादों की ब्रांडिंग कर उन्हें मार्केट भी उपलब्ध कराया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, मप्र में हेरिटेज आधारित उद्योगों का विकास सांस्कृतिक विरासत को आर्थिक सशक्तिकरण से जोडऩे की एक अनूठी पहल है, जिसमें हस्तशिल्प, रेप्लिका उत्पाद, और पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश में हेरिटेज सर्किट्स का विकास करते हुए पर्यटन को आकर्षक बनाया जाएगा। आर्कियोलोजिकल एक्सपीरिएंस मंचों का भी विकास किया जाएगा, जहां पर्यटक आधुनिक एआर, वीआर तकनीकों के साथ प्रदेश के विरासत स्थलों का अनुभव ले सकेंगे। पुरातत्व विभाग इसके लिए स्टार्टअप्स की मदद लेगा। तकनीकों के साथ धरोहर और विरासतों का संरक्षण, संवर्धन, दस्तावेजीकरण किया जाएगा। इसके लिए अलग पोर्टल और ऐप्स बनाए जाएंगे। इससे शोधकर्ताओं को भी मदद मिलेगी।
टार्टअप्स का पैनल बनाने की प्रक्रिया शुरू
विभाग ने स्टार्टअप्स का एक पैनल बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय निदेशालय ने ज्ञान भारतम मिशन और विभाग से जुड़े प्रोजेक्ट्स के तहत, स्टार्टअप्स को सिस्टम इंटीग्रेटर्स, इकोसिस्टम कैटेनेटर्सऔर कैटालिस्ट्स के रूप में सूचीबद्ध करने के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। यह प्रस्ताव 7 मई को खोले जाएंगे। विभाग द्वारा स्टार्टअप्स को अपने साथ जोडकऱ निर्धारित इन्क्यूबेशन केंद्रों के माध्यम से आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ाना, प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट्स, अनुसंधान एवं विकास में मदद, विरासत का डिजिटलीकरण, प्रशासनिक सहायता प्रणालियों का विकास और इंक्यूबेशन में मदद ली जाएगी। चयनित स्टार्टअप विभाग और धरोहरों का एंड-टू-एंड आइटी सिस्टम इंटीग्रेशन और प्लेटफॉर्म डेवलपमेंट करेंगे। क्लाउड-आधारित आर्काइवल सिस्टम और डिजिटल एसेट मैनेजमेंट किया जाएगा। साइबर सुरक्षा, डेटा गवर्नेस और इंटरऑपरेबिलिटी समाधान में भी मदद करेंगे। पर्यटकों के लिए डिजिटल भुगतान, टिकटिंग और रेवेन्यू सिस्टम का विकास करेंगे। सरकारी वित्तीय प्रणालियों के साथ इसका एकीकरण किया जाएगा।
स्टार्टअप करेंगे कई तरह के काम
स्टार्टअप कई तरह के काम करेंगे। इनमें सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और सुरक्षा, मूर्त और अमूर्त विरासत का दस्तावेजीकरण और डिजिटलीकरण, सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षित कर क्षमता निर्माण और ज्ञान का आदान-प्रदान, विरासत प्रबंधन के लिए वैश्विक केस स्टडीज, टूलकिट और मानकों को अपनाना, सांस्कृतिक अभियान, कार्यक्रम और आउटरीच कार्यक्रमों का आयोजन, राष्ट्रीय संस्थानों के साथ एमओयू और सहयोगात्मक ढांचे का विकास, संग्रहालयों, स्मारकों, पांडुलिपियों और सांस्कृतिक उद्योगों से संबंधित योजनाएं बनाना आदि काम करेंगे। वहीं स्टार्टअप्स डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर पुरातत्व अनुसंधान संस्थान और मध्यप्रदेश विरासत विकास न्यास के साथ मिलकर काम करेंगे। पुरातात्विक अनुसंधान, उत्खनन और पुरातात्विक अध्ययन में आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। विरासत विकास और बुनियादी ढांचा सुदृढ़ किया जाएगा। पुरातत्व और धरोहरों के संबंध में ज्ञान प्रसार और प्रशिक्षण दिया जाएगा। मौजूदा और नई हेरिटेज संपत्तियों का सर्वेक्षण, पहचान और प्रलेखन किया जाएगा। उत्खनन में सहायता और पुरातात्विक क्षेत्र-कार्य, पुरातात्विक धरोहरों का संरक्षण, जीर्णोद्धार और परिरक्षण योजना पर काम, संग्रहालय क्यूरेशन, डिजिटलीकरण और प्रदर्शनी का आधुनिक डिजाइन बनेगा। स्टार्टअप इन्क्यूबेशन, मेंटरिंग और एक्सीलरेशन प्रोग्राम चलाए जाएंगे।
