मूल भाजपाई कर रहे इंतजार, ‘गैरों’ पर मेहरबान

मूल भाजपाई
  • निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों पर उठने लगे सवाल

    गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला जारी है। सरकार निगमों, बोर्डों और विकास प्राधिकरणों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों की धड़ाधड़ नियुक्ति की जा रही है। कहा जा रहा है कि सत्ता और संगठन के तालमेल से नियुक्तियां की जा रही है। लेकिन अभी तक की सूचियों का आकलन किया जाए तो यह तथ्य सामने आया है की मूल भाजपाई अभी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं, जबकि ‘गैरों’(दागी, बागी और कांग्रेस पृष्ठभूमि के नेता )पर जमकर मेहरबानी हुई है।
    भाजपा सूत्रों का कहना है कि सत्ता और संगठन आगामी चुनावों को देखकर राजनीतिक नियुक्तियां कर रहे हैं। ऐसे में जातीय, क्षेत्रिय और चुनावी समीकरण के आधार पर नियुक्तियां की जा रही हैं।  इसमें भाजपा नेताओं के साथ ऐसे नेताओं को उपकृत किया जा रहा है जो दागी, बागी और कांग्रेस पृष्ठभूमि के हैं। जानकारों का कहना है कि असल में भाजपा में कांग्रेस से जो सैलाब आया, उसके बाद पद को लेकर जो होड़ दौड़ मची है, उसे संभालना जरुरी है। खास तौर पर वो कार्यकर्ता जो हमेशा इम्तेहान के समय पार्टी के लिए जी जान से जुटता है, तो इस समय भाजपा 2028 में होने वाले चुनाव से पहले उसी कार्यकर्ता को नवाज रही है। भाजपा इस बार केवल निगम मंडलों तक सीमित नहीं है। खेप बड़ी है, इसलिए तय किया गया है कि कार्यकर्ताओं को अकमडेशन के लिए समितियां जिला स्तर पर भी हों। ये जिले की समितियां सत्ता के पावर से लैस होंगी। एक अभियान के तहत इन समितियों में कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की जाएगी। ताकि जिलास्तर पर भी सत्ता में भागीदारी की बाट जोह रहे नेताओं के असंतोष को खत्म किया जा सके। वहीं भाजपा प्रवक्ता डॉ. हितेष वाजपेयी कहते हैं कि भाजपा  हर कार्यकर्ता के संघर्ष का सम्मान है। कोई छोटा बड़ा नहीं सब कार्यकर्ता हैं। कांग्रेस की तरह गुट नहीं कि कोई खास गुट को ही सत्ता में भागीदारी मिले। पार्टी अपने छोटे से छोटे कार्यकर्ता के योगदान को रेखांकित करना जानती है और समय पर उनके योगदान का परिणाम भी आता है।
    इनकी नियुक्ति पर उठ रहे सवाल
    कांग्रेस से भाजपा में आए भितरवार के केशव सिंह बघेल को राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम का अध्यक्ष बनाया गया है, जिन्हें 2022 में पंचायत चुनावों के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण कांग्रेस ने छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था। उन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर भितरवार विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ा था। बाद में वह कांग्रेस में शामिल हुए, जहां उन्हें ग्वालियर जिला ग्रामीण महामंत्री बनाया गया था। कांग्रेस से छह साल के लिए निष्कासन के बाद लोकसभा चुनाव से पहले मई 2024 में बघेल भाजपा में शामिल हो गए थे। भाजपा से छह वर्ष के लिए निष्कासित महेश केवट को राज्य मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है। मूलत: निवाड़ी जिले के ओरछा निवासी केवट को नगरीय निकाय चुनाव के समय भाजपा ने 27 जून 2022 को छह वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित किया था। उनका निष्कासन अभी खत्म नहीं हुआ है, फिर भी उन्हें महत्वपूर्ण पद दे दिया गया है। कांग्रेस से भाजपा में आए रामलाल मालवीय को अनुसूचित जाति (एससी) आयोग में सदस्य बनाया गया है। मालवीय लंबे समय तक कांग्रेस में रहे और उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का करीबी माना जाता था। अप्रैल 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने कांग्रेस छोडकऱ भाजपा का दामन थाम लिया था। मालवीय सहित कई अन्य नेताओं को भी ऐसे ही समायोजित किया गया है, जो कांग्रेस से आए। इससे मूल भाजपा के कार्यकर्ता स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। सिंधिया खेमे के अशोक शर्मा और सुधीर गुप्ता भी उपकृत- कांग्रेस से भाजपा में आए अशोक शर्मा को विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) ग्वालियर का अध्यक्ष बनाया गया है। वह केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे से हैं। 2020 में हुए उपचुनावों के पहले कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री पद से इस्तीफा देकर सिंधिया के साथ उन्होंने भाजपा का दामन थामा था। ग्वालियर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के उपाध्यक्ष बनाए गए सुधीर गुप्ता भी सिंधिया खेमे से आते हैं, जो उनके साथ ही भाजपा में आए थे। कांग्रेस से आए, मंत्री रहते उपचुनाव हारे रावत को वन विकास निगम की कमान कांग्रेस छोडकऱ भाजपा में आए प्रदेश के पूर्व वन मंत्री रामनिवास रावत विधानसभा का उपचुनाव हार गए थे। उन्हें मध्य प्रदेश राज्य वन विकास निगम का अध्यक्ष बनाया है। पूर्व सांसद केपी यादव को राज्य स्टेट सिविल सप्लाई कारपोरेशन (नागरिक आपूर्ति निगम) का अध्यक्ष बनाया गया है। केपी यादव पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी थे और कांग्रेस में थे, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो गए थे।

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