- 24 साल बाद नया जेट विमान राज्य सरकार के बेड़े में होगा शामिल

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मप्र सरकार लंबे इंतजार के बाद अपने वीवीआईपी विमान बेड़े को अपग्रेड करने जा रही है। करीब 24 साल बाद नया जेट विमान राज्य सरकार के बेड़े में शामिल होगा। जेट बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500 जुलाई में सरकार को मिल जाएगा। राज्य सरकार को मिलने वाला आधुनिक बिजनेस जेट बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500 अत्याधुनिक विमान कनाडा की कंपनी बॉम्बार्डियर इंक. द्वारा तैयार किया जा रहा है। राज्य सरकार इस विमान को संचालित करने के लिए अपने पायलट को विशेष प्रशिक्षण के लिए अमेरिका भेजेगी। ताकि वे इस अत्याधुनिक जेट को सुरक्षित और कुशलता से उड़ा सकें। वहीं राज्य सरकार का करीब 170 करोड़ का अत्याधुनिक एच 160 हेलीकॉप्टर जनवरी 2027 तक बेड़े में शामिल हो जाएगा। यह हेलीकॉप्टर फ्रांस की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी एयरबस हेलीकॉप्टर द्वारा निर्मित है। बताया जा रहा है कि भारत में फिलहाल इस मॉडल के केवल 5 से 6 हेलीकॉप्टर ही संचालित हो रहे हैं। गौरतलब है कि मप्र सरकार के पास अभी अपना कोई विमान नहीं है। सरकार पिछले करीब पांच साल से किराए के विमान में हवाई सफर कर रही है। सरकार नया विमान खरीदने के आदेश जारी कर चुकी है। मई तक नए विमान की डिलिवरी होना प्रस्तावित थी, लेकिन अब इसके जुलाई में आने के आसार हैं। इस तरह सरकार को अभी तीन महीने और किराए के विमान में यात्रा करना होगी। सूत्रों का कहना है कि दिसंबर, 2026 तक सरकार के पास नया हेलीकॉप्टर भी आ जाएगा। नए डबल इंजन हेलिकॉप्टर की आपूर्ति के लिए निर्माता कंपनी से अनुबंध किया जा चुका है। नया हेलिकॉप्टर करीब 150 करोड़ रुपए में खरीदा जा रहा है। विमानन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मप्र सरकार कनाडा की बॉम्बार्डियर कंपनी से चैलेंजर 3500 विमान खरीद रही है। कैबिनेट ने जुलाई, 2024 में नया विमान खरीदने की मंजूरी दी थी। इसके बाद विभिन्न औपचारिकताएं करने के बाद नए विमान खरीदी के लिए क्रय आदेश जारी किया गया। अधिकारियों का कहना है कि चैलेंजर 3500 विमान अपनी श्रेणी में सबसे अधिक एडवांस तकनीक से बना है। इसमें वॉयस कंट्रोल्ड केबिन और हाईटेक सीटें हैं। यह विमान न्यूनतम 4850 फीट से लेकर अधिकतम 41 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ सकता है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस है विमान
करीब 236 करोड़ रुपए के चैलेंजर 3500 एक सुपर मिड-साइज जेट है, जिसमें नौ यात्रियों के बैठने की क्षमता है। इसकी केबिन ऊंचाई लगभग 6 फीट और चौड़ाई 7 फीट 2 इंच है। यह विमान करीब 459 नॉट्स यानी 850 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ान भर सकता है और लगभग 6,297 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकता है। इसके अलावा, यह 45,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम है और कम लंबाई वाले रनवे (करीब 1,474 मीटर) से भी उड़ान भर सकता है। विमानन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय शुक्ला ने बताया कि जून-जुलाई 2026 में डिलीवरी का समय है। दअरसल, तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने 65 करोड रुपए में नया विमान खरीदा था। यह विमान 6 मई, 2021 को ग्वालियर में लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। चूंकि अधिकारी विमान का बीमा कराना भूल गए थे, इसलिए उसको ठीक कराना महंगा पड़ रहा था और खतरे की भी आशंका थी।
2002 में खरीदा था पुराना विमान
सुपर किंग बी-200- यह विमान राज्य शासन ने वर्ष 2002 में रेथियॉन एयरक्राफ्ट कंपनी से 23 करोड़( 47,56,804 अमेरिकी डॉलर) में खरीदा था। यह सात सीटर है। ये 3000 हजार घंटे उड़ान कर चुका है। 2021 के दौरान ग्वालियर एयरपोर्ट पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। न तो उसकी मरम्मत कराई गई और न ही अब तक नया विमान खरीदा जा सका है। स्थिति यह है कि सरकार के पास फिलहाल संचालन योग्य कोई फिक्स्ड-विंग विमान नहीं है और हेलिकॉप्टरों की संख्या भी जरूरत के मुकाबले कम है। इसी कारण सरकारी यात्राओं के लिए निजी एविएशन कंपनियों पर निर्भरता लगातार बढ़ी है, जिससे खर्च में भी इजाफा हुआ है। वहीं शासन ने ईसी-155, बी-1 हेलीकॉप्टर वर्ष 2011 में फ्रांस की यूरोकॉप्टर कंपनी से खरीदा था। यह उड़ान भर रहा है। इसे 10.5 मिलियन यूरो में खरीदा गया था। दो इंजन है। छह सीटर है। इसका मेंटेनेंस खर्च बढ़ रहा है। पुराने हेलीकॉप्टर की देखरेख पर बढ़ रहे खर्च के कारण सरकार ने अधिक आधुनिक और किफायती विकल्प चुनने का निर्णय लिया। राज्य सरकार के वरिष्ठ पायलट कैप्टन इस हेलीकॉप्टर के संचालन की दो माह की विशेष ट्रेनिंग के लिए फ्रांस जाएंगे।
हवाई सुविधाओं को तहसील स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य
डॉ. मोहन यादव कैबिनेट ने फरवरी, 2025 में नई नागरिक उड्डयन नीति-2025 को मंजूरी दी थी। इस नीति के तहत प्रदेश में विमानन क्षेत्र को विकेंद्रीकृत करते हुए हवाई सुविधाओं को तहसील स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। हवाई सेवाएं केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहें, बल्कि हर क्षेत्र तक पहुंचें। इसी दृष्टि से प्रत्येक तहसील ब्लॉक में हेलीपैड विकसित करने की योजना है। प्रदेश में हर 150 किलोमीटर पर एक कमर्शियल एयरपोर्ट, 75 किलोमीटर पर एयरस्ट्रिप और 45 किलोमीटर के दायरे में हेलीपैड विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस नीति का उद्देश्य प्रदेश में विमानन अधोसंरचना को मजबूत करना, निजी निवेश को आकर्षित करना और युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर सृजित करना है। प्रदेश में विमानन विभाग एवं विमानन संचालनालय का गठन 1 जून 1982 को किया गया। इस विभाग का काम अतिविशिष्ट व्यक्तियों के लिए शासकीय विमान/हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराना, शासन के बेड़े के विमान/हेलीकॉप्टरों का संधारण तथा परिचालन, प्रदेश में वायु सेवाओं का विस्तार के लिए स्वयं के संसाधनों से हवाई पट्टियों का विकास एवं क्षेत्रीय संपर्कता नीति के अंतर्गत राज्य के अंदर और बाहर वायु सेवा का विस्तार करना है। बता दें मध्य प्रदेश के 55 जिलों में से 31 जिलों में विमानतल और हवाई पट्टियां उपलब्ध हैं।
