- डिस्टिलरीज की बाहरी सप्लाई पर लगी रोक…

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश के आबकारी विभाग और मदिरा प्रेमियों के लिए अप्रैल का महीना कठिन चुनौती भरा साबित हो रहा है। प्रदेश की शराब दुकानों पर इन दिनों बीयर और कम कीमत वाली (चीप रेंज) विदेशी शराब की भारी किल्लत देखी जा रही है। आलम यह है कि वाइन शॉप्स पर स्टॉक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार को कड़ा कदम उठाना पड़ा है।
प्रशासन ने मध्य प्रदेश में स्थित सभी डिस्टिलरीज को निर्देश जारी करते हुए बीयर की प्रदेश से बाहर होने वाली सप्लाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। दुकानों से मिड रेंज के भी व्हिस्की और वोदका के कई लोकप्रिय ब्रांड गायब हैं, जिससे ग्राहकों को अपनी पसंद के ब्रांड के लिए भटकना पड़ रहा है। सप्लाई के साथ-साथ इस बार शराब ठेकों की नीलामी ने भी सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आमतौर पर 31 मार्च तक अधिकांश दुकानें नीलाम हो जाती थीं, लेकिन इस साल 14 राउंड की प्रक्रिया के बाद भी प्रदेश की करीब 10 प्रतिशत (लगभग 400 से अधिक) दुकानें नहीं बिक पाई हैं। राजधानी भोपाल की स्थिति भी जुदा नहीं है, जहां 87 में से 9 दुकानों के टेंडर न होने के कारण अब आबकारी विभाग के कर्मचारियों को ही इन दुकानों के संचालन का जिम्मा सौंपा गया है। सरकार ने रिजर्व प्राइस में 30 फीसदी तक की कटौती की है, इसके बावजूद ठेकेदार बची हुई दुकानों को खरीदने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
ये है इस परेशानी पर इनसाइड स्टोरी
इस किल्लत के पीछे की इनसाइड स्टोरी प्रदेश के सबसे बड़े शराब समूह, सोम डिस्टिलरी और ब्रेवरीज पर लगी रोक से जुड़ी मानी जा रही है। हालांकि आबकारी विभाग के अधिकारी इस पर खुलकर कुछ भी नहीं कह रहे हैं, लेकिन ठेकेदारों के मुताबिक बीयर और चीप रेंज की शराब के बाजार में इस समूह की हिस्सेदारी 35 फीसदी से अधिक रही है। विभाग अब तक सरकारी वेयरहाउस में रखे पुराने स्टॉक से पूर्ति करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन मांग के मुकाबले अन्य कंपनियों से सप्लाई की भरपाई नहीं हो पा रही है। स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने न केवल अब निर्यात रोका है, बल्कि अब हर शराब दुकान के लिए एक बार में बीयर की अधिकतम 300 पेटियों की सप्लाई लिमिट भी तय कर दी है।
भोपाल में 9 दुकानें आबकारी के हवाले
भोपाल में वर्तमान में अन्ना नगर, प्रभात चौराहा, गोविंदपुरा, अरेरा कॉलोनी, समेरा, पीएंडटी चौराहा, हबीबगंज फाटक, बिलखिरिया और बैरसिया क्रमांक-1 जैसी प्रमुख दुकानें विभाग द्वारा चलाई जा रही हैं। सोमवार को 14वें राउंड में पुल बोगदा स्थित दुकान की नीलामी सफल रही, जिससे विभाग के पास अब 9 दुकानें शेष हैं। भविष्य की रणनीति को लेकर सरकार अब शराब दुकानों के लिए एक विशेष निगम-मंडल बनाने पर विचार कर रही है। इसके अध्ययन के लिए तीन अफसरों की टीम को पड़ोसी राच्य छत्तीसगढ़ भेजा गया है। जब तक छत्तीसगढ़ मॉडल की रिपोर्ट और नई व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक बिना बिकी दुकानों के लिए ई-टेंडर की प्रक्रिया जारी रहेगी और इनका संचालन विभागीय अधिकारी ही संभालेंगे।
