कमलेश्वर पटेल पर दांव लगा सकती है कांग्रेस

कमलेश्वर पटेल
  • मप्र में राज्यसभा के लिए शह-मात का खेल शुरू

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में आगामी समय में भाजपा की दो और कांग्रेस की एक सीट पर राज्यसभा चुनाव होना है। अभी तीनों सीटें खाली नहीं हुई हैं, लेकिन दोनों पार्टियों में शह-मात का खेल शुरू हो गया है। भाजपा इस कोशिश में है कि इस बार कांग्रेस से जैस भी हो तीसरी सीट छिन ली जाए। वहीं कांग्रेस क्षेत्रिय और जातीय समीकरणों के आधार पर प्रत्याशी खड़ा कर भाजपा की मंशा पर पानी फेरना चाहती है। इसके लिए पार्टी के पैमान पर पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल फिट बैठ रहे हैं।
गौरतलब है कि मप्र की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से जिस तरह के सियासी समीकरण बन रहे हैं उससे आगामी राज्यसभा चुनाव में तीसरी सीट पर मुकाबला रोचक होने की संभावना है। संख्या बल के हिसाब से भाजपा दो सीटें आराम से जीत रही है, लेकिन कांग्रेसी खेमे में एक की बगावत और दो के कानूनी विवाद में फंसने के बाद तीसरी सीट पर कांटे का मुकाबले के हालात बनते जा रहे हैं। भाजपा की रणनीति है कि तीसरी सीट पर किसी ऐसे उम्मीदवार को खड़ा किया जाए जो राजनीति में प्रभावशाली होने के साथ-साथ जिसकी पैठ अब भी कांग्रेस में अंदर तक है। तीसरी सीट का भाजपा का उम्मीदवार अपने दम पर यदि कांग्रेस के 7 विधायकों को अपने पक्ष में करने में सफल हो जाए तो कांग्रेस को राज्यसभा चुनाव में क्लीनस्वीप किया जा सकता है। भाजपा की इसी सोच को देखते हुए कांग्रेस भी ऐसे नेता को मैदान में उतारने की कोशिश कर रही है जिसकी न केवल कांग्रेस बल्कि जनता में भी अच्छी पैठ हो। ऐसे में कमलेश्वर पटेल का नाम सबसे ऊपर है।
भाजपा का गणित और कांग्रेस की रणनीति
मप्र की 230 विधानसभा सीटों में से भाजपा के पास 165 (कुल 164+1 (बीना से कांग्रेस की निर्मला सप्रे), कांग्रेस के पास 62 (कुल 65 लेकिन 1- वोटिंग का अधिकार नहीं, 1- सदस्यता गई, 1- भाजपा के साथ) भारत आदिवासी पार्टी (भाआप) – 1 है।  116 वोट से भाजपा दो सीट आसानी से जीत जाएगी। तीसरी सीट के लिए 49 का इंतजाम है। भाआप का 1 विधायक का साथ भी उन्हें मिलने पर यह संख्या 50 हो जाएगी। कांग्रेस के पास जीत के गणित से 4 अतिरिक्त हैं। भाजपा कांग्रेस के सिर्फ 7 विधायकों को अपने पक्ष में तोड़ लेती है, तो भाजपा 57 और कांग्रेस 55 पर सिमट जाएगी। सूत्रों के मुताबिक भाजपा तीसरे उम्मीदवार के तौर पर सुरेश पचौरी को निर्दलीय रूप में उतारकर समर्थन दे सकती है, ताकि विपक्षी विधायकों का समर्थन मिल सके। पचौरी की ब्राह्मण छवि पार्टी के जातीय संतुलन में भी फिट बैठती है। कांग्रेस में दिग्विजय सिंह के दावेदारी छोडऩे के बाद नए समीकरण बन रहे हैं। पार्टी अब विंध्य क्षेत्र से ओबीसी नेता को आगे करने पर विचार कर रही है। कुर्मी वर्ग से आने वाले कमलेश्वर पटेल इस रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं। विंध्य और बुंदेलखंड में कुर्मी समाज की अच्छी पकड़ को देखते हुए उनकी दावेदारी मजबूत है। मीनाक्षी नटराजन, जीतू पटवारी और अरुण यादव के नाम भी चर्चा में हैं, लेकिन तीनों मालवा-निमाड़ से आते हैं। ऐसे में क्षेत्रीय संतुलन और जातीय समीकरण को देखते हुए कांग्रेस विंध्य को प्राथमिकता दे सकती है।

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