454 वाइन शॉप के टेंडर होल्ड, रिजर्व प्राइज से बेहद कम मिले ऑफर, अब सरकार लेगी फैसला

वाइन शॉप
  • 193 दुकानें ही नीलाम हो सकीं

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश में शराब दुकानों की नीलामी इस बार आबकारी विभाग के लिए परेशानी का सबब बन गई है। नीलामी के 12वें राउंड के बाद भी अब तक 454 दुकानों के ठेके नहीं हो पाए हैं। ये वे दुकानें हैं जिनकी नीलामी के लिए शासन ने रिजर्व प्राइज को भी तीस फीसदी तक कम कर दिया था। इसके बाद भी विभाग शुक्रवार को केवल 193 दुकानें ही नीलाम कर सका। इसके अलावा 454 वाइन शॉप्स के आवंटन को फिलहाल होल्ड पर रखने का फैसला लिया गया है। इन दुकानों के लिए प्राप्त ऑफर विभाग द्वारा तय नए रिजर्व प्राइज से बेहद कम हैं। जानकारी के अनुसार, अब इन सभी शराब दुकानों के लिए आए ऑफर को लेकर अंतिम फैसला सरकार करेगी। शुक्रवार को हुई नीलामी के बाद भी एक शराब दुकान ऐसी बच गई है जिसके लिए किसी भी ठेकेदार ने ऑफर नहीं डाला है।
1549 करोड़ के बजाय 1216 करोड़ का रेवेन्यू मिला
आबकारी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जिन 193 दुकानों की नीलामी ई-टेंडर के जरिए शुक्रवार को की गई, उनके लिए विभाग ने 1549.26 करोड़ रुपये की रिजर्व प्राइज तय की थी। दस राउंड में ये दुकानें न बिकने के बाद सरकार ने इन दुकानों के आरक्षित मूल्य में तीस फीसदी तक कमी कर दी थी। अब ये 193 दुकानें केवल 1216.34 करोड़ रुपये में ही नीलाम हुई हैं। हैं। दूसरी ओर, जिन 454 दुकानों को होल्ड पर रखा गया है, उनका कुल आरपी 3528.18 करोड़ रुपये है। इनमें से 453 दुकानों के लिए अब तक कुल 1679.50 करोड़ रुपये के ही ऑफर मिल पाए हैं। आबकारी विभाग को 106 दुकानों के लिए रिजर्व प्राइज से 30 से 40 फीसदी कम के ऑफर, 132 दुकानों को 40 से 50 प्रतिशत कम के ऑफर और 215 दुकानों को रिजर्व प्राइज से 50 फीसदी से भी कम के ऑफर मिले हैं। रेवेन्यू के भारी-भरकम नुकसान को देखते हुए फिलहाल विभाग ने इन दुकानों को होल्ड पर रखा है।
निगम मंडल बनाकर सरकार चला सकती है शराब दुकानें
आबकारी विभाग के लिए गठित मंत्रिमंडलीय समिति की वर्चुअल बैठक में 12 दौर की नीलामी प्रक्रिया के बाद शेष बची दुकानों की स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि नीलामी के उपरांत बची हुई 454 दुकानों के संचालन के लिए आबकारी विभाग स्वयं एक निगम मंडल गठित कर इन दुकानों का संचालन करने की संभावना पर विचार करेगा। मध्य प्रदेश सरकार को इस बार 12वें चरण की बोली के बाद अब तक 16637.85 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो पिछले साल की तुलना में 34.13 प्रतिशत अधिक है।

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