राजेन्द्र भारती की सजा बिगाड़ न दे… कांग्रेस का खेल

राजेन्द्र भारती
  • कांग्रेस को सता रहा राज्यसभा सीट छिन जाने जा डर

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम।  मप्र की राजनीति में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामले में अदालत ने दोषी करार देते हुए तीन साल की सजा दी है। इससे उनकी विधायकी खतरे में पड़ गई है। उधर, कांग्रेस को राज्यसभा की खाली होने वाली सीट छिन जाने का डर सता रहा है। दरअसल, एक-एक करके कांग्रेस के कई विधायक किसी न किसी उलझन में फंसते जा रहे हैं।  ऐसे में उसे इस बात की चिंता सता रही है कि जून माह में तीन सीटों के लिए होने वाले राज्यसभा चुनाव में भाजपा तोड़ फोड़ कर उसका खेल बिगाड़ सकती है।
गौरतलब है कि  राजेन्द्र भारती को तीन साल की सजा सुनाई गई है। एमपी, एमएलए कोर्ट ने उन्हें हाईकोर्ट में अपील करने के लिए साठ दिन का समय दिया है। कोर्ट से उन्हें स्टे नहीं मिला तो कांग्रेस की मुश्किलों में और इजाफा हो सकता है। इस बात की भी संभावना है कि कोर्ट ने स्टे दिया और मतदान पर रोक लगा दी तो भी दिक्कत में कांग्रेस को आना है। हाईकोर्ट विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा के मामले में इस तरह का निर्णय दे चुकी है। उसने मल्होत्रा की सजा पर तो रोक लगा दी पर उन्हें मताधिकार से वंचित कर दिया है। विधानसभा में कांग्रेस के विधायकों की संख्या 65 है। उसकी बीना से विधायक निर्मला सप्रे पहले से ही भाजपा की गोद में बैठी हुई हैं। मुकेश वोट नहीं दे सकते और भारती को सजा हो चुकी है। ऐसे में फिलहाल कांग्रेस के पास 62 विधायक बच रहे हैं। 230 सदस्यों वाली विधानसभा में एक सीट के लिए 58 मतों की जरूरत है। भाजपा के सदस्यों की संख्या 165 है।
तीसरी सीट के लिए भाजपा की प्लानिंग
भाजपा कांग्रेस पर पूरी नजर बनाए हुए है। तीसरी सीट के लिए प्रत्याशी उतारने के लिए उसने प्लानिंग शुरू कर दी है। भाजपा अगर कांग्रेस के पांच विधायकों को तोड़ लेती है तो कांग्रेस के लिए राह कठिन हो सकती है। महीनेभर पहले दूसरे राज्यों में हुए चुनाव में वह ऐसा कर चुकी है जहां या तो विधायकों ने चुनाव में हिस्सा ही नहीं लिया या फिर क्रास वोटिंग कर दी। मध्यप्रदेश में राज्यसभा की जिन तीन सीटों के लिए चुनाव होने हैं उनमें एक कांग्रेस के पास तो दो भाजपा के पास हैं। मध्यप्रदेश से राज्यसभा सदस्य जी कुरियन, सुमेर सिंह सोलंकी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कार्यकाल 22 जून को समाप्त हो रहा है। इनमें कुरियन और सोलंकी भाजपा से तो दिग्विजय कांग्रेस से सांसद हैं। इनमें दिग्विजय सिंह और सुमेर सिंह सोलंकी 2020 में तो कुरियन, ज्योतिरादित्य सिंधिया के लोकसभा में चुने जाने के बाद राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिए जाने के बाद हुए उपचुनाव में प्रदेश से उच्च सदन गए थे। गौरतलब है कि राज्यसभा एक स्थाई सदन है जो कभी भंग नहीं होता। लेकिन इसके एक तिहाई सदस्य हर दो साल में सेवानिवृत होते हैं। प्रदेश से राज्यसभा के लिए कुल 11 सांसद निर्वाचित होते हैं। अप्रत्यक्ष प्रणाली से होने वाले इन चुनावों में विधायक मतदान करते हैं। इससे पहले 3 अप्रैल 2024 में प्रदेश की पांच सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव हुए थे। इसमें भाजपा से केन्द्रीय राज्यमंत्री एल मुरुगन, उमेशनाथ, माया नारोलिया और बंशीलाल गुर्जर राज्यसभा गए थे वहीं कांग्रेस से अशोक सिंह को उच्च सदन जाने का मौका मिला था।
जून 2026 में रिक्त हो रही हैं तीन सीटें
चुनाव मई में संभव हैं। प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें जून 2026 में रिक्त हो रही हैं। इनमें से दो सदस्य भाजपा के सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन हैं और एक कांग्रेस के दिग्विजय सिंह हैं। भाजपा की सदस्य संख्या 164 है, इस प्रकार वह दो सीटें जीतने की स्थिति में है। जबकि, एक सीट कांग्रेस के पक्ष में आएगी, लेकिन जिस तरह हरियाणा में पार्टी के विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की और बिहार में अनुपस्थित रहे, उससे मध्य प्रदेश में भी चिंता है। मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमग सिधार ने कहा कि मप्र में मई में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा की मंशा खुलकर सामने आ रही है। चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस विधायकों को तोडऩे और खरीदने की कोशिश की जा रही है और जब यह प्रयास सफल नहीं हो रहा, तो उनके खिलाफ पुराने मामलों को हथियार बनाया जा रहा है।
बिगड़ सकता है सीटों का गणित
230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के 65 सदस्य हैं। श्योपुर जिले के विजयपुर विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के विधायक मुकेश मल्होत्रा की विधायकी पर तलवार लटकी है और उन्हें वोट डालने से रोका गया है। वहीं, सागर जिले की बीना से विधायक निर्मला सप्रे दलबदल के मामले में घिरी हैं। पार्टी उन्हें भाजपा के साथ मानकर चल रही है। इस बीच दतिया जिले के दतिया विधानसभा क्षेत्र से विधायक राजेंद्र भारती को आर्थिक अनियमितता के मामले में तीन वर्ष की सजा सुनाई गई है। हालांकि, अपील करने का अवसर उनके पास है, लेकिन स्थगन नहीं मिलता है या फिर सशर्त दिया जाता है तो कांग्रेस की राज्यसभा चुनाव में चुनौती बढ़ जाएगी। उधर, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में मई में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा की मंशा अब खुलकर सामने आ रही है। चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस के विधायकों को तोडऩे और खरीदने की कोशिश की जा रही है और जब यह प्रयास सफल नहीं हो रहा, तो उनके विरुद्ध पुराने मामलों को हथियार बनाया जा रहा है। दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 25 साल पुराने मामले में सजा सुनाकर दिल्ली में गिरफ्तारी कर ली गई। दूसरी तरफ पूर्व भाजपा विधायक नरोत्तम मिश्रा का पेड न्यूज मामला वर्षों से लंबित होना न्यायिक प्रश्न खड़े करता है। विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा की सदस्यता समाप्त कर उन्हें राज्यसभा चुनाव में मतदान से वंचित कर दिया गया। वहीं, रीवा जिले की सेमरिया विधानसभा से विधायक अभय मिश्रा और भोपाल जिले के भोपाल मध्य विधायक आरिफ मसूद के पुराने मामलों को अचानक सक्रिय किया जाना भाजपा की सत्ता के लिए भूख साफ दिखाता है। यह घटनाएं स्पष्ट संकेत देती हैं कि जो विधायक भाजपा के दबाव में नहीं आ रहे, उन्हें जबरन पुराने या झूठी कार्रवाई के जरिए चुनाव प्रक्रिया से बाहर करने की साजिश रची जा रही है।

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