
- मुख्यमंत्री ने सांसदों को दिया डिनर, केंद्रीय मंत्रियों से मिले…
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को नई दिल्ली में मध्यप्रदेश से निर्वाचित पार्टी सांसदों से सीधे संवाद किया और उनसे पूछ कि क्या आपके संसदीय क्षेत्र में कोई काम रुक रहे हैं। उन्होंने सांसदों से बंद कमरे में वन टू वन चर्चा की। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री प्रदेशाध्यक्ष के साथ दोपहर बाद नई दिल्ली पहुंचे। जहां उन्होंने प्रदेश के सांसदों को डिनर में आमंत्रित किया। इससे पहले सीएम और प्रदेशाध्यक्ष ने पार्टी के सभी सांसदों से वन टू चन चर्चा की। सीएम ने सांसदों से उनके क्षेत्र में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और विकास कार्यों को लेकर जानकारी हासिल की, तो प्रदेशाध्यक्ष ने उनसे से संगठन की लेकर चर्चा की। विशेष तौर पर संसदीय क्षेत्र में विधायकों और सांसदों के बीच सामंजस्य को लेकर खंडेलवाल ने सांसदों से फीडबैक लिया। उन्होंने सांसदों को बताया कि संगठन ने यह तय कर दिया कि जब भी सरकार के मंत्री अपने प्रभार के जिलों का भ्रमण करेंगे, तो एक बार सांसद के साथ एकांत में बैठकर क्षेत्र के समग्र विकास के रोडमैप पर मंथन करेंगे। मुख्यमंत्री ने भी सांसदों से कहा कि उन्हें यदि किसी भी तरह की असुविधा समझ में आती है, वे सीधे उन्हें जानकारी दें। सीएम ने कहा कि उनके द्वारा मैदानी अधिकारियों को साफ तौर पर कह दिया गया है कि उन्हें अपने दफ्तरों में बैठने के साथ जिलों का भ्रमण भी करना है और जनप्रतिनिधियों के साथ निरंतर संवाद भी बनाना है। ऐसा नहीं करने वाले अधिकारी मैदानी पोस्टिंग में नहीं रह पाएंगे। वन टू वन के दौरान सीएम डॉ. यादव ने सांसदों से उनके संसदीय क्षेत्र में कराए जा रहे विकास कार्यों के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने सांसदों से अपेक्षा की वे अपने क्षेत्र प्रवास के दौरान विकास कार्यों का मैदानी आकलन करे और यदि कही किसी भी स्तर पर गड़बड़ी उन्हें समक्ष में आती है, तो इसकी जानकारी से उन्हें अवगत कराएं। सीएम ने सांसदो से कहा कृषक कल्याण वर्ष के दौरान वे भी किसानों के हितों के लिए सुझाव दें। यदि कोई नवाचार उनके समझ में आता है, तो इस बारे में भी उन्हें बताए, जिससे वर्ष के दौरान किसानों के हितों के लिए ज्यादा से ज्यादा काम किया जा सके।
विधायक-सांसद में असहमति
सूत्रों की मानें तो मध्यप्रदेश के कुछ निकायों में एल्डरमैन के अलावा जनभागीदारी समितियों और दूसरी राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर पार्टी के प्रदेश मुख्यालय और मुख्यमंत्री के पास जो सिफारिशें पहुंची है, उनमें विधायक और सांसदों के बीच असहमति जैसी स्थिति है। बताया गया है कि विशेषकर नगर निगमों में एल्डरमैन की नियुक्तियां इसलिए लंबित रखी गई है। क्योंकि किसी भी निगम में एल्डरमैन बनाने के लिए वहां के विधायकों और सांसदों द्वारा अलग-अलग समर्थकों के नाम भेजे गए है। इसकी वजह से नियुक्तियां नहीं हो पा रही है, जबकि पार्टी का लक्ष्य है कि जितनी जल्द हो सके भाजपा अपनी सभी तरह की संगठनात्मक और सरकारी पदों पर राजनीतिक नियुक्तियों का काम पूरा कर दिया जाए। इस पर बुधवार को दिल्ली में हुई बैठक में सांसदों से बड़ा दिल रखकर विधायकों के साथ सहमति बनाने की बात कही गई है।
नाराजगी की बात आई थी सामने
कुछ सांसदों द्वारा राष्ट्रीय नेतृत्व से नाराजगी जताई गई थी, कि मध्यप्रदेश में उन्हें महत्व नहीं मिल रहा है। केन्द्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से प्रदेशाध्यक्ष खंडेलवाल के साथ मिलकर सांसदो से सभी विषयों पर चर्चा करने को कहा था। बताया गया है कि संसद चलने की वजह से दोनों सदनों में पार्टी के सांसद दिल्ली में मौजूद है। कुछ सांसद रहे गैरहाजिर: बैठक में कुछ सांसद मौजूद नहीं थे। इनमें भोपाल सांसद आलोक शर्मा भी हैं, जो असम में चुनावी जिम्मेदारी से नहीं पहुंच सके। इनके द्वारा दूसरे सांसदों की भी असम, पश्चिम बंगाल में चुनावी मौजूदगी की वजह से बैठक में शामिल होने नहीं पहुंच सके।
