- बिजली बिल में होगी स्मार्ट मीटर की वसूली
- गौरव चौहान

मप्र में स्मार्ट मीटर लगाने का खर्च (इंस्टॉलेशन, मेंटेनेंस, ऑपरेशन) बिजली बिलों के माध्यम से उपभोक्ताओं से वसूला जाएगा। मप्र विद्युत विनियामक आयोग के हालिया टैरिफ के अनुसार, स्मार्ट मीटरों की संख्या बढऩे के साथ ही उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ बढ़ेगा, जिससे बिजली की दरें बढ़ेंगीन। अब स्मार्ट मीटर का खर्च प्रति यूनिट खपत के आधार पर बिजली बिलों में शामिल कर वसूला जाएगा। इस बीच, सरकार स्मार्ट प्रीपेड मीटर इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं को 25 पैसे प्रति यूनिट की अतिरिक्त छूट और सोलर आवर (सुबह 9 से शाम 5 बजे) में 20 प्रतिशत की छूट दे रही है। गौरतलब है कि मप्र विद्युत विनियामक आयोग के हालिया टैरिफ आदेश में खुलासा हुआ है कि बिजली वितरण कंपनियां वित्तीय वर्ष 2026-27 में उपभोक्ताओं से कुल 513.62 करोड़ का लीज चार्ज वसूलेंगी। यह राशि सीधे बिल में अलग से नहीं दिखाई देगी, बल्कि बिजली दरों (टैरिफ) में शामिल कर धीरे-धीरे वसूली जाएगी।
गौरतलब है कि स्मार्ट मीटर परियोजना को केंद्र सरकार की आरडीएस योजना के तहत लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बिजली आपूर्ति को अधिक पारदर्शी विश्वसनीय और कुशल बनाना है। स्मार्ट मीटर से रियल-टाइम डेटा मिलने से बिलिंग में गड़बड़ी कम होगी, बिजली चोरी पर अंकुश लगेगा और लाइन लॉस घटाने में मदद मिलेगी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी सुधार के साथ-साथ इसका आर्थिक असर भी उपभोक्ताओं को झेलना पड़ेगा। चूंकि यह खर्च टैरिफ में जोड़ा जाएगा, इसलिए आने वाले समय में बिजली बिलों में बढ़ोतरी का असर साफ दिखाई दे सकता है।
प्रदेश में लगाए जाने हैं 1,41,44,119 स्मार्ट मीटर
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में कुल 1,41,44,119 स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं। पहले चरण में 58,65,372 और दूसरे चरण 82,78,747 स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। स्मार्ट मीटर लगाए जाने के लिए आयोग ने बिजली कंपनियों को 31 मार्च 2028 तक का समय दिया है। प्रदेश में स्मार्ट मीटर टोटेक्स मॉडल पर लगाए जा रहे हैं। इस मॉडल में मीटर लगाने, संचालन और रखरखाव का पूरा खर्च एक निजी एजेंसी उठाती है और बिजली कंपनियां उसे किस्तों के रूप में भुगतान करती हैं। यही लागत अंतत: उपभोक्ताओं से वसूली जाती है। आयोग ने इस मंजूरी को पूरी तरह अंतिम नहीं माना है, बल्कि इसे अस्थायी रूप से स्वीकृत किया है। भविष्य में टू-अप प्रक्रिया के दौरान कंपनियों के वास्तविक खर्च और प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी। यदि कंपनियां तय लक्ष्यों-जैसे समय पर स्मार्ट मीटर लगाना, सही बिलिंग और सेवाएं देना-पूरा नहीं कर पाती हैं, तो इस राशि में कटौती भी की जा सकती है।
513 करोड़ लीज चार्ज की वसूली
आयोग ने प्रदेश की बिजली कंपनियों को पहले चरण में लगाए जाने वाले स्मार्ट मीटर का काम पूरा करने की टाइमलाइन पहले ही तय कर दी है। इसके तहत ईस्ट जोन को जून 2026 और वेस्ट जोन को मार्च 2026 और मध्य क्षेत्र बिजली कंपनी को अप्रैल 2027 तक पहले चरण का काम पूरा करना होगा। इसके बाद बिजली कंपनियों को दूसरे चरण का काम पूरा करना होगा। तीनों बिजली कंपनियों को 31 मार्च 2028 तक प्रदेशभर में स्मार्ट मीटर लगाने होंगे। पहले चरण में ईस्ट डिस्कॉम में 25,90,124, सेंट्रल डिस्कॉम में 20,99,798 और वेस्ट डिस्कॉम में 11,75,450 इस तरह कुल 58,65,372 स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं। दूसरे चरण में ईस्ट डिस्कॉम में 34,34,754, सेंट्रल डिस्कॉम में 20,35,993 और वेस्ट डिस्कॉम में 28,08,000 इस तरह कुल 82,78,747 स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं। इसके लिए सेंट्रल डिस्कॉम 276.20 करोड़, ईस्ट डिस्कॉम 164.71 करोड़ और वेस्ट डिस्कॉम 72.71 करोड़ लीज चार्ज वसूलेगा। इस तरह मप्र में स्मार्ट मीटर परियोजना के तहत उपभोक्ताओं पर बड़ा वित्तीय बोझ डालने की तैयारी सामने आई है। बिजली वितरण कंपनियां वित्तीय वर्ष 2026-27 में उपभोक्ताओं से कुल 513.62 करोड़ का लीज चार्ज वसूलेंगी।
