25 प्रतिशत शराब दुकानों को खरीदारों का इंतजार

शराब दुकानों
  • रिजर्व प्राइज घटाने के बाद भी ठेकेदारों की रुचि नहीं

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश में शराब दुकानों की कीमतों को 20 प्रतिशत बढ़ाए जाने का फैसला सरकार के गले की हड्डी बन चुका है, जिसके चलते अब सरकार इस पर यू टर्न लेती नजर आ रही है। अब भी प्रदेश की 871 दुकानें नीलाम नहीं हो पाई हैं। ये कुल दुकानों का करीब 25 प्रतिशत हैं। इसे देखते हुए सरकार ने मजबूरी में इन दुकानों को पिछले साल से भी कम कीमत पर नीलाम करने का फैसला लिया है।  आलम यह है कि रिजर्व प्राइज घटाने के बाद भी ठेकेदारों ने रुचि नहीं दिखाई है। आबकारी विभाग अब तक शराब दुकानों की नीलामी के लिए आठ राउंड पूरे कर चुका है। इन आठ राउंड के बाद राज्य की कुल 1,172 दुकान समूहों में से अब तक 658 के ठेके आवंटित किए जा चुके हैं। इन 658 दुकान समूहों से सरकार को 14,603.83 करोड़ रुपये का राजस्व मिलना तय है। यह पिछले साल इन दुकान समूहों से हुई आय की तुलना में 25.57 प्रतिशत अधिक है। शुरुआत के तीन राउंड में जहां शराब दुकान के टेंडर रिजर्व प्राइज से 9 से 11 प्रतिशत तक ऊपर जा रहे थे, वहीं छठे राउंड से यह ग्राफ गिरना शुरू हुआ। छठे राउंड में रिजर्व प्राइज से 3.5 प्रतिशत, सातवें में 8.0 प्रतिशत और आठवें में 10 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। फिलहाल प्रदेश में लगभग 6062.30 करोड़ रुपये के रिजर्व प्राइज वाले समूह और दुकानें शेष हैं। इन दुकानों को बेचने के दवाव में आबकारी विभाग पहले ही ठेकेदारों के रिजर्व प्राइज से 15 प्रतिशत कम तक के ऑफर स्वीकार कर रहा है। इसके अलावा समूह के बजाय अब एक-एक दुकान के लिए भी टेंडर मंजूर किए जा रहे हैं। हालांकि शराब ठेकेदारों का रिस्पांस अब भी ठंडा है।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश सरकार ने नई आबकारी नीति 2026-27 के तहत प्रदेश की कुल 3553 दुकानों की कीमत को 20 प्रतिशत बढ़ाने का फैसला लिया था। इसके तहत 27 फरवरी से दुकानों की नीलामी शुरू की गई। इस एक माह में आठ चरणों में नीलामी के बाद भी प्रदेश की 871 दुकानें अब तक नीलाम नहीं हो पाई हैं। इसे देखते हुए सरकार ने अब इन दुकानों की नीलामी के लिए तय की गई कीमत पर 20 प्रतिशत कम की बोली लगाने का विकल्प भी खोल दिया है। यानी अब सरकार इन दुकानों को पिछले साल से भी कम कीमत पर बेचने को तैयार हो गई है। इसके तहत आज से नीलामी के 9वें चरण में घटी हुई कीमतों के साथ टेंडर भरे जा सकते हैं, जिन्हें कल खोला जाएगा।
पिछले साल से भी 4 प्रतिशत कम में बिकेंगी दुकानें
सरकार के इस यू टर्न को ऐसे समझें कि एक शराब दुकान की कीमत पिछले साल 100 रुपए थी, जिसे 20 प्रतिशत बढ़ाने के बाद इस साल उसकी कीमत 120 रुपए तय की गई थी। अब इस पर 20 प्रतिशत कम किए गए हैं। यानी 120 रुपए पर 20 प्रतिशत कम करने पर नई कीमत 96 रुपए हो चुकी है, जो पिछले साल जिस कीमत पर दुकान बिकी थी उससे भी 4 प्रतिशत कम है।
पिछले साल 35 प्रतिशत तक कम हुई थी कीमतें
ऐसा नहीं है कि नीलामी में सिर्फ इस बार ही सरकार को कम कीमत मिल रही है। पिछले साल भी प्रदेश की 25 से 30 प्रतिशत दुकानों को सरकार ने आखिरी समय तक खरीदार न मिलने पर 35 प्रतिशत तक कम कीमत पर नीलाम किया था। इंदौर में भी ऐसी कुछ दुकानें नीलाम हुई थीं। आखिरी समय में तो सरकार ने खुली नीलामी शुरू कर दी थी, जिस पर व्यापारी अपने हिसाब से कोई भी कीमत की बोली लगा सकते थे। इस बार भी आखिरी के दो दिनों में ऐसी स्थिति बन सकती है। आठवें राउंड में करीब 2444.56 करोड़ रुपये के रिजर्व प्राइज वाले शराब समूहों और दुकानों के लिए टेंडर बुलाए गए थे। जानकारी के अनुसार, इस राउंड में केवल 2,200 करोड़ रुपये के ऑफर प्राप्त हुए, जो कि रिजर्व प्राइज से 10 प्रतिशत कम हैं।
टारगेट से कम आय ने बढ़ाई चिंता
नीलामी के आगामी चार राउंड के लिए विभाग ने अलग-अलग अनुमान लगाए हैं। यदि शेष दुकानें वर्तमान एनुअल वैल्यू पर बिकती हैं, तो कुल राजस्व 19,601 करोड़ तक जा सकता है, जो पिछले वित्त वर्ष से 17.9 प्रतिशत अधिक होगा। यदि शेष वाइन शॉप्स की बोलियां रिजर्व प्राइज से 15 प्रतिशत कम पर आती हैं, तो राजस्व गिरकर 18,852 करोड़ रह जाएगा। यह सरकार के इस साल तय रिजर्व प्राइज से लगभग 1200 करोड़ कम होगा। सरकार ने पिछले साल शराब दुकानों की नीलामी से 16,683 करोड़ का राजस्व कमाया था। इस लिहाज से 15 फीसदी कम पर शेष दुकानों के टेंडर होने के बाद भी सरकार को इस वर्ष पिछले साल के मुकाबले 13.4 प्रतिशत ज्यादा रेवेन्यू हासिल होगा।

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