विकास से उपजे विश्वास का संचार करते मोहन यादव

मोहन यादव
  • अवधेश बजाज कहिन

विकास की आस सहज मानवीय प्रवृत्ति है। फिर राजधर्म के प्रमुख अवयवों में आम जनता के बीच विकास से उपजे विश्वास को मजबूत करना बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। इस संदर्भ में डॉ. मोहन यादव के बतौर मुख्यमंत्री तीसरे जन्मदिन पर प्रदेश की प्रगति की बात  करना समीचीन हो जाता है।  सुभीते के लिए ताजा उदाहरण लिया जा सकता है। मंगलवार को डॉ. यादव दतिया जिले के लिए 62 करोड़ की लागत वाले एक दर्जन विकास कार्यों की सौगात देते हैं। वहां उनके ऐसे कामों का जनता ने जिस तरह दिल खोलकर स्वागत किया, उसे देख यादव बोले, ‘एक दिन पहले ही मेरा जन्मदिन मन गया लगता है।’
बात केवल जन्मदिन मनाने या मन जाने की नहीं है। मुख्यमंत्री बनने के बाद से अब तक डॉ. यादव का शायद ही कोई ऐसा सार्वजनिक कार्यक्रम रहा हो, जिसमें उन्होंने राज्य-हित के लिए उपहार प्रदान न किया हो। यदि बात इस तरह की कोई घोषणा करने वाली हो, तो उसके अनुपालन में भी वो पीछे नहीं रहते हैं। साल 2028 में होने जा रहे सिंहस्थ की तैयारियों को ही देख लीजिए। डॉ. यादव इस आयोजन को विराट सफलता दिलाने के लिए पूरे प्रयासों के साथ जुटे हुए हैं। एक-एक गतिविधि पर खुद निगाह रख रहे हैं। प्रदेश की प्रगति हेतु निवेश सर्वाधिक महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए मोहन यादव ने यदि देशाटन में कोई कसर नहीं उठा रखी है, तो वो विदेश भी गए। ‘देस-परदेस’ वाले प्रयासों के परिणाम को डॉ. यादव के हालिया जयपुर प्रवास से समझा जा सकता है। पिंक सिटी में मध्यप्रदेश सरकार के इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट रोड शो को जो प्रतिसाद मिला, वो बताता है कि एक बार फिर राज्य की तरक्की के लिए नए दरवाजे खुल रहे हैं। इन दरवाजों के इर्द-गिर्द वाले रोशनदान देखिए। डॉ. यादव ने साल 2026 को ‘कृषि वर्ष’ घोषित किया है। इसका राज्य को भरपूर फायदा होना तय है। क्योंकि उनका मकसद खेती को उद्योग से जोड़ना है, जिससे फूड प्रोसेसिंग, डेयरी, वेयरहाउसिंग, कोल्ड चेन और एग्री-लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में निवेश के चलते देहाती अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलना तय है।
बात अर्थव्यवस्था की हो तो इसके अनर्थ के विरुद्ध संघर्ष में भी डॉ. यादव का कौशल देखते ही बनता है। प्रदेश की माली हालत को लेकर शुभ-अशुभ वाले आसन्न संकेतों के बीच भी मुख्यमंत्री ने कुशल माली की तरह लाड़ली बहना योजना की हरियाली को तनिक-भी मुरझाने नहीं दिया। उन्होंने बल्कि इस योजना को अधिक राशि वाला खाद-पानी भी मुहैया करा दिया है। किसी भी समाज की प्रगति की गति स्त्री-शक्ति के बिना संभव नहीं है। फिर बीते साल की 17 दिसंबर को राज्य विधानसभा के विशेष सत्र का उल्लेख यहां किया जा सकता है। क्योंकि इसमें डॉ. यादव ने राज्य के विकास हेतु अपने होमवर्क और उसके क्रियान्वयन की जो बातें कहीं, उसके लिए विरोधी दल ने भी एक तरीके से सराहना  वाले अंदाज में सहमति जताई थी। इस तरह यह ,कहना गलत नहीं होगा कि डॉ. यादव ने स्वस्थ लोकतंत्र वाली भावना को भी विकसित किया है। वो आरंभ से ही विपक्ष को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते हैं। सियासी मतभेदों के बावजूद उन्होंने  अपने विरोधियों के लिए सदाचार की मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं किया है। फिर यह भी तो विकास वाली आस ही है कि डॉ. यादव लोगों से सीधे और सहज संवाद सहित संपर्क में कोई कमी नहीं रखते हैं। किसी खोमचे पर खड़े होकर चाय बनाता मुख्यमंत्री जब इस बात की फ़िक्र करता है कि कोई बच्ची स्कूल क्यों नहीं जा रही, तब ये साफ़ है कि वो सबका साथ-सबका विकास वाली नीति को और अधिक ठोस स्वरूप प्रदान करते हुए आगे बढ़ते जा रहे हैं। डॉ. यादव के कार्यकाल में मध्यप्रदेश में नित नए विकास और उससे उपजे विश्वास को जो संचार हुआ है, वो डॉ. मोहन यादव के इस जन्मदिन को और भी अधिक ख़ास बना देता है।

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