नेताओं की खींचतान में अटकी मोर्चा कार्यकारिणी

कार्यकारिणी
  • भाजयुमो सहित कई मार्चों की कार्यकारिणी का कार्यकर्ताओं को लंबे समय से इंतजार

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
भाजपा कार्यकर्ता आधारित पार्टी है। यानी पार्टी में कार्यकर्ता ही सबकुछ है। लेकिन विडंबना यह है कि प्रदेश के अधिकांश मार्चों की कार्यकारिणी का गठन इन्हीं कार्यकर्ताओं के कारण अटकी हुई है। दरअसल, प्रदेश के सांसद, विधायक और अन्य वरिष्ठ नेताओं की कोशिश है कि पार्टी की गठित होने वाली कार्यकारिणियों में उनके समर्थकों को अधिक से अधिक मौका मिले। शायद इसी कारण प्रदेश में भाजयुमो सहित कई अन्य मोर्चों की कार्यकारिणी अटकी हुई है। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में जुटी है। भाजपा नियुक्तियों में सामाजिक समीकरण भी साधना चाहती है। इससे नियुक्ति प्रक्रिया में देरी भी हो रही है। भाजपा ने दो दिन पहले महिला मोर्चा, पिछड़ा मोर्चा और अनुसूचित जनजाति मोर्चा की कार्यकारिणी घोषित की है। इनमें से महिला मोर्चा और पिछड़ा मोचों के जिला अध्यक्षों की घोषणा नहीं हो पाई है। वहीं अनुसूचित जनजाति मोर्चा में सिर्फ 21 जिलों के जिला अध्यक्षों की घोषणा हो पाई है।
गौरतलब है कि मोर्चा अध्यक्षों की घोषणा भाजपा ने चार महीने पहले कर दी, लेकिन इन  मोर्चों की पूरी कार्यकारिणी अब तक घोषित नहीं हो पाई है। भाजपा की सबसे अहम कड़ी युवा मोर्चा की कार्यकारिणी का इंतजार लंबे समय से युवा कार्यकर्ता कर रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल चुनाव से पहले अपनी टीम को मजबूत करने में जुटे हुए हैं। पिछले साल अगस्त से जिला स्तर पर कार्यकारिणी को मजबूत करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। जिला कार्यकारिणी का गठन भी लंबा खिंचा। भाजपा को प्रदेश के 62 जिलों की कार्यकारिणी घोषित करने में आधा साल लग गया। इस दौरान भोपाल समेत कई जिलों में कार्यकारिणी घोषित होने के बाद विवाद की स्थिति बनी। मोर्चा अध्यक्षों की घोषणा पिछले साल नवंबर में हो गई थी। इसके बाद से मोर्चा की कार्यकारिणी अटकी हुई थी। अब तीन मोचों की कार्यकारिणी घोषित की गई है। वह भी अधूरी। भाजपा ने पिछड़ा वर्ग मोर्चा और अनुसूचित जनजाति मोर्चा में महिला कार्यकर्ताओं की अनदेखी की है। भाजपा की पिछड़ा मोर्चा की कार्यकारिणी में 36 नियुक्तियों की गई हैं। इसमें एक भी महिला कार्यकर्ता को स्थान नहीं मिला है। वहीं अनुसूचित जनजाति मोर्चा में 21 जिला अध्यक्षों की नियक्ति की गई। इनमें से सिर्फ देवास जिले में महिला को जिला अध्यक्ष बना गया है। अन्य किसी भी जिले में महिलाओं को जिम्मेदारी नहीं दी गई है।
बूथ और मंडल स्तर तक संगठन को मजबूत करने की रणनीति
भाजपा संगठन को बूथ और मंडल स्तर तक मजबूत करने की रणनीति पर काम करने का दावा कर रही है। इसके लिए प्रशिक्षण अभियान भी चलाया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए नए कार्यकर्ताओं, खासकर युवाओं और महिलाओं को सक्रिय किया जा रहा है। साथ ही उन्हें संगठन में अहम जिम्मेदारियां भी सौंपी जा रही हैं। इसके तहत विभिन्न मोर्चों-युवा, महिला, किसान, अनुसूचित जाति और जनजाति मोर्चा को भी मजबूत करने में जुटी है। इनमें जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की जानी है। इसके लिए कोर कमेटी से प्रत्येक पद के लिए तीन-तीन नाम मागे गए हैं। भाजपा संगठन में नियुक्तियों को लेकर प्रभार वाले जिलों की जिम्मेदारी प्रभारी मंत्रियों को सौंपी गई थी। क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल के निर्देश थे कि मंत्री अपने-अपने प्रभार वाले जिलों में जाकर बैठकें करेंगे और चर्चा के आधार पर सक्रिय कार्यकर्ताओं को संगठन में अहम जिम्मेदारियां दी जाएंगी। लेकिन संगठन के इन निर्देशों का पालन प्रदेश के कई प्रभारी मंत्रियों ने नहीं किया। कुछ प्रभारी मंत्रियों ने जिलों में जाने के बजाय अपने बंगलों पर ही कार्यकर्ताओं को बुलाकर बैठकें कर ली और नामों के पैनल तैयार कर लिए। नेताओं की इस तरह की गैर-जिम्मेदारी के कारण संगठन की नियुक्ति प्रक्रिया में देरी हो रही है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मंशा सामाजिक संतुलन साधने के साथ सक्रिय और जमीनी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपने की है, लेकिन इस काम में गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। इसी वजह से पहले जिला कार्यकारिणी के गठन में देरी हुई और अब मोर्चा कार्यकारिणी के गठन में भी विलंब देखने को मिल रहा है।

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