
- प्रभारी मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड: न दौरे, न बैठकें, न रात्रि प्रवास
गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में सरकार ने मंत्रियों को जिलों का प्रभार सौंपा है ताकि वहां के दौरे कर, बैठकें कर, रात्रि प्रवास कर मंत्री विकास का खाका तैयार करें और योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन करवाएं। लेकिन मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों से दूरी बनाते दिख रहे हैं। दरअसल जिलों में आम लोगों के साथ ही कार्यकर्ताओं के लिए मंत्रियों की उपलब्धता सहज रहे और साथ में विकास और प्रशासनिक कार्यों में भी दिक्कत न हो और काम सुचारु ढंग से चलते रहें इसके लिए पार्टी ने प्रभारी मंत्रियों को संबंधित जिलों में बैठने के निर्देश किए थे। लेकिन धीरे-धीरे प्रभारी मंत्री अपने दायित्व से विमुख हो रहे हैं। सरकार द्वारा बनाई प्रभारी मंत्रियों की व्यवस्था पर मंत्री ही पानी फेरते हुए नजर आ रहे हैं और प्रभारी मंत्रियों ने अपने जिलों से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। प्रभारी मंत्रियों का हाल ये है कि जिलों से सभी पदाधिकारियों को भोपाल बुलाकर ही बैठकें करने लगे हैं। जबकि संगठन के मद्देनजर मंत्रियों को जिले के कोर ग्रुप के साथ हर महीने बैठक करने के निर्देश थे। समझा जा सकता है कि प्रभारी मंत्री किस कदर सरकार के निर्देशों पर पानी फेरते हुए नजर आ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश में भाजपा संगठन की कोर कमेटियों की कई बैठकें प्रभारी मंत्रियों ने जिलों के बजाए भोपाल में ही संपन्न कर लीं। भाजपा हाईकमान के निर्देश पर इस महत्वपूर्ण बैठकों में संगठन के पैंडिंग मामले सुलझाने, महा प्रशिक्षण अभियान की कार्ययोजना और नियुक्तियों के लिए संभावित नाम फायनल किए जाना है। सागर, रीवा और भोपाल सहित कतिपय अन्य जिलों में प्रभारी मंत्रियों की मौजूदगी में ये बैठकें हो गईं। लेकिन पन्ना, खरगोन, खंडवा, छतरपुर, नरसिंहपुर सहित हरदा आदि जिलों के प्रभारी मंत्रियों ने कोर ग्रुप के सदस्यों को भोपाल बुलाकर संगठन का होमवर्क पूरा कर लिया। जिलों में कार्यकर्ताओं से संपर्क बनाए रखने के लिए मंत्रियों को प्रभार के जिलों में प्रवास करने को कहा गया है। सूत्रों का कहना है कि कोर ग्रुप में जिले के जिलाध्यक्ष, पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और प्रभारी व स्थानीय मंत्री सहित 17 प्रमुख नेता बतौर सदस्य नामित हैं।
भोपाल में ही होने लगी कोर गु्रप की बैठक
जिला और मंडल स्तर पर महाप्रशिक्षण अभियान के पहले संगठन ने प्रदेश के सभी 62 जिलों में कोर(प्रबंध) समितियों की बैठकें प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए हैं। पार्टी संगठन ने जिला कोर ग्रुप में 17 वरिष्ठ नेताओं को नामित किया है। इनमें प्रभारी मंत्री, सांसद लोकसभा, सांसद राज्यसभा(जिला मुख्यालय), राष्ट्रीय पदाधिकारी, प्रदेश पदाधिकारी, स्थानीय मंत्री, विधायक, जिलाध्यक्ष, जिला महामंत्री (तीनों) महापौर, जिला पंचायत अध्यक्ष, संभाग प्रभारी, जिला प्रभारी, निवर्तमान जिलाध्यक्ष और जिले में निवासरत अन्य जिले के पदाधिकारी। कुछ प्रभारी मंत्रियों ने कैबिनेट और भोपाल में आयोजित प्रदेश स्तरीय बैठकों के चलते कोर ग्रुप के सदस्यों को बुलाकर अपने आवास अथवा अन्य स्थानों पर बैठक की औपचारिकता पूरी कर ली। मंत्री इंदर सिंह परमार ने पन्ना -दमोह जाने के बजाए कोर ग्रुप को भोपाल बुला लिया। हरदा-खरगोन के प्रभारी मंत्री विश्वास सारंग ने भी राजधानी में बैठक कर ली। खंडवा जिले के प्रभारी एवं प्रदेश के पर्यटन-संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने यह महत्वपूर्ण बैठक भोपाल में संपन्न की। उन्होंने कोर ग्रुप को बुलाकर पर्यटन निगम के होटल पलाश में संगठन के कामकाज को संपन्न करा दिया। कृषि मंत्री एवं छतरपुर के प्रभारी ऐदल सिंह कंषाना ने भी कोर ग्रुप को भोपाल बुला लिया। मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने 17 मार्च को भिंड जिला और उदय प्रताप सिंह ने 16 मार्च को कटनी जिला कोर ग्रुप की बैठक भोपाल में ले ली थी। इस संदर्भ में भिंड व रीवा के प्रभारी मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का कहना है कि 17 मार्च को आवश्यक कार्य की वजह से, समयाभाव के कारण मैंने भिंड जिला कोर ग्रुप की बैठक भोपाल में ही ले ली थी। वैसे मैं अपने प्रभार के जिले में सबसे अधिक समय देता हूं और आमजन के लिए उपलब्ध रहता हूं। मेरे पास रीवा का भी प्रभार है। वहां पिछले माह ही बैठक की थी। कटनी के भाजपा जिला अध्यक्ष दीपक टंडन सोनी का कहना है कि वैसे कोर ग्रुप की बैठक जिले में होती है, लेकिन उस दिन कृषि महोत्सव के कार्यक्रम में हम सब भोपाल में ही थे इसलिए मंत्री जी के साथ उनके बंगले पर ही बैठक कर ली। यह रूटीन बैठक है, हर माह जिले में होती है। भिंड भाजपा जिला अध्यक्ष देवेंद्र नरवरिया का कहना है कि मंत्री जी भोपाल में थे और हम भी भोपाल आए हुए थे इसलिए कोर ग्रुप की बैठक वहीं कर ली, वैसे जिले में ही नियमित बैठक होती है।
18 माह में कई मंत्री जिलों तक नहीं पहुंचे
अगस्त 2024 में सरकार ने मंत्रियों को जिलों का प्रभार सौंपते हुए साफ निर्देश दिए थे कि प्रभारी मंत्री नियमित दौरे करें, रात रुकें और स्थानीय स्तर पर बैठकें लें। लेकिन डेढ़ साल बाद सामने आए रिपोर्ट कार्ड में कई दिग्गज मंत्री इन कसौटियों पर खरे नहीं उतर पाए हैं। ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ मंत्री ऐसे हैं जो 18 महीनों में एक बार भी अपने प्रभार वाले जिलों में नहीं गए। कई ने न बैठकें लीं, न रात्रि प्रवास किया। पार्टी स्तर पर इसे गंभीर माना जा रहा है और आने वाले दिनों में जिलों के प्रभार में बदलाव तथा संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में यह रिपोर्ट अहम भूमिका निभा सकती है। रिपोर्ट कार्ड के हिसाब से डिप्टी सीएम व वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा जबलपुर जैसे प्रभार वाले जिले में सिर्फ दो रात रुके और एक बैठक ली। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला भी शहडोल में सिर्फ दो रात रुके और दो बैठकें लीं। कैलाश विजयवर्गीय धार में रात रुके ही नहीं। सतना में भी एक रात रहे। राकेश सिंह ने नर्मदापुरम की अभी तक कोई बैठक नहीं ली। प्रहलाद पटेल भिंड में सिर्फ दो रात रुके। मंत्रियों को प्रभार के जिले में रात्रि विश्राम के निर्देश दिए गए हैं। प्रहलाद सिंह पटेल अपने प्रभार के जिले में केवल दो रात ही रुके। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा अपने प्रभार के जिले जबलपुर और राजेंद्र शुक्ल ने शहडोल में दो बैठकें ही लीं और दो रात ही रुके। सार यही है कि न तो मंत्री प्रभार के जिलों में नियमित रात्रि विश्राम करते हैं और न ही जनता से संवाद के लिए आसानी से उपलब्ध रहते हैं। इससे पार्टी कार्यकर्ता व आमजन मंत्रियों के कामकाज को लेकर संतुष्ट नहीं है। केवल मुख्यमंत्री ही प्रभार के जिले में सक्रिय मुख्यमंत्री मोहन यादव ही अपने प्रभार के जिले इंदौर में सक्रिय रहते हैं, हर सप्ताह वह इंदौर की जनता के लिए उपलब्ध भी हो जाते हैं लेकिन मंत्रियों की कार्यशैली उनसे ठीक उलट है। जबकि मंत्रियों को प्रभार के जिले में रात्रि विश्राम के भी निर्देश हैं।
मंत्रियों के दौरे और बैठकों की यह स्थिति
धार जिले के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आखिरी दौरा 11 जनवरी को किया था। केवल जी राम जी योजना के लिए मीडिया से चर्चा की। देवास के प्रभारी मंत्री जगदीश देवड़ा आखिरी दौरा आठ जनवरी को पार्टी कार्यक्रम में शामिल हुए। इनके प्रभार वाले जिले में कोर ग्रुप बना है लेकिन बैठक अब तक नहीं हुई। नीमच प्रभारी मंत्री निर्मला भूरिया ने आखिरी दौरा 14 मार्च को किया। 26 जनवरी से अब तक करीब तीन बार जिले का दौरा कर चुकी हैं और कोर ग्रुप की बैठक ली है। वहीं मंदसौर प्रभारी मंत्री निर्मला भूरिया ने हाल ही में दौरा कर कोर ग्रुप की बैठक की। एक बार रात्रि विश्राम भी किया है। बुरहानपुर प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बीते दो माह में चार बार आठ जनवरी, 26 जनवरी, 14 फरवरी और 15 मार्च को दौरा किया है। खरगोन प्रभारी मंत्री विश्वास सारंग का आखिरी दौरा 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस पर था। उन्होंने कोर ग्रुप की बैठक लंबे समय से नहीं ली है। रतलाम प्रभारी मंत्री विजय शाह ने आखिरी दौरा 14 दिसंबर, 2025 को किया था। वहीं छिंदवाड़ा प्रभारी मंत्री राकेश सिंह पिछले पिछले महीने गए थे। भाजपा कोर ग्रुप के साथ बैठक ली। जिला प्रशासन की बैठक ली थी। बालाघाट प्रभारी मंत्री उदय प्रताप सिंह कुछ दिन पहले दौरे पर गए थे। जिला प्रशासन और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की थी। सिवनी प्रभारी मंत्री करण सिंह वर्मा 15 मार्च को गए थे, पार्टी के कोर ग्रुप की बैठक ली। मंडला प्रभारी मंत्री दिलीप जायसवाल।हालही मेंएक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। डिंडौरी प्रभारी मंत्री प्रतिभा बागरीआखिरी बार 14 दिसंबर, 2025 को जिले में गई थीं। शहडोल प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ला हालही में एक संस्था के कार्यक्रम में गए थे। प्रशासनिक और पार्टी की कोर ग्रुप की बैठक ली। उमरिया प्रभारी मंत्री नागर सिंह चौहान गतदिनों जिला प्रवास पर थे। जिला प्रशासन की बैठक भी ली। कटनी प्रभारी मंत्री उदय प्रताप सिंह 14 मार्च को बरही गए थे, कटनी में रुके। पार्टी नेता व कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। दमोह प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार 11 मार्च को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में गए थे। प्रभारी मंत्री बनने के बाद से केवल तीन बार ही दमोह गए हैं।। रीवा प्रभारी मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल आखिरी बार 18 फरवरी को गए थे, जिला प्रशासन और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की थी। सतना प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मार्च के पहले सप्ताह में गए थे और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की थी।
