19 लाख से अधिक किसानों को अतिरिक्त बोनस देगी सरकार

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  • मप्र में दो चरणों में होगी गेहूं की खरीदी

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्यप्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की तैयारियां तेजी से चल रहीं हैं। इधर कई जगहों पर कटाई में विलंब हो रहा है। ऐसे में राज्य सरकार ने गेहूं खरीदी की तारीख आगे बढ़ा दी है। अब प्रदेश के 4 संभागों भोपाल, नर्मदापुरम, उज्जैन, इंदौर के जिलों में 1 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी होगी जबकि बाकी संभागों में खरीदी 7 अप्रैल से होगी। गेहूं उपार्जन के लिए इस बार 19 लाख से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया है। इन किसानों को प्रदेश सरकार अतिरिक्त बोनस भी देगी।
मप्र में इस बार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए 19 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन  के लिए प्रदेश के कुल 1904651 किसानों ने पंजीयन कराया है। गत वर्ष 15 लाख 44 हजार किसानों ने गेहूं बेचने के लिए पंजीयन कराया था। सरकार ने गेहूं खरीदी पर 40 रुपए अतिरिक्त बोनस देने का भी फैसला लिया है।  किसानों को समर्थन मूल्य 2,585 रुपये में 40 रुपये प्रोत्साहन राशि जोड़कर 2,625 रुपये प्रति क्विंटल दिए जाएंगे। मंडियों में अभी ढाई हजार रुपये प्रति क्विंटल के आसपास भाव मिल रहा है। अतिवृष्टि और ओलावृष्टि के कारण गेहूं की गुणवत्ता भी कहीं न कहीं प्रभावित हुई है। ऐसे में किसानों के लिए सबसे लाभकारी सरकार को उपज देना ही है।
पिछले साल से चार लाख ज्यादा पंजीयन
 प्रदेश में इस बार 19.04 लाख से अधिक किसानों ने एमएसपी पर उपज बेचने पंजीयन कराया है। यह संख्या पिछले साल के मुकाबले चार लाख अधिक है। प्रदेश में रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं है। वर्ष 2025 में 15.44 लाख किसानों ने एमएसपी पर गेहूं बेचने पंजीयन करवाया था। इन किसानों ने 34.93 लाख एकड़ क्षेत्र में गेहूं बोया था और समर्थन मूल्य 2,425 रुपये प्रति क्विंटल था। सरकार ने प्रति क्विंटल 175 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी थी। हालांकि, केवल नौ लाख किसानों ने 77.75 लाख टन गेहूं बेचा, जिसके लिए 17,870 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया। वर्ष 2024 में 49 लाख टन गेहूं ही खरीदा गया था। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस बार किसानों द्वारा अधिक पंजीयन कराने का एक कारण तो सरकार द्वारा समर्थन मूल्य 2,585 रुपये के ऊपर 40 रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि देना है। यह मंडी में मिल रहे भाव से अधिक है। वहीं, दूसरा कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मची उथल-पुथल है। किसानों को आशंका है कि गेहूं के भाव इस बार बाद में नहीं बढ़ेंगे क्योंकि व्यापारी निर्यात प्रभावित होने के आसार देखकर उपज खरीदकर नहीं रखेंगे। स्वाभाविक तौर पर इसका असर बाजार पर पड़ेगा। यही कारण है कि संजीयन के अंतिम चार दिनों में चार लाख किसानों ने पंजीयन कराया।
लक्ष्य से अधिक गेहूं की होगी खरीदी
प्रदेश में जिस तरह किसानों ने रिकॉर्डतोड़ पंजीयन करवाया है उससे गेहूं खरीदी के आंकड़े भी बढ़ेगे। भारत सरकार ने प्रदेश को 78 लाख टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य दिया है। इस बार उत्पादन 385 लाख टन के आसपास होने की उम्मीद है। ऐसे में संभावना है कि आवक अधिक हो, सरकार इसे खरीदने से पीछे नहीं हटेगी। मंगलवार को मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में निर्णय लिया गया कि सरप्लस गेहूं यदि भारत सरकार स्वीकार नहीं करती है तो उसे राज्य नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा निविदा के माध्यम से बाजार में बेचा जाएगा। इस उपज के भुगतान, परिवहन, भंडारण आदि पर जो खर्च आएगा, उसकी प्रतिपूर्ति निगम को मुख्यमंत्री कृषक फसल उपार्जन सहायता योजना से की जाएगी। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत का कहना है कि किसानों को उपज बेचने में कोई असुविधा न हो, इसके लिए स्लॉट बुकिंग की सुविधा दी है। इसमें किसान स्वयं यह बता सकते हैं कि वे उपज बेचने के लिए कब आएंगे। भुगतान तीन दिन में हो, इसकी व्यवस्था बनाई गई है। उधर, खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी का कहना है कि कोरोना महामारी के समय 16 लाख से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया था। 129 लाख टन गेहूं का रिकार्ड उपार्जन हुआ। आमतौर पर पंजीकृत किसानों में से 70 से 80 प्रतिशत तक किसान एमएसपी पर उपज बेचते हैं।

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