
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मप्र सरकार का फोकस विकास पर है। सरकार गांव से लेकर शहर तक एक समान विकास कराने की नीति पर काम कर रही है। लेकिन सरकार छठे वित्त आयोग का गठन करना ही भूल गई है। जबकि अगस्त 2025 में छठे वित्त आयोग के गठन का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था। सोलहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के तारतम्य में राज्य वित्त आयोग मप्र सरकार को पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों को राज्य के विभाजनीय कोष में से राशि आवंटन की सिफारिश करेगा। इसी आधार पर अगले पांच साल के लिए राज्य सरकार की ओर से स्थानीय निकायों को राशि आवंटित की जाएगी। आयोग के गठन में देरी से स्थानीय निकायों को राशि आवंटन में परेशानी आएगी। अगर छठे वित्त आयोग का गठन नहीं हुआ तो पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों को मिलने वाली राशि अधर में लटक सकती है।
जानकारी के अनुसार, सोलहवें वित्त आयोग ने 2026-31 की अवधि के लिए मप्र समेत सभी राज्यों के ग्रामीण और नगरीय निकायों को कुल 7.91 लाख करोड़ रुपए से अधिक की सिफारिश की है। इस राशि में से ग्रामीण निकायों के लिए 4.35 लाख करोड़ और नगरीय निकायों के लिए करीब 3.56 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य पंचायतों और शहरों का समग्र विकास करना है। सोलहवें वित्त आयोग की सिफारिशें एक अप्रैल, 2026 से लागू होंगी। वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राज्य वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है। इसका गठन संविधान के अनुच्छेद 243-आई के तहत किया जाता है। राज्य वित्त आयोग का गठन प्रत्येक पांच साल के बाद किया जाएगा। प्रत्येक राज्य में वित्त आयोग का गठन राज्यपाल की मंजूरी से होता है। आयोग में एक अध्यक्ष और अधिकतम चार सदस्य होंगे, जिन्हें राज्यपाल की अनुशंसा पर प्रदेश सरकार नियमित करेगी। सामान्यत: आयोग का अध्यक्ष सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, वित्त एवं प्रशासन के अनुभवी विशेषज्ञ या वरिष्ठ राजनेता को बनाया जाता है। राज्य वित्त आयोग मुख्यत: राज्य की पंचायती राज संस्थाओं एवं नगर निकायों की आर्थिक स्थिति की समीक्षा करेगा और स्थानीय निकायों के बीच विभाजनीय कोष में से राशि के वितरण की सिफारिश करेगा। आयोग अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपेगा। राज्यपाल इस रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखेंगे और सरकार उस पर कार्रवाई करेगी।
अगस्त में भेजा गया था प्रस्ताव
सोलहवें वित्त आयोग की सिफारिशों को देखते हुए मप्र सरकार के वित्त विभाग ने छठे राज्य वित्त आयोग के गठन के संबंध में प्रस्ताव तैयार कर अगस्त, 2025 में मुख्यमंत्री सचिवालय को भेजा था। आठ महीने के बाद भी अब तक आयोग का गठन नहीं हो पाया है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि सीएम सचिवालय से स्वीकृति मिलने के बाद यह प्रस्ताव राजभवन भेज दिया गया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद छठे राज्य वित्त आयोग का गठन होगा। गौरतलब है कि राज्य वित्त आयोग स्थानीय निकायों के बीच धन का सही वितरण सुनिश्चित करता है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होती है।
