- साल 2027 तक समाप्त हो जाएंगे प्रांत संघचालक जैसे कई पद

गौरव चौहान
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में आने वाले समय में बड़ा संगठनात्मक परिवर्तन देखने को मिलेगा। साल 2027 के बाद प्रांत व्यवस्था पूरी तरह समाप्त कर दी जाएगी और उसकी जगह संभाग आधारित नई संरचना लागू होगी। इसके साथ ही प्रांत संघचालक, प्रांत कार्यवाह और प्रांत प्रचारक जैसे प्रमुख दायित्व भी खत्म हो जाएंगे। वर्तमान प्रांत कार्यकारिणी का कार्यकाल मार्च 2027 तक जारी रहेगा, क्योंकि इसका कार्यकाल 3 वर्ष का होता है और 2024 में इसका गठन हुआ था। इसके बाद नई व्यवस्था लागू होगी, जिसमें संगठन का पूरा ढांचा विकेंद्रीकरण की ओर बढ़ेगा। नई संरचना के तहत प्रांत की जगह संभाग कार्यकारिणी काम करेगी। मध्य भारत प्रांत को दो संभागों में बांटा जाएगा। ग्वालियर संभाग में चंबल का विलय होगा, जबकि भोपाल संभाग में नर्मदापुरम को जोड़ा जाएगा। संभाग स्तर पर वही जिम्मेदारियां होंगी जो अभी प्रांत स्तर पर निभाई जाती हैं। यह जानकारी मप्र प्रांत संघ चालक अशोक पांडे ने राजधानी के विश्व संवाद केंद्र में आयोजित पत्रकारवार्ता के दौरान कही।
प्रांत संघ चालक अशोक पांडे ने बताया कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य संघ के कार्य को नीचे तक ले जाना और कार्यकर्ताओं की सक्रियता को बढ़ाना है। केंद्रीय कार्यकारिणी के कई अधिकार अब क्षेत्र स्तर पर दिए जा रहे हैं, जबकि प्रांत स्तर के कार्य संभाग संभालेंगे। प्रदेश स्तर पर केवल समन्वय के लिए एक प्रदेश कार्य समिति बनाई जाएगी, जिसमें प्रदेश प्रचारक और प्रदेश कार्यवाहक जैसे सीमित पद रहेंगे। यही लोग सरकार और संघ के बीच तालमेल रखेंगे। जबकि बाकी कार्यकर्ता संगठन को मजबूती देने का काम करेंगे। नई व्यवस्था के तहत पूरे प्रदेश का काम देखने के लिए प्रदेश समिति होगी, जिसमें प्रदेश प्रचारक प्रमुख रहेंगे। संभाग में कार्यकारिणी होगी। इसका काम संभागीय प्रचारक देखेंगे। प्रांतीय व्यवस्था खत्म करने का यह बदलाव संघ में 100 साल में पहली बार हुआ है। नई संरचना के अनुसार विभागीय व्यवस्था बनी रहेगी, लेकिन उसके ऊपर संभाग स्तर की इकाई बनाई जाएगी। इसी आधार पर पदनाम और जिम्मेदारियों का निर्धारण किया जाएगा। नई रचना के तहत मध्य प्रदेश में सात संभाग बनाए जाएंगे, जिनमें भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, सागर, जबलपुर और रीवा शामिल होंगे। इन संभागों में संभाग प्रचारकों की नियुक्ति की जाएगी।
अब मप्र में होंगे सात संभागीय प्रचारक
प्रांत संघ चालक अशोक पांडे ने बताया कि देशभर में इस नई व्यवस्था के तहत कुल 85 संभाग बनाए जाएंगे। मध्य प्रदेश में 7 संभाग होंगे, जबकि मध्य क्षेत्र में कुल 9 संभाग शामिल रहेंगे, जिनमें छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और रायपुर भी शामिल हैं। वर्तमान में भी संघ तेजी से विस्तार कर रहा है। मध्यभारत प्रांत में 2481 स्थानों पर 3842 शाखाएं संचालित हो रही हैं। इसके अलावा सैकड़ों सेवा कार्य, प्रशिक्षण वर्ग और सामाजिक अभियान चलाए जा रहे हैं, जो संघ की जमीनी पकड़ को और मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हरियाणा के पट्टीकल्याणा (समालखा) में आयोजित संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में यह निर्णय हुआ है। वहीं इस वर्ष को संत रविदास जन्म जयंती वर्ष के रूप में भी मनाया जाएगा। साथ ही भाजपा में प्रचारक भेजने का निर्णय अब क्षेत्र स्तर पर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि संघ का कार्यक्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। इसको देखते हुए यह बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था से संघ के काम में ज्यादा मजबूती आएगी। अशोक पांडे ने कहा कि मध्य भारत प्रांत में 20 दिसंबर 2025 से 20 जनवरी 2026 के मध्य 1814 मंडल एवं 759 बस्तियों में 1500 हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन किया गया है। इस सम्मेलनों में 52 लाख 63 हजार से अधिक समाजजनी की सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि समाज का संघ के प्रति विश्वास बढ़ा है। इन सम्मेलनों के के माध्यम से समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया। वहीं शताब्दी वर्ष के अवसर पर संघ के विचार को समाज के प्रमुख जनों के बीच लेकर जाने के लिए प्रमुख जन गोष्ठियों का आयोजन किया गया। प्रतिनिधि सभा के पहले तक प्रांत में महानगरीय स्तर के 61 स्थानों सहित 193 स्थानों पर प्रमुख जन गोष्ठियों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें 17 हजार 494 प्रमुखजन शामिल हुए।
वयं सेवकों ने 27 लाख से अधिक परिवारों से किया संपर्क
संघचालक ने कहा कि संघ शताब्दी वर्ष पर व्यापक गृह संपर्क अभियान ने समाज के हर द्वार तक दस्तक दी। पूरे प्रांत में लगभग 80 हजार स्वयंसेवकों ने 23 हजार से अधिक टोलियां बनाकर लगभग 27 लाख 46 हजार परिवारों से सीधा संपर्क किया। इसके साथ ही समाज के प्रबुद्ध वर्ग को संघ विचार से जोडऩे के लिए अखिल भारतीय से लेकर विभाग स्तर तक के कार्यकर्ताओं ने 7922 प्रमुखजनों से संपर्क साधा। अशोक पांडे ने बताया कि गृह सम्पर्क में वर्ग और समुदाय के किसी पूर्वाग्रह के बिना घरों में जाकर परिवारों से मिलकर संघ के विषय में संवाद किया गया। सिर्फ केरल राज्य का ही उदाहरण लें तो यहां 55 हजार से ज्यादा मुस्लिम घरों में तथा 54 हजार से ज्यादा ईसाई परिवारों से सम्पर्क किया गया और इन सभी परिवारों ने स्वयंसेवकों का स्वागत किया। अशोक पांडे ने बताया कि कार्यकर्ता समाज परिवर्तन का काम कर रहे हैं। स्वयंसेवकों द्वारा 78 बाल गोकुलम, 9 अध्ययन केंद्र और 13 मासिक कुटुम्ब मिलन भी चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा ग्वालियर में नशा मुक्ति ओर सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति के प्रयास किए जा रहे हैं। लहार जिले के सीगपुरा अण्डल में व्यसन मुक्ति का अभियान चलाया गया। प्रत्येक गांव में ग्राम सभा आयोजित की गई। अब तक 80 लोग नशा छोड़ चुके हैं। मदनपुरा गांव शराब शराब मुक्त हो गया है। शिवपुरी नगर की कैशव शाखा के स्वयंसेवकों द्वारा प्लास्टिक (डिस्पोजल) मुक्त शाखा क्षेत्र अभियान एक वर्ष पूर्व प्रारंभ किया गया, जिसके सुखद परिणाम दिखाई दे रहे हैं। सीहोर जिले के जावर खंड की माधव शाखा ने गोवंश के लिए रात्रि विश्राम गृह बनाया है।
