आधुनिक तकनीक की मदद से प्रशिक्षित होंगे आरक्षक

  • पुलिस प्रशिक्षण में किया जा रहा बड़ा बदलाव

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मप्र पुलिस आरक्षकों के प्रशिक्षण को अधिक आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत आने वाले कांस्टेबल बैच-2025 की ट्रेनिंग में कई नई तकनीकों को शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस प्रस्ताव में वर्चुअल फायरिंग सिम्युलेटर, डिजिटल सैंड मॉडल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित प्रशिक्षण प्रणाली को शामिल करने की योजना है। प्रस्ताव को मंजूरी के लिए पुलिस मुख्यालय से भेज दिया गया है। पुलिस मुख्यालय की प्रशिक्षण शाखा ने आरक्षक प्रशिक्षण में बड़े बदलाव का खाका तैयार किया है। यदि प्रस्ताव को स्वीकृति मिल जाती है तो नए बैच के आरक्षकों को पारंपरिक प्रशिक्षण के साथ-साथ आधुनिक तकनीक की मदद से भी प्रशिक्षित किया जाएगा। इसका उद्देश्य पुलिसकर्मियों को बदलते अपराध और आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक दक्ष बनाना है।
फिलहाल पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों में आरक्षकों को फायरिंग ग्राउंड या फायरिंग रेंज में ही हथियार चलाने का अभ्यास कराया जाता है। कई बार यह अभ्यास वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं हो पाता। प्रस्ताव के तहत वर्चुअल फायरिंग सिम्युलेटर लगाए जाने की योजना है। इस तकनीक की मदद से प्रशिक्षणार्थी जवानों को जंगल, भीड़भाड़ वाले इलाके, संवेदनशील क्षेत्र और आपात स्थितियों जैसी परिस्थितियों में फायरिंग का अभ्यास कराया जा सकेगा। इससे उन्हें यह भी समझाया जाएगा कि हथियार का उपयोग कब और किस परिस्थिति में किया जाना चाहिए। प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में जो चार नए विषय जोडऩे या बदलने की तैयारी है, उसमें मौजूदा कंप्यूटर अवेयरनेस और साइबर सिक्युरिटी कोर्स में एआई को शामिल करना, आउटडोर ट्रेनिंग में एआई का इस्तेमाल, वर्चुअल फायरिंग सिम्युलेटर और डिजिटल सैंड मॉडल शामिल हैं।
ड्रिल-आउटडोर प्रशिक्षण में एआई का उपयोग
दरअसल, पुलिस को आज के समय की चुनौतियों को समझने और उनसे निपटने की दृष्टि से तैयार किया जा रहा है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण नवीनतम तकनीकें हैं। इस दृष्टि अभी प्रशिक्षण ले रहे वर्ष 2023 के बैच में भी साइबर अपराध सहित कई विषय जोड़े थे। अब हर क्षेत्र में एआई के बढ़ते उपयोग की दृष्टि से इसे प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में प्रमुखता से शामिल किया जा रहा है। इसकी बड़ी वजह यह भी है कि अपराधी भी अपराधों में एआई का उपयोग कर रहे हैं। नए प्रस्ताव के अनुसार ड्रिल और आउटडोर प्रशिक्षण में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया जाएगा। एआई तकनीक के माध्यम से प्रशिक्षण के दौरान जवानों की गतिविधियों की निगरानी की जा सकेगी। इससे प्रशिक्षकों को यह पता चल सकेगा कि जवानों की कौन-सी गलती बार-बार हो रही है और उसे कैसे सुधारा जाए। एआई आधारित सिस्टम जवानों की ड्रिल, मूवमेंट और प्रतिक्रिया का विश्लेषण कर सुधार के सुझाव भी देगा। इससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है।
डिजिटल सैंड मॉडल से समझेंगे ऑपरेशन की रणनीति
प्रस्ताव में डिजिटल सैंड मॉडल को भी शामिल किया गया है। यह एक आधुनिक डिजिटल सिस्टम है, जिसकी मदद से किसी इलाके के भूगोल, रास्तों और संभावित परिस्थितियों का त्रि-आयामी (3-डी) मॉडल तैयार किया जा सकता है। इस तकनीक के जरिए पुलिस जवानों को यह समझाया जाएगा कि किसी क्षेत्र में ऑपरेशन या घेराबंदी की रणनीति किस तरह बनाई जाती है। डिजिटल सैंड मॉडल का उपयोग अभी मुख्य रूप से सेना और सुरक्षा एजेंसियों में किया जाता है। अभ्यास (ड्रिल) में हिस्सा लेने वाला प्रशिक्षु अपनी गलतियां खुद नहीं देख पाता। ड्रिल मास्टर ही उसे गलतियां बताता और सुधरवाता है। अभ्यास और आउटडोर ट्रेनिंग में एआई का उपयोग शुरू होने के बाद प्रशिक्षु अपना अभ्यास खुद देख पाएंगे। जैसे एआई उन्हें सही मुद्रा (पोस्चर) के बारे में बताएगा।
कंप्यूटर और साइबर जागरूकता भी होगी शामिल
आरक्षक प्रशिक्षण में कंप्यूटर और साइबर अपराध से जुड़ी बुनियादी जानकारी को भी शामिल किया जाएगा। इसके तहत जवानों को डिजिटल निगरानी, साइबर अपराध की पहचान और तकनीकी साक्ष्य जुटाने से संबंधित प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ऐसे में केवल पारंपरिक प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं है। आधुनिक तकनीकों को शामिल करने से पुलिस बल को अधिक सक्षम और पेशेवर बनाने में मदद मिलेगी। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो आने वाले समय में मध्य प्रदेश पुलिस का प्रशिक्षण मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। प्रदेश के सभी सात पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों (पीटीएस) में दिए जा रहे प्रशिक्षण में कंप्यूटर अवेयरनेस और साइबर सिक्युरिटी शामिल है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षुओं को साइबर धोखाधड़ी के मामलों से निपटने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। अब इसमें एआई को शामिल किए जाने के बाद पुलिस आरक्षक व अन्य संवर्ग के प्रशिक्षु सर्विलांस सिस्टम (निगरानी व्यवस्था) और फेशियल रिकग्निशन तकनीक में दक्ष हो सकेंगे। फेशियल रिकग्निशन पुलिसिंग टूल्स वीडियो, इमेज और आडियो एनालिसिस के माध्यम से संदिग्धों की पहचान करने में मदद कर सकते हैं।  एडीजी प्रशिक्षण राजाबाबू सिंह का कहना है कि प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में परिवर्तन और एआई जैसे नए विषयों को जोडऩे के लिए प्रस्ताव पुलिस महानिदेशक को भेजा गया है। पुलिस को नई चुनौतियों के लिए तैयार करने में इनसे बड़ी मदद मिलेगी।

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