
- सोलर प्लांट लगाने के आवेदन देने वाले किसानों को झटका
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
एक तरफ सरकार किसानों को सिंचाई के लिए सोलर प्लांट लगाने के लिए प्रेरित कर रही है, वहीं दूसरी तरफ ऊर्जा विकास निगम के एमडी ने किसानों की मंशा पर पानी फेर दिया है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री कुसुम योजना किसानों को सोलर पंप लगाने और सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता (60 प्रतिशत तक सब्सिडी) प्रदान करती है। इसका उद्देश्य कृषि में डीजल पंपों को कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें 2026 तक अतिरिक्त बिजली बेचकर आत्मनिर्भर बनाना है। जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री कुसुम योजना-ए के तहत प्रदेश के 1300 किसानों ने सोलर प्लांट लगवाने के लिए आवेदन किया था।
प्रधानमंत्री कुसुम योजना को सरकार की तरफ से मार्च 2019 में शुरू किया गया था। इस योजना का लक्ष्य किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराना और सोलर प्लांट में मदद करना था। पीएम कुसुम योजना के तहत अंतर्गत रजिस्टर्ड किसानों को सोलर पंप पर सरकार की तरफ से अच्छी खासी सब्सिडी भी उपलब्ध कराई जाती है। इस योजना में सोलर पंप के लिए 60 प्रतिशत तक की सब्सिडी ऑफर करती है। सरकार इससे अलग किसानों को इस योजना में 30 प्रतिशत तक का लोन भी उपलब्ध कराती है। मतलब किसानों को सिर्फ 10 प्रतिशत तक ही पैसा लगाना पड़ता है। पीएम कुसुम योजना किसानों को ट्रेडिशनल तरीकों के बजाय आधुनिक तकनीक से जोड़ती है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना-ए के तहत प्रदेश के जिन किसानों ने सोलर प्लांट लगाने के आवेदन किए थे, उन्हें सरकार से निराशा हाथ लगी है। ऐसा इसलिए क्योंकि ऊर्जा विकास निगम के एमडी अमनबीर सिंह बैंस ने सोलर प्लांट की अनुमति के लिए प्रतीक्षा वाले आवेदनों को सोमवार निरस्त करने संबंधी सूचना जारी कर दी है। इसकी वजह से प्रदेश के 1300 किसानों को झटका लगा है।
दो मंत्रियों के प्रयास पर भी फिरा पानी
1300 किसानों के आवेदन ऐसी स्थिति में निरस्त किए गए जब नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने 6 महीने पहले मप्र का कोटा बढ़वाने केंद्र को पत्र लिखा तो ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने 27 फरवरी को विशेष सेल गठित कर किसानों की सुनवाई करने के निर्देश अधिकारियों को दिए थे। इसके लिए बकायदा विशेष सेल बनाने को कहा था। दो मंत्रियों के प्रयास करने के बावजूद एमडी ने किसानों के आवेदन निरस्त करने संबंधी सार्वजनिक सूचना जारी की। असल में उक्त योजना के तहत किसानों को 2 से 3 मेगावॉट क्षमता के सोलर प्लांट लगाने के लिए सरकार द्वारा मदद की जानी थी।
एमडी ने नहीं दिखाई रुचि
जानकारी के अनुसार किसान लगातार योजना को बढ़ाने की मांग करते रहे। किसानों के मुताबिक केंद्र के अधिकारी भी इसके लिए तैयार थे और पूर्व में हुई वर्चुअल बैठकों में सहयोग की बात भी कही। राजस्थान में योजना को उतना प्रतिसाद नहीं मिला है, वहां के कोटे को मप्र में ट्रांसफर कराया जा सकता था। किसान निरंजन सिंह व मनमोहन सिंह समेत अन्य का कहना है कि ऊर्जा निगम के एमडी अमनबीर सिंह बैंस ने रुचि ही नहीं दिखाई, केंद्र से ठोस पत्राचार भी नहीं किए, इसलिए कोटा नहीं बढ़ा।
