15 मार्च तक मांगी रोड नेटवर्क मास्टर प्लान की डीपीआर

  • चीफ इंजीनियर को साइट विजिट करना होगा

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्यप्रदेश में सडक़ों के विकास के लिए अब रोड नेटवर्क मास्टर प्लान को अमल में लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने मास्टर प्लान में चिन्हित सडक़ों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) 15 मार्च तक तैयार कर भेजने के निर्देश दिए हैं। विभाग के प्रमुख अभियंता ने सभी संभागों के मुख्य अभियंताओं को पत्र जारी कर कहा है कि डीपीआर भेजने से पहले संबंधित सडक़ों का अनिवार्य रूप से स्थल निरीक्षण किया जाए और इसकी एंट्री भी दर्ज की जाए। दरअसल, हाल ही में विधानसभा के बजट सत्र के दौरान लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने प्रदेश में सडक़ों के लिए रोड नेटवर्क मास्टर प्लान तैयार करने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि प्रदेश में सडक़ निर्माण और उन्नयन को सुव्यवस्थित करने के लिए मास्टर प्लान के आधार पर ही काम किया जाएगा, ताकि भविष्य की जरूरतों के अनुरूप सडक़ नेटवर्क विकसित किया जा सके। इस मुद्दे को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में भी सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि प्रदेश में कई जगह बिना समग्र मास्टर प्लान के ही सडक़ निर्माण और उन्नयन कार्य किए जा रहे हैं, जिससे योजनाबद्ध विकास प्रभावित हो रहा है। इसके बाद सरकार और विभाग ने रोड नेटवर्क मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया तेज की है। विभाग के अनुसार डीपीआर भारत सरकार, केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और इंडियन रोड कांग्रेस की गाइडलाइन के अनुसार तैयार की जाएगी। मास्टर प्लान में चिन्हित सडक़ों के उन्नयन, मजबूतीकरण और निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि प्रदेश में सडक़ कनेक्टिविटी बेहतर हो सके। निदेर्शों के अनुसार उन सडक़ों को भी प्रस्ताव में शामिल किया जा सकेगा जो अभी परफॉर्मेंस गारंटी अवधि में हैं, लेकिन जिनका उन्नयन या मजबूतीकरण जरूरी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी प्रस्ताव तकनीकी मानकों के अनुरूप तैयार किए जाएं और भविष्य की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किए जाएं।
ग्रीन और आधुनिक तकनीकों पर जोर
विभाग ने डीपीआर में पर्यावरण अनुकूल और आधुनिक तकनीकों को अपनाने के निर्देश दिए हैं। इसमें प्लास्टिक मिश्रित बिटुमिनस निर्माण और फुल डेप्थ रिक्लेमेशन जैसी तकनीकों को प्राथमिकता देने को कहा गया है। इन तकनीकों से सडक़ों की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ निर्माण लागत भी कम हो सकती है। हर प्रस्ताव के साथ आवश्यक तकनीकी दस्तावेज भी देना अनिवार्य होगा। प्रमुख अभियंता ने निर्देश दिए हैं कि हर डीपीआर भेजने से पहले संबंधित मुख्य अभियंता स्वयं स्थल निरीक्षण करेंगे। वे प्रमाणित करेंगे कि प्रस्ताव निर्धारित मानकों के अनुरूप है और सडक़ के एलाइनमेंट का परीक्षण पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर किया जा चुका है। साथ ही सडक़ की वास्तविक आवश्यकता और अनुमानित लागत का भी परीक्षण किया जाएगा। इसके साथ ही लोक निर्माण विभाग ने सडक़ मजबूतीकरण श्रेणी में शामिल कार्यों की साप्ताहिक समीक्षा करने का निर्णय लिया है। इन कार्यों को 30 अप्रैल तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए हर सोमवार को समीक्षा बैठक की जाएगी।
डीपीआर में इन तकनीकी बिंदुओं का रखना होगा ध्यान
लोक निर्माण विभाग ने डीपीआर तैयार करते समय कई तकनीकी पहलुओं को अनिवार्य किया है। इसके तहत सडक़ के एलाइनमेंट का परीक्षण पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर करना जरूरी होगा। साथ ही होरीजेंटल और वर्टीकल वक्र का डिजाइन इंडियन नेशनल कांग्रेस के मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इसके अलावा यातायात सर्वेक्षण, ट्रैफिक प्रोजेक्शन और सडक़ की डिजाइन लाइफ का वैज्ञानिक विश्लेषण भी रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा। सडक़ सुरक्षा के लिए साइनेज, रोड मार्किंग और अन्य सुरक्षा प्रावधानों को भी अनिवार्य रूप से शामिल करना होगा।

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