- राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में

गौरव चौहान
मप्र में अब सत्ता, संगठन और संघ चुनावी रणनीति में जुटेंगे। आगे आने वाले नगरीय निकाय और विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक जमावट की जाएगी। इसके लिए निगम-मंडल, बोर्ड और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सूत्रों का कहना है कि सत्ता और संगठन ने मिलकर राजनीतिक नियुक्तियों का खाका तैयार कर लिया है। संभावना जताई जा रही है कि होली के बाद निगम-मंडल, बोर्ड और प्राधिकरणों में अध्यक्ष-उपाध्यक्षों की सूची जारी कर दी जाएगी। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व से नियुक्तियों को लेकर पहले ही हरी झंडी मिल चुकी है। पिछले कुछ महीनों में प्रदेश सरकार और भाजपा संगठन के बीच इस विषय पर कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। बताया जा रहा है कि संभावित नामों पर दिल्ली स्तर पर भी चर्चा हुई है और संघ के साथ भी कुछ नामों को लेकर विचार-विमर्श किया गया है। इसके बाद अब नियुक्तियों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
मप्र में लंबे समय से खाली पड़े निगम-मंडल, बोर्ड और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। भाजपा संगठन और सरकार ने मिलकर संभावित नामों की सूची तैयार कर ली है और होली के बाद पहली सूची जारी होने की संभावना जताई जा रही है। इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी संगठन को मजबूत करने और वरिष्ठ नेताओं के साथ सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पद संभालने के बाद प्रदेश के सभी संभागों का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों से मुलाकात कर संगठन को मजबूत बनाने पर जोर दिया था। साथ ही उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया था कि पार्टी में सक्रिय रहने वाले किसी भी कार्यकर्ता की उपेक्षा नहीं होने दी जाएगी। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए संगठन विस्तार और राजनीतिक संतुलन बनाने की दिशा में यह कदम अहम माना जा रहा है।
वरिष्ठ और सक्रिय नेताओं की होगी ताजपोशी
दरअसल फरवरी 2024 में प्रदेश की नवगठित सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में की गई कई राजनीतिक नियुक्तियों को निरस्त कर दिया था। इसके तहत विभिन्न निगम-मंडलों, बोर्ड और आयोगों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा अन्य पदों पर की गई नियुक्तियां समाप्त कर दी गई थीं। इसके बाद से ही इन संस्थाओं के अधिकांश पद खाली पड़े हुए हैं और नई नियुक्तियों का इंतजार किया जा रहा है। दरअसल हाल ही में भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी और अधिकांश जिलों की जिला कार्यकारिणी की घोषणा की जा चुकी है। इन सूचियों में जगह नहीं पाने वाले कई वरिष्ठ नेता और सक्रिय कार्यकर्ता पार्टी नेतृत्व से नाराज भी बताए जा रहे हैं। ऐसे नेताओं और पदाधिकारियों को निगम-मंडल, बोर्ड और प्राधिकरणों में जिम्मेदारी देकर संतुलन साधने की योजना बनाई गई है। सूत्रों के अनुसार कई प्रमुख निगम-मंडलों और प्राधिकरणों के लिए नाम लगभग तय कर लिए गए थे, लेकिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के कारण इन नियुक्तियों को फिलहाल रोक दिया गया था। अब चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक बार फिर यह मामला तेजी से आगे बढ़ रहा है।
जल्द ही पहली सूची जारी होने की संभावना
बताया जा रहा है कि हालही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर इस विषय पर चर्चा की है। इस दौरान नियुक्तियों को लेकर अतिम रणनीति पर भी विचार हुआ। इसके बाद अब जल्द ही पहली सूची जारी किए जाने की संभावना जताई जा रही है। सरकार अब सबसे पहले उन आयोगों में नियुक्तियां करने की तैयारी कर रही है, जो लंबे समय से खाली है और जिनका सीधा संबंध आम लोगों की शिकायतों और अधिकारों से जुड़ा हुआ है। इनमें मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग, राज्य महिला आयोग, अनुसूचित जाति आयोग, अनुसूचित जनजाति आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, राज्य सूचना आयोग, राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, राज्य नीति आयोग और मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग जैसे प्रमुख आयोग शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न निगम मंडलों, विकास प्राधिकरणों और बोर्डों में भी नियुक्तियां की जानी हैं। इनमें अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों को आमतौर पर मंत्री का दर्जा दिया जाता है। इसलिए पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और पूर्व जनप्रतिनिधि भी इन पदों के लिए दावेदारी जता रहे हैं। भाजपा का मानना है कि इन नियुक्तियों के जरिए जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं को सम्मान और जिम्मेदारी देकर संगठन को और मजबूत किया जा सकेगा।
