आस्था पर राजनीति नहीं होनी चाहिए: सीएम स्टालिन

सीएम स्टालिन

चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने तिरुप्परनकुंद्रम मंदिर के दीप जलाने वाले विवाद पर अपनी सरकार का रुख मजबूती से बचाव किया। उन्होंने साफ कहा कि व्यक्तिगत आस्था को राजनीति के आगे नहीं झुकना चाहिए। उनका काम परंपरा की रक्षा करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में तिरुप्परनकुंद्रम के अरुलमिगु सुब्रमण्या स्वामी मंदिर का दौरा किया था। इसके बाद उन्होंने मदुरै में एक रैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने दीपक जलाने के मुद्दे पर द्रमुक सरकार को लोगों की भावनाओं के प्रति असंवेदनशील बताया था। उन्होंने कहा था कि अंत में भक्तों की ही जीत होगी।

पीएम मोदी के दौरे के बाद सीएम स्टालिन ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी सरकार का बचाव किया। स्टालिन ने कहा कि उन्होंने एक धार्मिक नेता के तौर पर नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री के रूप में मंदिर की परंपरा को बचाने का विकल्प चुना। उन्होंने कहा, “मेरा दृढ़ विश्वास है कि व्यक्तिगत आस्था को राजनीति के आगे नहीं झुकना चाहिए।” स्टालिन ने कहा कि तर्क और आस्था को एक-दूसरे के साथ टकराव में रहने की जरूरत नहीं है, दोनों एक ही समाज के दो चेहरे हैं। उन्होंने तर्कवादी नेता ‘पेरियार’ रामासामी और आदिगलार के बीच की दोस्ती को इसका सबूत बताया। स्टालिन का इशारा संभवतः कुंड्राकुडी पोन्नम्बाला आदिगलार की ओर था, जिन्होंने हाल ही में द्रमुक सरकार की प्रशंसा की थी।

यह पूरा विवाद तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर एक दरगाह के पास पत्थर के स्तंभ (दीपथून) पर दीपक जलाने से जुड़ा है। मद्रास हाई कोर्ट ने हिंदुओं को कार्तिगई दीपम त्योहार पर दीपक जलाने की अनुमति दी थी। लेकिन, स्थानीय अधिकारियों ने यह कहते हुए इसकी इजाजत नहीं दी कि इससे दो धर्मों के लोगों के बीच संघर्ष हो सकता है। द्रमुक अध्यक्ष स्टालिन ने अपने संदेश में कहा, “हमारी मान्यताएं अलग हो सकती हैं, लेकिन हम एक ही भूमि पर रहते हैं, एक ही भाषा बोलते हैं और एक ही भविष्य की ओर चलते हैं। यही द्रविड़ आंदोलन की धड़कन है।” उन्होंने कहा कि राजनीति में उनका लक्ष्य सभी को एकजुट करना है।

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