
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। विधानसभा में सोमवार को प्रश्नकाल में पहले ही प्रश्न पर जमकर बहस हुई। कांग्रेस सदस्य ने जो प्रश्न लगाया था, सदन में उसकी बात तक नहीं की। मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि प्रश्न दूसरा लगाया गया है और पूछा कुछ जा रहा है, ऐसे में यह उद्भत ही नहीं होता। जवाब देने का इसका कोई औचित्य नहीं है। सदन में कांग्रेस सदस्य दिनेश चंद्र बोस ने उज्जैन जिले में महिदपुर के छात्रावास में क्या क्या सामग्री कब-कब कितनी कितनी कीमत में खरीदी गई। इससे संबंधित सवाल किया था, किंतु जब सदन में इस पर चर्चा होने लगी तो इसके बजाय उन्होंने यह पूछना शुरू किया की इस छात्रावास में 30 बच्चियां बीमार हो गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया कुछ बच्चियों को उज्जैन रेफर किया गया। इस पर मंत्री जवाब दें। मंत्री नगर सिंह चौहान ने कहा कि जो प्रश्न पूछा गया है उसी का उत्तर देना उचित होगा। इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी छात्रावास में बच्चों के बीमार होने का मुद्दा उठाया था। उस दौरान तक सदस्य जैन सदन में नहीं पहुंचे थे। बाद में सवाल जवाब को लेकर भी यही हुआ। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि शायद नेता प्रतिपक्ष को गलतफहमी हो गई है। यह प्रश्न दूसरा है। सामग्री को लेकर है, आप पहले प्रश्न पढ़ लीजिए। इस मुद्दे पर काफी देर तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस होती रही। कांग्रेस सदस्य ने छात्रावास में सामग्री की खरीदी, उसका वितरण, संबंधित एजेंसी के नाम भुगतान आदि के बारे में चर्चा तक नहीं। इसे लेकर के कई तरह के सवाल खड़े हुए। ताज्जुब की बात यह की पूरा विपक्ष प्रश्न में पूछे गए मुद्दों के बजाय अलग ही तरह के प्रश्न में सभी को उलझाए रहा।
अनुपूरक बजट कहीं वित्त विभाग की गलती तो नहीं
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने तृतीय अनुपूरक बजट को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मुख्य बजट के बाद सरकार यदि अनुपूरक बजट लाती है, तो यह कहीं न कहीं वित्त विभाग की गंभीर गलती है। यह अधिकारियों और मंत्रियों की गलती है। समीक्षा नहीं होती कि हमें एक कितना खर्च करना है। नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने सोमवार को तृतीय अनुपूरक बजट की मांगों पर चर्चा में कहा कि मुख्य बजट 4 लाख 21 हजार करोड़ रुपए का था। प्रथम अनुपूरक 2356 करोड़ रुपए का था। द्वितीय अनुपूरक 13.476 करोड़ रुपए और तृतीय अनुपूरक 19.287 करोड़ है। मतलब पहले और दूसरे अनुपूरक बजट में भी सरकार आकलन नहीं कर पाया कि हमें कितना खर्च करना है।
