एपस्टीन फाइल्स में फ्रांस के दिग्गज फुटबॉलर फ्रैंक रिबेरी का नाम

एपस्टीन फाइल्स

नई दिल्ली। फ्रांस और बायर्न म्यूनिख के दिग्गज फुटबॉलर फ्रैंक रिबेरी एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह मैदान की उपलब्धियां नहीं, बल्कि अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा सार्वजनिक किए गए तथाकथित एपस्टीन फाइल्स हैं। रिबेरी 2006 में फीफा विश्वकप के फाइनल में पहुंचने वाली फ्रांस टीम का हिस्सा रहे थे, लेकिन इटली के खिलाफ उनकी टीम हार गई थी। वहीं, वह एक बार फीफा क्लब वर्ल्ड कप और एक बार बायर्न म्यूनिख के साथ चैंपियंस लीग का खिताब जीत चुके हैं। स्पेनिश अखबार मार्का की रिपोर्ट के मुताबिक, रिटायर्ड स्टार का नाम उन दस्तावेजों में दिखाई देता है जो दिवंगत और दोषी करार दिए जा चुके कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी जांच का हिस्सा थे।

सबसे पहले सबसे अहम बात। इन फाइल्स में नाम आने का मतलब यह नहीं है कि रिबेरी पर कोई अपराध साबित हुआ है, उनके खिलाफ मामला दर्ज है या वह किसी जांच के दायरे में हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह सामग्री बड़े पैमाने पर इकट्ठी की गई गवाहियों, नोट्स और बयानों का संग्रह है, जिनमें से कई कभी अदालत तक पहुंचे ही नहीं। 2026 की शुरुआत में अमेरिका में एपस्टीन फाइल्स ट्रांसप के तहत हजारों दस्तावेज सार्वजनिक किए गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें हजारों वीडियो, लाखों तस्वीरें और जांच से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं। इसी बड़े डेटा के बीच कुछ पन्नों पर रिबेरी का नाम सामने आता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जिन हिस्सों में रिबेरी का जिक्र है, वे एक गवाह के दावे हैं। उदाहरण के तौर पर एक जगह लिखा है, ‘फ्रैंक रिबेरी ने मुझे मारने की कोशिश की… पुलिसकर्मियों ने उन्हें घेर लिया और उनकी कार तक वापस ले गए।’ एक अन्य हिस्से में दावा किया गया, ‘मैं यह देखकर हैरान था कि देह व्यापार का नेटवर्क यहां पहुंच गया… मुझे लगा जैसे वे मुझे वापस ले जाना चाहते हैं।’ आगे के पन्नों में भी कुछ और गंभीर आरोपों का जिक्र है, लेकिन फिर से साफ कर दें कि ये आरोप हैं, अदालत का फैसला नहीं। अमेरिकी न्याय विभाग ने कहीं भी इन दस्तावेजों को औपचारिक आरोप या सबूत नहीं बताया है। रिबेरी के खिलाफ किसी कार्रवाई की घोषणा भी नहीं हुई है। यानी कानूनी स्थिति फिलहाल वही है, न केस, न चार्ज।

रिबेरी का नाम पहले भी 2010 में एक मामले में सामने आया था, जब उन पर और करीम बेंजेमा पर नाबालिग से जुड़े आरोप लगे थे। 2014 में अदालत ने दोनों को यह कहते हुए राहत दी थी कि इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि उन्हें उम्र की जानकारी थी। अब नए दस्तावेज सामने आने से सोशल मीडिया पर बहस जरूर तेज हो गई है, लेकिन कानून की नजर में स्थिति अभी नहीं बदली है। यह कहना फिलहाल मुश्किल है कि इन खुलासों के बाद कोई नई जांच शुरू होगी या नहीं। अक्सर ऐसे दस्तावेज चर्चा तो पैदा करते हैं, लेकिन हर बार कानूनी कार्रवाई तक बात पहुंचे, यह जरूरी नहीं।

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