आरिफ मिर्जा क्या कहें कितने मरासिम थे हमारे उस सेवो जो इक शख्स है मुंह फेर के जाने वालातुम तकल्लुफ़ को भी इख़्लास समझते हो ‘फऱाज़’दोस्त होता नहीं हर हाथ…