लोकतंत्र

संवाद से सहमति और सहमति से समाधान की दिशा में सतत सक्रिय एवं सचेष्ट रहना ही लोकतंत्र की मूल भावना है

मयंक विश्नोई गुरु पर्व पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से माफी मांगते हुए कृषि कानूनों को वापस ले लिया था। इसकी वजह थी कि किसान आंदोलन से…

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हम लोकतंत्र के लायक कभी रहे ही नहीं

वीरेंद्र नानावटी लोकतंत्र:सवाल-दर-सवाल/भाग 3आजादी के पहले सुभाषचन्द्र बोस देश की नब्ज अच्छे से जानते थे कि हजारों सालों की गुलामी की गर्त और राजे-रजवाड़ों की रिवायतों को झेलता हिन्दुस्तान अभी…

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माल-मलाई परोसने का लोकतंत्र

वीरेंद्र नानावटी लोकतंत्र:सवाल-दर-सवाल/भाग 2 क्या लोकतंत्र मर रहा है और चुनावों ने उसे जिंदा कर रखा है ये विडंबना ही है कि भारतीय लोकतंत्र विगत सालों से वैचारिक प्रतिबद्धता से…

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