वीरेंद्र नानावटी मुझे मेरे एक लंगोटिया यार ने नसीहत दी… बरखुरदार ! तुम नाहक योग्यता के सुर अलापे बैठे हो! कलजुग के इस चापलूसी चलन में योग्यता भी कोई गुण…