बुजुर्गों

परिवार के संगठन को बुजुर्गों के अनुरूप बनाना होगा

प्रवीण कक्कड़ अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोंसेविन: ! चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम!! अर्थात जो बुजुर्ग वृद्धजनों विनम्र और नित्य अनुभवी लोगों की सेवा करते हैं उनकी चार चीजें हमेशा बढ़ती रहती…

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