रत्नाकर त्रिपाठी मैं उस समय तथा सोच के अंत में विस्मयादिबोधक चिन्ह बन गया हूं, जिस वक्त में और खयाल से कहा गया कि ‘मुगले-आजम’ बॉलीवुड की महानतम फिल्मों…