नवीन

अंबर से सूर्य बिछड़ता है, क्या कभी बिन बाती दीपक जलता है

मोहम्मद जावेद खान तू ही तो हमारा किनारा था, तू ही तो हमारा सहारा था।। तू ही तोआंखों का तारा था,नवीन तू ही तो अपने परिवार का किनारा था, तू ही तो…

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