
बर्लिन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच जर्मनी में 2026 फुटबॉल वर्ल्ड कप के संभावित बहिष्कार (बॉयकॉट) की चर्चा तेज हो गई है। जर्मन फुटबॉल महासंघ (DFB) की कार्यकारी समिति के सदस्य और बुंडेसलिगा क्लब स्ट. पाउली के अध्यक्ष ओके गेटलिष ने कहा कि अब इस मुद्दे पर गंभीर बहस की आवश्यकता है। गेटलिष ने जर्मन अखबार ‘हैम्बर्गर मोर्गेनपोस्ट’ को इंटरव्यू में कहा, ‘अब समय आ गया है कि हम इस पर गंभीरता से विचार और चर्चा करें।’ उनका कहना है कि ट्रंप की हालिया कार्रवाइयों ने यूरोप में अस्थिरता बढ़ाई है। उन्होंने ग्रीनलैंड पर कब्जे का प्रस्ताव रखा और विरोध करने वाले यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी, जिससे NATO पर भी असर की आशंका बढ़ी। गेटलिष ने 1980 के ओलंपिक बॉयकॉट का जिक्र करते हुए पूछा, ‘उस समय कारण क्या थे? मेरे हिसाब से आज खतरा उनसे ज्यादा है।’ उन्होंने कहा कि जब दुनिया राजनीतिक तनाव झेल रही हो, तो खेलों पर बातचीत जरूरी है। 2026 वर्ल्ड कप की मेजबानी अमेरिका कनाडा और मैक्सिको के साथ कर रहा है, जबकि टिकटों के दाम और ट्रैवल बैन से फैंस पहले ही परेशान हैं।
हालांकि, गेटलिष को पता है कि उनके विचार पर जर्मन महासंघ अध्यक्ष बेर्न्ड नॉयएंडॉर्फ और FIFA प्रमुख जियानी इनफेंटिनो की मंजूरी मिलना मुश्किल है। कतर विश्व कप की राजनीति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, ‘कतर सभी के लिए बहुत राजनीतिक था और अब हम पूरी तरह अपॉलिटिकल हो गए? यह मुझे परेशान करता है।’ स्ट. पाउली क्लब पहले से खेल और राजनीति को जोड़ने के लिए जाना जाता है। गेटलिष ने यह भी कहा कि संभावित बहिष्कार से ऑस्ट्रेलिया और जापान के उनके क्लब खिलाड़ियों पर असर पड़ेगा, लेकिन उन्होंने इसे महत्वहीन बताया। उन्होंने कहा, ‘पेशेवर खिलाड़ी की जिंदगी उन अनगिनत लोगों से ज्यादा मूल्यवान नहीं हो सकती जो सीधे या परोक्ष रूप से हमलों और धमकियों का सामना कर रहे हैं।’
