निजी आयोजन पर क्यों… मेहरबान हैं सरकारी महकमे

सरकारी महकमे
  • 44 जगह से जुटाया गया भारी भरकम फंड, सरकारी खर्च से हो रहा आयोजन

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। भोपाल में शुक्रवार से आरम्भ हुए लिटरेचर फेस्टिवल की फंडिंग पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सेवानिवृत्त आईएएस राघव चंद्रा की संस्था के बैनर तले आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम में मप्र सरकार का संस्कृति विभाग पूरी ताकत से जुटा है लेकिन सरकार के मुखिया डॉ. मोहन यादव का कहीं जिक्र तक नहीं हो रहा है। मप्र टूरिज्म बोर्ड की वेबसाइट पर बोर्ड के इवेंट के रूप में बीएलएफ का आयोजन दिखाया जा रहा है, लेकिन पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी या सरकार के किसी चेहरे को अधिकारियों ने बीएलएफ के मंच में जगह देना उचित नहीं समझा है।
निरस्त हुआ बाबर पर विमर्श
इस विवादित आयोजन में शनिवार को होने वाला बाबर केंद्रित विमर्श निरस्त कर दिया गया है। स्वदेश ने शुक्रवार के अंक में इसे लेकर समाचार प्रकाशित किया था। हिन्दू रक्षक संघ एवं कुछ अन्य संगठनों ने भी आज शनिवार को भारत भवन पहुँचकर प्रदर्शन की अनुमति श्यामला हिल्स थाने से मांगी थी। इस बीच प्रदेश के साहित्यकारों, लेखकों ने भी मामले में हस्तक्षेप का आग्रह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से किया था। बताया जाता है कि आयोजकों ने बाबर केंद्रित सत्र को निरस्त कर दिया है।
कलेक्टरों को मिली श्रोता जुटाने की जिम्मेदारी
यह पहला निजी आयोजन होगा, जिसमें श्रोता जुटाने की जिम्मेदारी प्रदेश के सभी कलेक्टर को सीपी गई। अपर मुख्य सचिव संस्कृति एवं पर्यटन मप्र शिवशेखर शुक्ला ने 12 दिसम्बर को बाकायदा सभी कलेक्टर को पत्र लिखकर इस तीन दिवसीय आयोजन में जिलों से प्रतिभागियों को भेजने के निर्देश जारी किए। इसके लिए धनराशि की व्यवस्था जिला पर्यटन एवं संवर्धन परिषद से की गई। स्वदेश के पास वह पत्र मौजूद है, जिसमें श्री शुक्ला ने पर्यटन के अपर मुख्य सचिव के रूप में युद्धपत्र कलेक्टर्स को भेजा है। श्री शुक्ल ने इस आयोजन को सांस्कृतिक-लोकतंत्रीकरण की संज्ञा देते हुए सहयोग के लिए लिखा है। पत्र में समन्वयक के रूप में बीएलएफ की एक महिला कार्यकर्ता का नाम है। इस पत्र पर कार्यवाही करते हुए जिली से कलेक्टर ने प्रतिभागियों को भोपाल भेजा है लेकिन सरकारी किराए खर्च पर आए इन प्रतिभागियों को आयोजन स्थल पर आज भोजन तक नसीब नहीं हुआ। भोजन के लिए उन्हें वहां लगाए गए स्टाल से पैसे देकर खाना खाने को कहा गया।
भोपाल में राजा भोज की बात क्यों नहीं: मिश्रा
दतोपन्त ठेंगड़ी शोध संस्थान के निदेशक डॉ. मुकेश मिश्रा ने बीएलएफ के आयोजन के औचित्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि भोपाल में इस आयोजन का भोपाल या मप्र की भावनाओं से कोई रिश्ता नहीं है। इस कार्यक्रम का डिजाइन दिल्ली में बैठकर बनाया जाता है और मप्र पर थोप दिया जाता है। आयोजन की विषय वस्तु को लेकर डॉ. मिश्रा ने कहा कि यह केवल मौजूदा सरकार और एस्टबलिशमेन्ट के विरुद्ध विमर्श को खड़ा करता है। आयोजन में सरकारी खर्च पर श्रोताओं को बुलाकर आयोजन के नाम पर जुटाए गए फंड को ठिकाने लगाया जाता है। डॉ. मिश्रा ने कहा कि भोपाल में साहित्य के विमर्श का केंद्र राजा भोज होना चाहिये न कि आक्रांता बाबर। आयोजन को आयातित और थोपा गया बताते हुए उन्होंने कहा कि मप्र हिंदी भाषी राज्य है लेकिन यह आयोजन अंग्रेजी केंद्रित हैं। भोषाल में भोज और रानी कमलापति पर विमर्श नहीं होने के पीछे उन्होंने आयोजकों की मंशा को कटघरे में खड़ा किया।
सरकारी प्रभुत्व पर करोड़ों की फंडिंग
निजी संस्था के इस आयोजन में भले मुख्यमंत्री या विभागीय मंत्रियों को जगह नहीं दी गई हो लेकिन सरकारी रुतबे के बल पर आयोजन के लिए करोड़ों की फंडिंग हो रही है। संस्कृति विभाग द्वारा वर्ष 2019 में करीब 40 – लाख इस आयोजन पर खर्च किए गए। इसके बाद के वर्षों में भी 30-30 लाख की राशि दी जाती रही है। सर्वाधिक धनराशि मप्र पर्यटन बोर्ड के माध्यम से खर्च की जा रही है। कुल 44 अलग-अलग एजेंसियों से इस आयोजन को लेकर फंड जुटाया जाता रहा है, जिनमें साहित्य अकादमी दिल्ली, जनजाति कार्य मंत्रालय, एनटीपीसी, मप्र रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन, एनएचडीसी, गेल, एसबीआई, वन्या प्रकाशन, एनटीपीसी, इंडियन ऑयल, कोल इंडिया, मप्र लघु वनोपज संघ जैसे सरकारी विभागों एवं सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के अलावा प्राइवेट कंपनियों एवं कारपोरेट घरानों से सहायता ली गई है। सवाल यह उठता है कि एक निजी संस्था के आयोजन में सरकार और अन्य इकाइयां किस भूमिका से पार्टनर बनें। तब जबकि सरकार की जगह एक सेवानिवृत्त आईएएस राघव चंद्रा इसके कर्ताधर्ता हैं। बताया जाता है कि बीएलएफ के इस आठवें संस्करण में करोड़ों की धनराशि इन सहयोगियों के जरिए जुटाकर खर्च की जा रही है।
ऐसे आयोजन स्वीकार नहीं
भारत भवन का आयोजन बेहद आपतिजनक था। मैंने अधिकारियों को निर्देश दिए है, इस तरह के आयोजनों के लिए भारत भवन न दिया जाए। इस तरह की पुनरावृत्ति भविष्य में न हो। हमारी संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत के खिलाफ किसी आयोजन को स्वीकार नहीं किया जायेगा। – धर्मेंद्र सिंह लोधी, संस्कृति मंत्री, मप्र शासन
आयोजन मानसिक दिवालियापन है
यह आयोजन अत्यंत निंदनीय और देश प्रदेश के लिए अपमानजनक है। भारत भवन में होने वाले इस आयोजन में बाबर का महिमा मंडन मानसिक दिवालियापन है। इस आयोजन के लिए जिम्मेदार आईआईएस अधिकारी की गर्दन पकडऩा चाहिए, इस मूर्खतापूर्ण आयोजन की इजाजत दी कैसे। बाबर छोटा मोटा लुटेरा था। उस पर चर्चा की जरूरत क्यों। – कुसुमलता केडिया, साहित्यकार, भोपाल

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