- भोजशाला पर संग्राम…

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
धार की भोजशाला में बसंत पंचमी के दिन नमाज से जुड़ा विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मामला चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने रखा गया। बेंच ने 22 जनवरी को सुनवाई की बात कही है। इस साल बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा का पर्व शुक्रवार, 23 जनवरी को है। याचिका में कहा गया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने मुसलमानों को शुक्रवार को भोजशाला परिसर में नमाज पढऩे की इजाजत दे रखी है, लेकिन इस बार सरस्वती पूजा के दिन शुक्रवार है इसलिए, कोर्ट उस दिन वहां नमाज को रोकने के लिए कहे। भोजशाला परिसर में मां वाग्देवी यानी सरस्वती का मंदिर है। इसका निर्माण 11वीं सदी में परमार वंश के राजा ने कराया था। लंबे समय तक यहां हिंदू पूजा-अर्चना करते रहे हैं। 7 अप्रैल 2003 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने एक आदेश जारी किया। उस आदेश में हिंदुओं को हर मंगलवार और बसंत पंचमी पर पूजा की अनुमति दी गई। वहीं मुस्लिमों को हर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज अदा करने की इजाजत मिली। तब से विवाद गरमाया हुआ है। भोजशाला की मुक्ति और उसके गौरव की पुनर्स्थापना असंख्य हिन्दुओं का स्वप्न और संकल्प है, तभी तो भोजशाला मुक्ति यज्ञ में हजारों वर्षों का सतत संघर्ष करते हुए सनातन हिन्दू समाज ने बलिदानों की आहुतियां दी हैं। लेकिन जब-जब वसंत पंचमी के साथ शुक्रवार का संयोग आता है तो न केवल भोजशाला छावनी बनती है। बल्कि संपूर्ण धार नगरी बंधक बन जाती है और पांच-छह मुस्लिमों की जबरिया नमाज की जिद में प्रशासन करोड़ों रुपए का पलीता लगाता है। कानूनी नियम पालन एवं सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से यह अपनी जगह है। लेकिन भोजशाला को लेकर सब कुछ दूध-पानी की तरह साफ है अब मुस्लिमों को प्रशासनिक घेरे तो में हट जबरिया नमाज की जिद से पीछे जाना चाहिए, ताकि भय-भ्रम के बीच सरकार, शहर और आमजन के करोड़ों रुपए का नुकसान रोका जा सके।
स्थापना काल से ही मनाया जा रहा वसंतोत्सव
भोजशाला में वसंतोत्सव स्थापना काल से ही मनाया जा रहा है। वाग्देवी सरस्वती के भोजशाला मंदिर की स्थापना ही वसंत पंचमी को हुई थी। अत: भोजशाला में वसंतोत्सव की सनातनी परंपरा है। लेकिन तुष्टिकरण के सियासी खेल के कारण 2002-03 में भोजशाला को विवादास्पद बनाकर जो जबरिया नमाज का खेल खेला गया। उसी का दुष्परिणाम है कि 2006, 2013, 2016 के बाद अब 2026 में वसंत पंचमी के साथ शुक्रवार के संयोग के चलते चौथी बार भोजशाला को छावनी बनाया गया है। धार में 8-10 हजार सैनिकों की तैनाती की गई है..! करोड़ों रुपए सिर्फ कानून-व्यवस्था व सुरक्षा में खर्च होंगे। आखिर क्या इस आर्थिक नुकसान का उद्देश्य सिर्फ गिनती के लोगों को नमाज पढ़वाने तक सीमित है..? क्योंकि धार को 6 सेक्टरों में बांटकर 36 जिलों का पुलिस बल, 68 टीआई, 10 एसपी और दर्जनों आईपीएस मोर्चा संभाल रहे हैं। धार भोजशाला में शुक्रवार को नमाज अदा करना जिन लोगों (नमाजियों) के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की व्यवस्था का आधिकारिक कर्तव्य निर्वाह है या जो प्रशासन सांकेतिक रूप से भी इसे पालन करने को मजबूर नजर आता है। वे भूल जाते है कि विगत तीन बार से वसंत पंचमी एवं शुक्रवार के संयोग के कारण धार शहर ने भयभीत माहौल के साथ करोड़ों का नुकसान भी उठाया है। पुलिस और प्रशासन 20 फीट ऊंची लोहे की चद्दरें लगाकर लंबा रास्ता बनाता है। लोगों को भोजशाला में प्रवेश से पहले पैदल चलाया जाता है। और पीछे के रास्ते शहर के बाहरी छोर पर निकाला जाता है। आखिर अपने ही आस्था स्थल पर हवन-पूजन के लिए हिन्दुओं को इतनी बंदिशों, नियमों की बेडिय़ों में हर बार क्यों जकड़ा जाता है..? क्या चुनिंदा लोगों को नमाज के नाम पर खुश करने के लिए..?
हर बार करोड़ों रूपए स्वाहा
भोजशाला में 2016 में सिर्फ प्रशासनिक सुरक्षा-व्यवस्था पर ही पौने दो करोड़ रुपए का खर्च आया था। जबकि धार नगर वसंतोत्सव के 10 दिन पहले से बाद तक करीब 15-20 दिनों के लिए व्यापारिक कारोबारी मान से भी आर्थिक नुकसान उठाता है। त्रिमूर्ति से लेकर घोड़ा चौपाटी, धारेश्वर रोड एवं शहर की विभिन्न क्षेत्रों में रेहड़ी-फेहड़ी वाले पूर्णत: प्रतिबंधित हो जाते हैं। स्कूल, कॉलेज बड़े शिक्षण संस्थान, पुलिस बल के आवास एवं अस्थायी जेल बन जाते हैं। अस्पताल, मंडी कारोबार एवं इंदौर समेत अन्य स्थानों से आने-जाने वाले माल की आपूर्ति भी बाधित होती है। वसंतोत्सव पर होने वाले व्यक्तिगत एवं सामूहिक विवाह आयोजन या तो रद्द होते या अन्यत्र स्थानों पर करने पड़ते हैं या फिर आगे बढ़ाने पड़ते हैं। करीब 10 दिनों तक छोटी-बड़ी होटले प्रशासन के अधीन आ जाती है। करोड़ों का यह आर्थिक नुकसान क्या नमाज की औपचारिकता के के लिए नहीं है..? धार भोजशाला में मंगलवार को नियमित सत्याग्रह हुआ। वसंत पंचमी उत्सव के नजदीक होने के कारण इस बार सत्याग्रह में हिंदू समाज का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हवन, पूजन और हनुमान चालीसा के पाठ के साथ ही परिसर जय श्री राम और मां वाग्देवी की जय, वसंत पंचमी पर अखंड पूजन के उद्घोष से भोजशाला परिसर गूंज उठा। सुबह से ही हिंदू समाज के लोग बड़ी संख्या में भोजशाला पहुंचना शुरू हो गए थे। पूजन के पश्चात सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया गया।
