अपनी दूसरी सियासी पीढ़ी… तैयार कर रहे ‘दिग्गज’

  • दिग्गी, नाथ के बाद जल्द दिखेगा शिवराज, सिंधिया और गोपाल के पुत्रों का जलवा
  • गौरव चौहान
सियासी पीढ़ी

मप्र की राजनीति में कई दिग्गज नेता अपनी दूसरी सियासी पीढ़ी को गढ़ रहे हैं। इसके लिए नेताओं ने अपने संसदीय और विधानसभा क्षेत्र में होने वाले सामाजिक, धार्मिक कार्यक्रमों के साथ ही राजनीतिक समागम में सक्रिय किए हुए हैं। वर्तमान में जिन नेताओं के पुत्र सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी सामाजिक पैठ बढ़ाने में जुटे हुए हैं उनमें पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पुत्र महाआर्यमन सिंधिया और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के पुत्र  अभिषेक भार्गव। वैसे तो कई नेताओं के पुत्र राजनीति में जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन दो पूर्व मुख्यमंत्रियों दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन सिंह और कमलनाथ के पुत्र नकुलनाथ के बाद मप्र की राजनीति में जल्द ही शिवराज, सिंधिया और गोपाल भार्गव के पुत्रों का जलवा दिख सकता है।
वैसे तो मप्र भाजपा की राजनीति में नेता पुत्रों के राजनीतिक भविष्य पर तथाकथित तौर पर ताला लगा हुआ है। परिवारवाद पर भाजपा और विशेषकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रोक ने मप्र के उन नेता पुत्रों को मायूस कर दिया है, जो राजनीतिक विरासत पाकर अपना भविष्य संवारना चाहत थे। गौरतलब है कि मप्र में नेता पुत्रों की बड़ी पौध राजनीति में हाथ आजमाने को तैयार है। लेकिन पीएम मोदी के सख्त रुख के चलते विधानसभा से लेकर लोकसभा चुनाव तक में नेता पुत्रों को टिकट नहीं मिला। यही वजह है कि जो नेता पुत्र हमेशा से राजनीति में आगे दिखाई देते थे, वे अब मैदान से ही गायब हैं। आलम यह है कि चुनावी राजनीति के साथ ही संगठन में भी नेता पुत्रों के लिए फिलहाल दरवाजे बंद हैं। लेकिन इन सब के बावजुद कार्तिकेय सिंह चौहान, महाआर्यमन सिंधिया और अभिषेक भार्गव निरंतर सक्रिय हैं।
कार्तिकेय सिंह चौहान
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बड़े बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान अपने पिता के विधानसभा क्षेत्र रहे बुधनी में लगातार सक्रिय रहते हैं। वे शिवराज के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में देखे जा रहे हैं। शिवराज जब मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने बुधनी की पूरी जिम्मेदारी अघोषित तौर में कार्तिकेय को दे रखी थी। 30 वर्षीय कार्तिकेय न केवल उच्च शिक्षा प्राप्त हैं, बल्कि भाजपा की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। राजनीति में कार्तिकेय की एंट्री 2013 से हुई, जब वे मात्र युवावस्था में पिता के विधानसभा क्षेत्र बुधनी में सक्रिय हो गए। वे भाजपा कार्यकर्ता के रूप में रैलियां, जनसंपर्क और चुनाव प्रचार में हिस्सा लेते रहे। 2024 में बुधनी उपचुनाव में उनका नाम चर्चा में था, लेकिन टिकट नहीं मिला। फिर भी उन्होंने कहा कि बुधनी के लोगों से जुडऩे के लिए टिकट की जरूरत नहीं। पिता के केंद्रीय मंत्री बनने के बाद कार्तिकेय पर राजनीतिक विरासत संभालने की जिम्मेदारी बढ़ गई है। वे सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और भाजपा के पक्ष में मुखर रहते हैं। कार्तिकेय सिंह चौहान आज की पीढ़ी के उस युवा का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो पारंपरिक राजनीतिक विरासत को आधुनिक शिक्षा और उद्यमिता से जोड़ रहा है। शिवराज की राजनीतिक यात्रा के अगले चरण में कार्तिकेय की भूमिका अहम होगी।
महानआर्यमन सिंधिया
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एमपीसीए से अपने पुत्र महानआर्यमन सिंधिया के लिए राजनीति में प्रदेश का दरवाजा पहले ही खुलवा दिया है। महानआर्यमन सिंधिया एमपीसीए अध्यक्ष हैं। सूत्रों का कहना है कि 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए ज्योतिरादित्य अभी से महानआर्यमन के लिए राजनीतिक मैदान बना रहे हैं। इसके लिए शिवपुरी का चयन किया गया है। सिंधिया की इसी रणनीति के तहत एमपीसीए अध्यक्ष बनने के बाद महानआर्यमन पहली बार शिवपुरी पहुंचे। युवराज के स्वागत में पूरा शिवपुरी नगर दुल्हन की तरह सजाया गया। शहर की प्रमुख सडक़ों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर भव्य स्वागत ने इस दौरे को खास बना दिया। इस दौरान महानआर्यमन सिंधिया ने खिलाडिय़ों से सीधा संवाद किया। उन्होंने क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़े युवाओं की बात सुनी और उन्हें आगे बढऩे के लिए प्रोत्साहित किया। इस मौके पर सक्रिय राजनीति को लेकर जूनियर सिंधिया का बयान भी चर्चा में रहा। महानआर्यमन सिंधिया ने कहा कि उनके पिता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उन्हें हमेशा यही सिखाया है कि आपके खून में राजनीति नहीं, जनसेवा होनी चाहिए। हम अक्सर चुनावी मोड में चले जाते हैं और यह भूल जाते हैं कि असली जरूरत लोगों से संवाद की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वे राजनीति नहीं, बल्कि जनसेवा करेंगे चाहे वह किसी भी क्षेत्र के माध्यम से क्यों न हो। शिवपुरी दौरे के दौरान युवराज का सादगी भरा अंदाज और खिलाडिय़ों के साथ खुला संवाद लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। कुल मिलाकर, महानआर्यमन सिंधिया का शिवपुरी दौरा सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि युवराज की सक्रीय राजनीति को लेकर बड़ा संदेश भी दे गया। गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में महानआर्यमन ने जमकर प्रचार किया था। चुनाव प्रचार के दौरान कभी बैलगाड़ी पर सवार हो जात थे तो कभी मंदिर पहुंच जाते थे। कभी पैदल ही चल पड़ते थे।
अभिषेक भार्गव
पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के पुत्र अभिषेक भार्गव 2003 से राजनीति में सक्रिय हैं। सामाजिक कार्य, शादियों, लोगों के सुख-दुख में शामिल होना, अस्पतालों में जाना ये सब करते उन्हें अभी भी देखा जा सकता है। गोपाल भार्गव उन्हें सियासत में स्थापित करने के प्रयास में लगे हुए हैं। अभिषेक 2007-08 में भाजयूमो संगठन से जुड़े। भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, प्रदेश मंत्री, उपाध्यक्ष के रूप में संगठन में काम किया। 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बुंदेलखंड के तीन लोकसभा क्षेत्र सागर, दमोह और खजुराहो से भाजपा की ओर से टिकट की दावेदारी भी की थी, लेकिन बाद में दावेदारी वापस ले ली। अभिषेक भार्गव की राजनीतिक सक्रियता के करीब 22 साल हो गए हैं। जब उनके पिता प्रदेश सरकार में मंत्री बने  तो राजधानी में पिता की सरकार में सक्रिय भूमिका के चलते अभिषेक भार्गव ने रेहली विधानसभा को संभाला और पिता की तरह जल्द ही लोगों के दिलों में जगह बना ली। सरल,सहज मुलाकात के अलावा पिता की तरह तेज तर्रार राजनीति की शैली के चलते अभिषेक भार्गव काफी लोकप्रिय हैं। उनकी सक्रियता और लोकप्रियता को आधार बनाकर गोपाल भार्गव उन्हें राजनीति में स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं।
जयवर्धन-नकुल राजनीति में स्थापित
मप्र की वर्तमान राजनीति में दो नेता पुत्र लगभग स्थापित हो चुके हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन सिंह और कमलनाथ के पुत्र नकुलनाथ हैं। जयवर्धन कमलनाथ सरकार में मंत्री रह चुके हैं।  जयवर्धन सिंह वर्तमान में राघौगढ़ से विधायक हैं। पार्टी ने गुना जिला कांग्रेस के अध्यक्ष का पद दिया है। जयवर्धन सिंह को कांग्रेस के उभरता हुआ चेहरा माना जा रहा था। वर्तमान में गुना जिले में कांग्रेस में वही एक नेता हैं, जिनकी स्वीकार्यता कांग्रेस में सभी को है। यही कारण रहा कि उन्हें जिले की कमान सौंपी गई है। जयवर्धन सिंह का राजनीति में पदार्पण वर्ष 2011 में हुआ। उन्होंने पिता की क्षत्रछाया में राघोगढ़ में अपनी सक्रियता बढ़ाई। बेटे का जनता से लगाव देख उन्होंने जयवर्धन को 2013 में राघोगढ़ से ही चुनाव लडऩे दिया। यहां तक कि राघोगढ़ की देखरेख की जिम्मेदारी ही जयवर्धन को सौंप दी। जयवर्धन सिंह ने वर्ष 2013 में राघौगढ़ से पहला चुनाव लड़ा। उन्हें 2018 के चुनाव में फिर से चुना गया और 25 दिसंबर 2018 से 23 मार्च 2020 को सरकार गिरने तक कमलनाथ मंत्रालय में शहरी विकास और आवास मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया। 32 साल की उम्र में, सिंह अपने कार्यकाल के दौरान मध्य प्रदेश के इतिहास में सबसे कम उम्र के कैबिनेट मंत्री बने। हालांकि, वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी हिरेंद्र सिंह ने उन्हें कड़ी टक्कर दी। इस चुनाव में जयवर्धन सिंह मात्र 4500 वोटों से चुनाव जीत पाए। इसी तरह नकुलनाथ भी अपने पिता के संसदीय क्षेत्र में स्थापित हो चुके हैं। हालांकि नकुलनाथ एक्सिडेंटल नेता हैं, उनके पिता कलम नाथ मप्र के मुख्यमंत्री बने तो मोदी लहर में उनका गढ़ (छिंदवाड़ा लोकसभा सीट) बचाने के लिए वे राजनीति में आए। 2019 में नकुलनाथ ने पहली बार छिंदवाड़ा सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत दर्ज कर सांसद बने। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में वे अपना गढ़ नही बचा पाए। इसके बाद भी वे छिंदवाड़ा में लगातार सक्रिय हैं। पिछले साल अगस्त में खाद की किल्लत सहित किसानों के मुद्दे पर  छिंदवाड़ा में बड़ा आंदोलन कर उन्होंने अपना दम दिखाया। इस आंदोलन में  डेढ़ दर्जन विधायकों, पूर्व मंत्रियों, वरिष्ठ नेताओं को जुटाकर कर उन्होंने अपनी भविष्य की राजनीति का खाका खींचा।

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