- आबकारी नीति का प्रारूप तैयार

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
प्रदेश में अलग-अलग शराब दुकान के लिए ठेके नहीं होंगे। पिछली बार की तरह इस बार भी दुकानों के समूह बनाकर ही ठेके दिए जाएंगे लेकिन अंतर इतना है कि ये बड़े-बड़े नहीं बल्कि छोटे होंगे। इससे एकाधिकार समाप्त होगा। प्रतिस्पर्धा होगी, जिससे सरकार को राजस्व अधिक प्राप्त हो सकेगा। आबकारी विभाग ने वर्ष 2026 के लिए आबकारी नीति नीतिक का प्रारूप तैयार कर लिया है, जिसे मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली आगामी कैबिनेट की बैठक में अंतिम निर्णय के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। आबकारी नीति तैयार करने के लिए कई दौर की बैठकें की गईं। इसमें वर्तमान नीति की समीक्षा के साथ कारोबार की सुगमता से लेकर अन्य पहलुओं पर विचार किया गया। इसमें सबसे महत्वपूर्ण अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए व्यवस्था को ऑनलाइन बनाने के साथ राजस्व में वृद्धि रहा। दरअसल, आबकारी से होने वाली आय प्रदेश सरकार के स्वयं करों से प्राप्त होने वाले राजस्व का बड़ा माध्यम है। इस बार साढ़े 19 हजार करोड़ रुपये अर्जित करने का लक्ष्य रखा जा रहा है। यह वर्तमान वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब तीन हजार करोड़ रुपये अधिक है।
नीति साफ, अमल धुंधला
आबकारी नीति 2025-26 में स्पष्ट लिखा है कि शराब की बिक्री एमआरपी से अधिक और एमएसपी से कम दर पर नहीं की जा सकती। सस्ती शराब के पीछे असली वजह आबकारी नीति का वही प्रावधान है। राजधानी के एक ठेकेदार के मुताबिक, उन्हें हर माह कम से कम 85 प्रतिशत स्टॉक उठाना अनिवार्य है। तय मात्रा नहीं उठाने पर भारी पेनल्टी लगती है। नतीजतन लाइसेंस अवधि के अंतिम महीनों में बचे हुए स्टॉक को किसी भी कीमत पर निकालना उनकी मजबूरी होती है।
नई दुकानें नहीं खुलेंगी
प्रदेश में 3,553 शराब दुकानें हैं। इनकी संख्या इतनी ही रहेगी। नई दुकानें नहीं खोली जाएंगी। देसी और विदेशी शराब एक ही दुकान से मिलने की व्यवस्था जारी रहेगी। प्रस्तावित नीति के अनुसार पांच से दस दुकानों के समूह बनाए जाएंगे। इससे ई-नीलामी की प्रक्रिया में अधिक लोग भाग ले सकेंगे, इससे किसी का एकाधिकार नहीं होगा और प्रतिस्पर्धा होगी। इसका लाभ यह होगा कि सरकार को राजस्व अधिक प्राप्त होगा। आरक्षित मूल्य से कम से कम 20 प्रतिशत अधिक बोली लगाना अनिवार्य किया जा सकता है।
