
- अब शहर और गांव के लिए एक होगा कॉलोनाइजर एक्ट
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में तेजी से बढ़ रही अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार सख्त रुख अपनाने जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में नगरीय क्षेत्र (कॉलोनी विकास) अधिनियम-2021 में संशोधन का मसौदा तैयार किया जा रहा है। प्रस्तावित बदलावों के तहत अवैध कालोनियों पर कड़ा प्रहार करने के लिए अब शहर और गांव के लिए एक ही कॉलोनाइजर एक्ट होगा। अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ दंड और जुर्माने को कई गुना बढ़ाने की तैयारी है। इसमें अवैध कॉलोनियों की शिकायत मिलने पर 90 दिन में एफआईआर दर्ज करने, अधिकतम सजा 10 साल तक करने और एक करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है। हालांकि, नया कानून पुरानी कॉलोनियों पर लागू होगा या नई कॉलोनियों, पर इसको लेकर निर्णय लिया जाना है।
गौरतलब है कि प्रदेश में शहरों से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में कालोनियों का निर्माण तेजी के साथ हो रहा है। निगरानी की कमी के कारण अवैध कालोनियां भी बन रही हैं, जहां रहवासियों को आवश्यक सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। यही स्थिति शहरी क्षेत्र में भी है। उधर, ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के लिए कालोनाइजर अधिनियम अलग-अलग हैं। इन्हें एक करके कड़े प्रावधान लागू करने का प्रारूप तैयार किया गया है, जिससे पंचायत एवं ग्रामीण व नगरीय विकास एवं आवास विभाग सहमत हैं। एकीकृत कालोनाइजर अधिनियम बजट सत्र में प्रस्तुत करना प्रस्तावित था लेकिन वरिष्ठ सचिव समिति की बैठक नहीं हो पाई। अब इसे अध्यादेश के माध्यम से लागू करने की तैयारी है। प्रदेश में तेजी के साथ शहरीकरण हो रहा है। शहरों में भूखंड का मूल्य अधिक होने से पास की पंचायतों में तेजी के साथ नई-नई कॉलोनियां विकसित हो रही हैं।
विधानसभा में उठ चुका है मुद्दा
दरअसल, पंचायत क्षेत्र में कालोनाइजर को आसानी से अनुमतियां मिल जाती हैं। कालोनाइजर कालोनी बनाकर निकल जाते हैं लेकिन आवश्यक सुविधाओं का विकास नहीं करते हैं। पंचायतें भी ध्यान नहीं देती हैं और जब यह कालोनियां नगरीय निकायों में शामिल होती हैं तो फिर विकास से जुड़े मुद्दे खड़े हो जाते हैं। अवैध कालोनियों को नियमित करने का प्रविधान कुछ समय के लिए किया गया था लेकिन वर्तमान में यह बंद हैं। विधानसभा के बजट सत्र में पूर्व विधायक डॉ.सीतासरन शर्मा सहित अन्य विधायकों ने भी अवैध कालोनी का विषय उठाया था। इस पर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने माना था कि अवैध कालोनियां बड़ी समस्या हैं। ये बने ही न, इसके लिए कड़े प्रविधान करने जा रहे हैं। विधेयक तीन माह बाद होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा। उधर, सरकार ने तय किया है कि नगरीय क्षेत्रों के लागू कालोनाइजर नियम जैसे ही पंचायत क्षेत्र में भी लागू किए जाएंगे। एक ही लायसेंस से कालोनाइजर कहीं भी काम कर सकेंगे। इसमें नक्शा पास कराने से लेकर अन्य अनुमतियां सिंगल विंडो सिस्टम से मिलेंगी। निर्धारित अधोसंरचना विकास करना होगा और इसके उल्लंघन पर कार्रवाई होगी। उधर, सरकार इस प्रावधान को जल्द से जल्द लाना चाहती है क्योंकि सिंहस्थ क्षेत्र में कई अवैध कालोनियां बन गई हैं। एक प्रावधान होने से समस्या का काफी हद तक समाधान हो जाएगा। इसके बाद भी यदि अवैध कालोनी बनती है तो जिसके क्षेत्र में ऐसा पाया जाएगा, उस अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई होगी। नगरीय निकाय और पंचायत विभाग के अधिकारियों के साथ एसडीएम, अपर कलेक्टर और कलेक्टर की भी जिम्मेदारी तय होगी। एक पोर्टल भी बनाया जाएगा, जिसमें कालोनी से संबंधित सभी स्थिति स्पष्ट रहेगी ताकि जो कोई भी उसमें संपत्ति खरीदे, उसे स्थिति स्पष्ट हो जाए।
विस में मंत्री विजयवर्गीय ने दिए सख्त संदेश
अवैध कॉलोनियों को लेकर विधायक रीति पाठक के प्रश्न के जवाब में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा में कहा कि अब अवैध कॉलोनियों पर कड़ा कानून लागू किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ तेज कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में तीन महीने के भीतर सख्त नियम लागू होंगे। जानकारी के अनुसार नए प्रस्तावित प्रावधान के अनुसार यदि किसी अवैध कॉलोनी को लेकर थाने में शिकायत मिलती है, तो 90 दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य होगा। समय सीमा का पालन नहीं करने वाले पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिकायतों को लंबित रखने से दोषियों को मिलने वाली राहत न मिल सके। हालांकि, अभी यह प्रस्तावित है। बता दें, आंकड़ों के अनुसार, अब तक अवैध कॉलोनियों के खिलाफ हजारों शिकायतें मिलने के बावजूद बहुत कम मामलों में एफआईआर दर्ज हो पाई है। कार्रवाई की धीमी गति को देखते हुए जवाबदेही तय करने की जरूरत महसूस की गई है।
सजा और जुर्माने में बड़ा इजाफा
जानकारी के अनुसार मौजूदा कानून में अवैध कॉलोनी विकसित करने पर तीन से सात वर्ष तक की सजा और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। संशोधन के बाद इसे बढ़ाकर अधिकतम 10 वर्ष की सजा और एक करोड़ रुपये तक के आर्थिक दंड में बदलने की तैयारी है। इससे अवैध प्लॉटिंग और बिना अनुमति कॉलोनी काटने वालों को कड़ा संदेश जाएगा। नए कानून में केवल कॉलोनाइजर ही नहीं, बल्कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा जाएगा। प्रस्तावित कानून में यह व्यवस्था की गई है कि शिकायत मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं करने वाले प्रशासनिक या नगरीय निकाय के अधिकारी दोषी पाए जाने पर दंडित किए जा सकेंगे। इसमें एक वर्ष तक की सजा और आर्थिक दंड का प्रावधान शामिल है।
