
- आस्था का महाकुंभ, विकास का नया अध्याय…
अध्यात्म, आस्था, दिव्यता और अलौकिक विकास का महाकुंभ सिहस्थ 2028 को भव्य बनाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनकी सरकार पूरी तन्मयता से जुटी हुई है। सरकार की कोशिश है की आस्था के महाकुंभ और विकास के नए अध्याय सिंहस्थ को ऐसा बनाया जाए कि दुनिया इसका वैभव देखेगी।
विनोद कुमार उपाध्याय/बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)। मप्र की धार्मिक नगरी उज्जैन में 27 मार्च से 27 मई 2028 तक सिंहस्थ महापर्व चलेगा। इस दौरान 9 अप्रैल से 8 मई तक तीन शाही स्नान और सात पर्व स्नान होंगे। महाकाल की नगरी अध्यात्म, आस्था, पवित्रता के कारण हमेशा से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रही है। वहीं जब भी सिहस्थ का आयोजन होता है पूरे विश्व की नजर इस ओर हो जाती है। इसको देखते हुए सिंहस्थ-2028 को भव्य बनाने के लिए सरकार ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी है। तैयारियों को देखकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उत्साहित हैं और उनका दावा है कि सिंहस्थ-2028 में भारतीय संस्कृति का वैभव पूरी दुनिया देखेगी। सिंहस्थ-2028 की तैयारी राज्य सरकार ने 2024 से ही शुरू कर दी है। सिंहस्थ 2028 के लिए मप्र सरकार उज्जैन में युद्धस्तर पर तैयारियां कर रही है, जिसका लक्ष्य इसे भव्य और सुरक्षित बनाना है। 15,567 करोड़ रुपये से अधिक के 568 प्रस्तावों के साथ सडक़ों, पुलों, पानी की उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाओं, और 80,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती सहित बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा रहा है। उज्जैन को मेट्रो शहर की तरह विकसित किया जा रहा है। इंदौर-उज्जैन मेट्रो लाइन का प्रस्ताव है और उज्जैन बायपास रेलवे लाइन को मंजूरी मिल गई है। शहर के प्रमुख मार्गों का उन्नयन, गऊघाट पर विकास, और महाकाल मंदिर के आसपास के घाटों को बेहतर बनाया जा रहा है। हरिपुरखेड़ी जल संवर्धन परियोजना (1133.67 करोड़) के माध्यम से शुद्ध पानी की व्यवस्था की जा रही है। लगभग 60,000 राज्य पुलिस और 20,000 अर्धसैनिक बलों के साथ एक विस्तृत योजना, जिसमें गुगल मैपिंग और सीसीटीवी से मॉनिटरिंग शामिल है। मेला क्षेत्र के आसपास धर्मशालाओं, स्कूलों और सामुदायिक भवनों को तैयार किया जा रहा है ताकि लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था हो सके। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इन कार्यों की नियमित समीक्षा की जा रही है, जिसमें समय पर काम पूरा करने को प्राथमिकता दी जा रही है। सिंहस्थ 2028 के लिए हाल ही में 2675 करोड़ रुपए की लागत राशि से 33 प्रमुख कार्यों को मंजूरी दी गई है। उज्जैन के प्रमुख मंदिरों का भी विस्तारीकरण किया जाएगा। मां हरसिद्धी और भगवान श्रीमहाकाल की कृपा से उज्जैन को लगभग 370 करोड़ लाख लागत के 11 विकास कार्यों की सौगात मिली है। सिंहस्थ के दौरान भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को उच्च तकनीकी के साथ अंजाम दिया जाएगा। सिंहस्थ में भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और सुरक्षा के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। एआई का उपयोग श्रद्धालुओं की गिनती, ट्रैफिक अलर्ट और वाहनों की निगरानी के लिए होगा। इसके साथ ही मेले में स्वच्छता और शुद्ध पेयजल की आपूर्ति पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उज्जैन में 11500 करोड़ से बनेंगी सडक़ें
सिंहस्थ 2028 से पूर्व देश-दुनिया से उज्जैन आने वाले दर्शनार्थियों की यात्रा को सुगम बनाने के लिए एनएचएआई ने सडक़ो का जाल बिछाना शुरू कर दिया है। दिल्ली मुम्बई एक्सप्रेस वे को जोड़ते हुए एक्सेस कंट्रोल ग्रीनफील्ड उज्जैन गरोठ व उज्जैन झालावाड़ कोटा हाइवे तैयार किए जा रहे हैं। वहीं महाराष्ट्र को कनेक्ट करने के लिए वेस्टर्न बायपास बनाया जा रहा है। इन सभी की लागत लगभग 11500 करोड़ रुपये आएगी और ये 2 साल की समय सीमा में बनकर तैयार होंगे। जिनमें उज्जैन गरोठ आगामी 2 महीनों में ही बन कर तैयार हो जाएगा। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर राहुल जाजोरिया ने बताया, हम उज्जैन को सभी दिशाओं से हाइवे व एक्सप्रेस वे से कनेक्ट कर रहे हैं। जिससे श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग व अन्य तीर्थ स्थलों पर आने वाले दर्शनार्थियों के समय की बचत होगी उनकी यात्रा सुगम होगी। सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रख सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार इन सडक़ों का विकास कार्य जारी है। जिन्हें स्वीकृति मिल गई है उनके निर्माण कार्यो की समय सीमा 2 साल तय है। वहीं कुछ को स्वीकृति मिलना बाकी है। उज्जैन झालावाड़ 160 किलोमीटर का हाइवे बनने वाला है जिसका डीपीआर तैयार करके दिल्ली भेजा गया है। मार्च में इसकी स्वीकृति मिल जाएगी। जिसकी लागत 4500 करोड़ रुपए होगी जो कोटा से दिल्ली मुम्बई एक्सप्रेस वे को कनेक्ट करेगा। ये रोड 45 से 55 मीटर चौड़ा होगा। मध्य प्रदेश में इसमें 77 गांव व झालावाड़ सीमा में 17 गांव आ रहे हैं, जहां के किसानों की 533 हेक्टर जमीन अधिग्रहण कर उचित मुआवजा दिया गया। इस हाइवे पर 150 पुल-पुलिया, 2 टोल मध्य प्रदेश सीमा में निपानिया, सेमलखेड़ी व 1 राजस्थान सीमा के बिंदा में रहेंगे। जिसका निर्माण कार्य जारी है।
उज्जैन से गरोठ हाईवे 135 किलोमीटर लंबा है जिसको 2600 करोड़ की लागत से बना रहे हैं। ये गरोठ से दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे को कनेक्ट करेगा। अभी इसका 10 प्रतिशत काम और बाकी है जो आगामी दो महीनों में पूरा हो जाएगा। इस हाईवे पर लगभग 83 गांव हैं जिसकी 820 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की गई है। ये 60 मीटर चौड़ा हाईवे होगा और इस पर करीब 6 टोल होंगे। तुला हेड़ा मेन टोल होगा बाकी 5 टोल- खेड़ा खजुरिया गांव, बरखेड़ा बड़ोदा, मुंडला सोंधिया, अंटालिया, नयाखेड़ा पर होगा। इस पर कुल 385 छोटे-बड़े पुल-पुलिया बनाएं जा रहे हैं। ख़ास बात यह है ये हाइवे एक्सेस कंट्रोल ग्रीनफील्ड हाइवे होगा। अब तक यह 129 किलोमीटर बन गया है, कुछ हिस्सों में ट्रैफिक भी शुरू कर दिया है। 5 किलोमीटर का काम और बाकी है। वेस्टर्न बायपास महाराष्ट्र को कनेक्ट करेगा। ये 64 किलोमीटर होगा और 2800 करोड़ से बनेगा। ग्रीनफील्ड एलाइनमेंट होगा। ये हाल ही में देवास भोपाल बायपास से कनेक्ट होगा। इसका काम पिछले महीने जनवरी 2026 में शुरू हो गया है। उज्जैन बडऩगर बदनावर मार्ग राजस्थान को कवर करेगा। ये एमपी के बदनावर तक कम्पलीट है। बदनावर से थांदला 1600 करोड़ की लागत से 80 किलोमीटर है। इसे हम रतलाम इकाई के माध्यम से बनाएंगे।
बनने जा रहा 9 भव्य प्रवेश द्वार
आने वाले कुछ महीनों में जब आप उज्जैन में प्रवेश करेंगे तो मध्य प्रदेश की ये धार्मिक नगरी आपको कुछ बदली-बदली नजर आएगी। वजह होगी उज्जैन में निर्माण होने जा रहा 9 भव्य प्रवेश द्वार। ये 9 द्वार इतने भव्य और आधुनिकता से लैस होंगे कि इनमें आपको सनातक का गौरव दिखाई देगा। ये प्रवेश द्वार न सिर्फ शहर के सौंदर्यीकरण तक सीमित रहेंगे बल्कि इन द्नार के माध्यम से टूरिस्ट और स्थानीय लोगों को सनातन परंपरा, सिंहस्थ संस्कृति, राजकीय गौरव की झलक देखने को मिलेगी। ये 9 प्रवेश द्वार निर्माण करने का जिम्मा उज्जैन विकास प्राधिकरण के कंधो पर है जिसे 18 महीनों में कुल 92.25 करोड़ की लागत से बनाने का लक्ष्य निर्धारित है। उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु, पर्यटक या आगंतुकों को ये धार्मिक नगरी अब नए वेष में दिखाई देगी। आने वाले कुछ महीनों में उज्जैन ना सिर्फ अपने धार्मिक स्थलों बल्कि 9 नवनिर्मित भव्य प्रवेश द्वार के लिए भी जाना जाएगा। करीब 18 महीने और 92.25 करोड़ की लागत के साथ उज्जैन विकास प्राधिकरण इस मेगा प्रोजेक्ट को समाप्त करेगी। इन प्रवेश द्वारा से ना सिर्फ शहर की रूप रेखा बदलेगी बल्कि श्रद्धालु, पर्यटक या आगंतुकों को एहसास होगा कि वे किसी साधारण शहर नहीं बल्कि काल, धर्म और मोक्ष की नगरी में प्रवेश किए हैं। 9 प्रवेश द्वार इंदौर रोड, देवास रोड, आगर रोड, मक्सी रोड, बडऩगर रोड और सिंहस्थ से जुड़े प्रमुख मार्गों और शहर में प्रवेश करने वाले प्रमुख मार्गों पर बनाए जाएंगे। 9 द्वारों के नाम हैं- अमृत द्वार, पांचजन्य द्वार, गज द्वार,कालगणना द्वार, उज्जैनी द्वार, सिंहस्थ द्वार, त्रिशुल द्वार, विक्रमादित्य द्वार, और डमरू द्वार। हर एक द्वार की लागत 6 करोड़ रूपए से लेकर 13 कोरड़ रूपए के बीच है। हर एक द्वार में आपको इंजीनियरिंग का शानदार नमूना देखने को मिलेगा जैसे- आरजीबीडब्ल्यू लाइटिंग, एलईडी डाउनलाइटर और डीएमएक्स कंट्रोलर लाइटिंग देखने को मिलेगी। इन लाइटिंग से रात में द्वार की जगमगाहट और भी ज्यादा भव्य और रौशन रहेगी। द्वार के निर्माण में बंसी पहाड़पुर के गुलाबी-सफेद पत्थर और जैसलमेर के पीले पत्थर का इस्तेमाल होगा। द्वारों पर 10 से 50 एमएम तक की गहरी 3-डी नक्काशी होगी, जिसमें पौराणिक प्रसंग, शेर, हाथी, मानव आकृतियां और सांस्कृतिक चिन्ह उकेरे हुए नजर आएंगे। द्वारों के असापास सौंदरीकरण, सडक़ चौड़ीकरण, सुगम ट्रैफिक व्यवस्था साथ ही हर छोटी बड़ी डिटेल्स पर खास ध्यान रखा जाएगा। इन द्वार के बन जाने से ना सिर्फ शहर की पहचान और भव्य होगी बल्कि शहर की गरिमा और भी ज्यादा धार्मिक महत्वों से जानी जाएगी।
हर घाट तक पहुंचेगा शुद्ध जल
सिंहस्थ 2028 को भव्य बनाने के लिए सरकार हर स्तर पर काम कर रही है। उज्जैन में नल जल योजना के साथ ही नदी को भी स्वच्छ बनाया जा रहा है। हर घर और हर घाट तक शुद्ध जल पहुंचाने की योजना पर काम किया जा रहा है। विगत दिनों 1133.67 करोड़ की लागत से विकसित होने वाली हरियाखेड़ी जल आवर्धन परियोजना का भूमिपूजन एवं 47.23 करोड़ के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण व शिलान्यास मुख्यमंत्री ने किया। इस परियोजना से सिंहस्थ 2028 के दौरान श्रद्धालुओं और नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध होगा। साथ ही शहर के हर घर में लंबे समय तक जल आपूर्ति सुनिश्चित होगी। शिप्रा को साफ रखने के लिए कान्ह डायवर्सन प्रोजेक्ट पर अब काम शुरू हो गया है, जहां 30 किलोमीटर लंबी परियोजना का 40 प्रतिशत से ज्यादा काम उज्जैन में पूरा हो गया है। नदी के पानी के साफ बनाए रखने के लिए कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना उज्जैन में अहम मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि खुद सीएम मोहन यादव भी लगातार इस परियोजना पर चल रहे कामों की समय-समय पर निगरानी कर रहे हैं, उज्जैन के अधिकारियों को इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम करने के लिए कहा गया है।
उज्जैन में इस परियोजना में कान्ह नदी के पानी को उज्जैन शहर में आने से पहले ही दूसरी दिशा में मोड़ा जाएगा, ताकि शिप्रा नदी में साफ पानी बना रहे। इस पूरे काम पर करीब 900 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यह परियोजना करीब 30 किलोमीटर लंबी है, इसमें 12 किलोमीटर हिस्सा जमीन के नीचे सुरंग के रूप में और 18 किलोमीटर हिस्सा कट एंड कवर तरीके से बनाया जा रहा है, इसके जरिए पानी को तय रास्ते से आगे ले जाया जाएगा। जिससे पानी का बहाव भी बना रहे और नदी भी पूरी तरह से साफ रहे। उज्जैन के कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने बताया कि यह काम मुख्यमंत्री के निर्देश पर सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है, उन्होंने कहा कि काम तेजी से चल रहा है और अब तक 40 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा हो चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिप्रा नदी उज्जैन की आस्था से जुड़ी हुई है। सिंहस्थ के अलावा सालभर अलग-अलग धार्मिक मौकों पर श्रद्धालु शिप्रा घाटों पर स्नान और आचमन के लिए आते हैं। प्रशासन का दावा है कि उज्जैन में शिप्रा नदी को लेकर चल रहा काम समय सीमा में पूरा किया जाएगा। प्रशासन के मुताबिक तय समय के भीतर काम पूरा करने की कोशिश की जा रही है। परियोजना पूरी होने के बाद सिंहस्थ 2028 के दौरान शिप्रा नदी में साफ पानी का बहाव बनाए रखा जाएगा।
क्राउड कंट्रोल मैनेजमेंट
सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में संभावित भारी भीड़ के मद्देनजर प्रशासन ने अभी से क्राउड कंट्रोल मैनेजमेंट की तैयारी शुरू कर दी है। ओंकारेश्वर मंदिर और ममलेश्वर मंदिर विस्तार परियोजना के माध्यम से प्रशासन सुविधाओं को बढ़ाना चाहता है, ताकि सिंहस्थ में कोई परेशानी न हो। इसके लिए दोनों मंदिरों के विकास के साथ तीर्थनगरी के विकास की योजना भी प्रशासन ने जनता के सामने पेश की है। इंदौर-इच्छापुर हाईवे के शुरू होने और इंदौर-खंडवा रेल लाइन के चालू होने के बाद ओंकारेश्वर में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि का अनुमान है। प्रशासन के आकलन के अनुसार, आने वाले समय में प्रतिदिन लगभग एक लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। वर्तमान में ओंकारेश्वर मंदिर परिसर और वहां तक पहुंचने वाले मार्ग काफी संकरे हैं, जिससे भीड़ प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर के विस्तार की योजना तैयार की गई है। इस योजना के तहत पार्किंग व्यवस्था का विस्तार, मंदिर तक पहुंच मार्ग का चौड़ीकरण, श्रद्धालुओं के लिए विश्राम स्थल, प्रसाद वितरण केंद्र और सुव्यवस्थित कतार प्रणाली विकसित की जाएगी। ओंकारेश्वर, ममलेश्वर मंदिर विस्तार को लेकर संभावित विस्थापन की प्रक्रिया पर भी प्रशासन गंभीरता से काम कर रहा है। पिछली बार ममलेश्वर लोक को लेकर अचानक प्रस्तुत कार्ययोजना के कारण स्थानीय स्तर पर विरोध की स्थिति बनी थी। इसके बाद प्रशासन ने रणनीति में बदलाव करते हुए संतों, स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लेकर आगे बढऩे का निर्णय लिया है। खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता का कहना है कि विकास और आस्था के संतुलन को ध्यान में रखते हुए सभी हितधारकों से संवाद किया जा रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि सिंहस्थ 2028 तक ओंकारेश्वर को सुव्यवस्थित, सुरक्षित और आधुनिक सुविधाओं से युक्त तीर्थ नगरी के रूप में विकसित किया जाए, ताकि लाखों श्रद्धालु सुगमता से दर्शन लाभ ले। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के साथ आस पास के धार्मिक स्थलों को विकसित किया जा रहा है। यह कदम सिंहस्थ 2028 की भव्यता और श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देने वाला है। सिंहस्थ हर 12 साल में उज्जैन में होता है लेकिन ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग भी महत्वपूर्ण केंद्र है जहां लाखों श्रद्धालु स्नान और दर्शन के लिए आते हैं। 2028 में अपेक्षित भीड़ को देखते हुए पहले से तैयारी जरूरी है। खंडवा जिले की तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में सिंहस्थ 2028 की तैयारियां अब तेजी से आगे बढ़ रही हैं। ज्योतिर्लिंग मंदिर में बढऩे वाली लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने महत्वपूर्ण फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। इसके तहत मंदिर के गर्भगृह स्थित सुखदेव मुनि गेट के विस्तार पर फोकस किया जा रहा है। वर्तमान में इस गेट से प्रति मिनट केवल 60 श्रद्धालु ही दर्शन कर पाते हैं लेकिन सिंहस्थ के दौरान यह संख्या कई गुना बढ़ सकती है। इसलिए गेट को चौड़ा करने की योजना है। इससे दर्शन सुगम होंगे तथा भीड़ प्रबंधन आसान होगा। प्रशासन का लक्ष्य सिंहस्थ को व्यवस्थित, सुरक्षित और श्रद्धालु-अनुकूल बनाना है। इसके लिए मंदिर परिसर, यातायात, आवास और अन्य बुनियादी सुविधाओं को चरणबद्ध तरीके से मजबूत किया जाएगा। सुखदेव मुनि गेट का विस्तार इसी योजना का पहला बड़ा कदम है। यह तैयारी सुनिश्चित करेगी कि आस्था का महापर्व बिना किसी असुविधा के संपन्न हो। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत प्रशासन ने सुखदेव मुनि गेट के विस्तारीकरण को 50 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। निर्माण कार्य भूतड़ी अमावस के बाद शुरू होगा, ताकि श्रद्धालुओं की संख्या कम रहने पर काम तेजी से हो सके और अनावश्यक बाधा न आए। इस दौरान दर्शन व्यवस्था पूरी तरह जारी रहेगी और श्रद्धालुओं को चांदी के द्वार से प्रवेश देकर नियमित दर्शन कराए जाएंगे, ताकि किसी को लौटना न पड़े। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि व्यवस्था सुरक्षित और नियंत्रित रहे, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। इसके साथ ही सिंहस्थ को देखते हुए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, यातायात प्रबंधन की नई योजना लागू करने, भीड़ नियंत्रण के लिए आधुनिक सिस्टम अपनाने और सुरक्षा व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने की चरणबद्ध तैयारी भी की जा रही है।
उज्जैन में ट्रेनों का रिवर्स गियर बंद
सिंहस्थ-2028 के पहले देश भर से बेहतर कनेक्टविटी के लिए कई सारे रेल और रोड प्रोजेक्ट मंजूर किए गए हैं। इसी कड़ी में उज्जैन के लिए रेलवे ने बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। उज्जैन बायपास रेलवे लाइन परियोजना के तहत 8.60 किमी लंबी रेल लाइन को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना पर 189 करोड़ रु खर्च होंगे। यह प्रोजेक्ट उज्जैन के लिए काफी अहम है क्योंकि इस प्रोजेक्ट से उज्जैन में ट्रेनों के संचालन में खासी मदद मिलने वाली है। इससे धार्मिक पर्यटन के लिए आने वाले करोड़ों श्रृद्धालुओं के लिए सहूलियत होगी, ट्रेन समयबद्ध चलेंगी, यात्रियों का भारी दबाव कम होगा और मालगाडिय़ों के समयबद्ध संचालन से आर्थिक विकास में भी मदद मिलेगी। 2028 उज्जैन सिहंस्थ के मद्देनजर अरबों रुपए के रेल और रोड प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इसी कड़ी में उज्जैन बायपास रेलवे परियोजना को स्वीकृति दी गई है, जो उज्जैन के रेल यातायात के लिए काफी सुविधाजनक साबित होगा। इस प्रोजेक्ट के तहत 189.04 करोड़ की लागत से 8.60 किमी लंबा रेलवे बायपास बनाया जाएगा। पश्चिम मध्य रेलवे के तहत नईखेरी-चिंतामन गणेश को जोडऩे वाली 8.60 किमी लंबी उज्जैन बायपास रेलवे लाइन का उद्देश्य मुख्य रूप से उज्जैन जंक्शन पर ट्रेनों के रिवर्सल की समस्या को समाप्त करना है। अब तक उज्जैन में ट्रेनों का यातायात सुगम रखने के लिए (रिवर्सल) वापस मोड़ा जाता है। लेकिन इस प्रोजेक्ट के अस्तित्व में आते ही ये समस्या खत्म हो जाएगी। फिलहाल उज्जैन जंक्शन पर यातायात सुगम रखने और कई ट्रेनों की दिशा बदलने के लिए रिवर्सल करने की मजबूरी है। वर्तमान में ट्रेनों के परिचालन और यात्रा में लगने वाले समय पर असर पड़ता है। बायपास रेलवे लाइन के अस्तित्व में आते ही रिवर्सल की प्रक्रिया खत्म हो जाएगी और ट्रैनों की आवाजाही सुगम और आसान होगी।
उज्जैन बायपास रेललाइन प्रोजेक्ट के मंजूर होने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुशी जाहिर करते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इस लाइन के प्रारंभ होने से उज्जैन के समीप वैकल्पिक रेल मार्ग उपलब्ध होगा। यह सिंहस्थ-2028 के दौरान श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाएगा। उज्जैन से ट्रेनों को वापस मोडऩे की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी और ट्रेनों में विलंब नहीं होगा। इस बायपास रेल लाइन को स्वीकृति देने के लिए माननीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव जी का हृदय से आभार। मप्र में रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में इस प्रोजेक्ट की मंजूरी को अहम माना जा रहा है। इस परियोजना से मालवा अंचल में आर्थिक विकास रफ्तार पकड़ेगा। परियोजना सिंहस्थ 2028 के मद्देनजर काफी अहम मानी जा रही है, जो यात्रियों के समय की बचत और बेहतर कनेक्टिविटी में मददगार होगी। सिंहस्थ के दौरान आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए बेहतर रेल सुविधा और रेलों के बिना लेटलतीफी के संचालन में सुधार होगा। बायपास लाइन से उज्जैन ही नहीं आसपास के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पहुंचने में सुगमता होगी।
80 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी होंगे तैनात
उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व को लेकर तैयारियां अभी से तेज हो गई हैं। पहली बार सिंहस्थ ड्यूटी में तैनात होने वाले पुलिसकर्मियों को श्रद्धालुओं के स्नान व्यवहार, सुरक्षा और संवेदनशील प्रबंधन को लेकर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण में यह भी सिखाया जाएगा कि कोई श्रद्धालु शिप्रा नदी में स्नान के दौरान कितनी देर तक जल में रह सकता है, समय सीमा पूरी होने पर क्या कदम उठाने हैं और किसी के बाहर न आने की स्थिति में कैसे प्रतिक्रिया देनी है। इस सिंहस्थ में पहली बार शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर कुल 22 किलोमीटर लंबे घाटों में स्नान की व्यवस्था होगी। इतनी बड़ी और जटिल व्यवस्था को देखते हुए पुलिसकर्मियों को थ्री-डी तकनीक के जरिए घाटों का वर्चुअल प्रशिक्षण दिया जाएगा। घाटों के वीडियो तैयार कर उन्हें भौगोलिक स्थिति, रास्तों और संवेदनशील स्थानों की जानकारी दी जाएगी, ताकि मौके पर पहुंचते ही पुलिसकर्मी पूरी तरह तैयार रहें। सिंहस्थ 2028 के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में लगभग 60 हजार पुलिसकर्मी मध्य प्रदेश के होंगे। 20 हजार अद्र्धसैनिक बल और अन्य राज्यों की पुलिस तैनात की जाएगी। सिंहस्थ को लेकर पुलिस मुख्यालय ने विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार कर लिया है, जिसमें प्रयागराज महाकुंभ में अपनाए गए नवाचारों और आधुनिक तकनीकों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा प्रशिक्षण में भीड़ प्रबंधन, सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों पर नियंत्रण, आगजनी और आपदा प्रबंधन, जैसे विषयों पर भी विस्तार से जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण की शुरुआत पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों में ट्रेनिंग ले रहे लगभग 5 हजार आरक्षकों से की जाएगी। वर्ष 2026 में 1-2 दिन का प्रशिक्षण और वर्ष 2027 में 5-7 दिन का विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए विशेष मुख्य प्रशिक्षक भी तैयार किए जाएंगे। सिंहस्थ 2028 को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने की दिशा में यह प्रशिक्षण व्यवस्था एक बड़ा और अहम कदम माना जा रहा है।दुनिया देखेगी सिंहस्थ-2028 का वैभव
