रिपोर्ट में सामने आई कारम बांध हादसे की हकीकत

  • सीई, अधीक्षण यंत्री समेत पांच इंजीनियर दोषी

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान की सरकार में कारम डैम टूटने के मामले में मोहन सरकार ने फाइल खोल दी है. साल 2022 में जिम्मेदार जल संसाधन के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला लिया गया है. अतिरिक्त मुख्य सचिव ने तत्कालीन मुख्य अभियंता, अधीक्षण यंत्री, तत्कालीन एसडीओ और छह अधिकारियों को तलब किया है. 17 फरवरी को अधिकारियों को मौजूद रहकर जवाब देना होगा. अगर अधिकारी जवाब नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ एक पक्षीय कार्रवाई की जाएगी.
धार जिले के ग्राम कोठीदा में कारम सिंचाई परियोजना के तहत बने कारम बांध के टूटने के मामले में साढ़े तीन साल बाद विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई है। 349 पन्नों की इस रिपोर्ट में मुख्य अभियंता (सीई) और अधीक्षण यंत्री सहित कुल पांच इंजीनियरों को दोषी ठहराया गया है। जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता द्वारा इन आरोपित अधिकारियों के खिलाफ 17 फरवरी को सुनवाई की जाएगी। जांच में तीन इंजीनियरों को साक्ष्यों के अभाव में क्लीन चिट दी गई है। उल्लेखनीय है कि नई दिल्ली की एएनएस कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा 304.44 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन कारम बांध अगस्त 2022 में क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद यह मामला सुर्खियों में आया था। रिपोर्ट के अनुसार प्रभारी मुख्य अभियंता नर्मदा-ताप्ती कछार सीएस घाटोल, तत्कालीन अधीक्षण यंत्री जल संसाधन मंडल धार पी. जोशी, तत्कालीन कार्यपालन यंत्री बीएल निनामा, तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी विकार अहमद सिद्दीकी और तत्कालीन उपयंत्री विजय कुमार जत्थाप के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रमाणित पाए गए हैं। वहीं तत्कालीन उपयंत्री राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव, अशोक कुमार राम और दशवंता सिसोदिया पर लगे आरोप सिद्ध नहीं हो सके, जिसके चलते इन्हें जांच से मुक्त कर दिया गया है।
लापरवाही मानी गई कारण
जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि बारिश के दौरान निर्माणाधीन मध्यम श्रेणी के बांध का क्षतिग्रस्त होना कोई सामान्य घटना नहीं है और इसे केवल अतिवृष्टि जनित प्राकृतिक आपदा मानकर खारिज नहीं किया जा सकता। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जनहानि न होने का तर्क दोषी इंजीनियरों के कदाचरण को कम नहीं करता। रिपोर्ट में कलेक्टर धार के 3 फरवरी 2026 के पत्र का हवाला देते हुए बताया गया है कि कारम बांध दुर्घटना के बाद प्रभावित किसानों और अन्य लोगों को कुल 14 लाख 70 हजार 398 रुपये का मुआवजा दिया गया। इसमें खेती की जमीन पर मिट्टी जमने के लिए 1 लाख 94 हजार 419 रुपये, फसल क्षति के लिए 9 लाख 90 हजार 679 रुपये, ईंट भट्टों के नुकसान पर 2 लाख 30 हजार रुपये और मकानों के नुकसान पर 1 लाख 15 हजार 300 रुपये शामिल हैं। इस तरह हादसे के कारण शासन को उल्लेखनीय वित्तीय हानि उठानी पड़ी।
एएनएस कंस्ट्रक्शन को मिला था ठेका
 जांच रिपोर्ट में ठेकेदार दिल्ली की कंपनी एएनएस कंस्ट्रक्शन को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। जल संसाधन विभाग के सचिव जॉन किंग्सली ने साढ़े तीन साल तक चली जांच में उल्लेख किया है कि 45 एमसीएम क्षमता के बांध में नाले को रोका गया था, लेकिन बारिश में बांध का निर्माण भूधरा छोड़ दिया था। बांध निर्माण में गुणवत्ता और मानकों का ध्यान नहीं रखा। बांध के डाउन स्ट्रीम में मौजूद 18 गांवों की आबादी को खतरे में डाला गया। जांच अधिकारी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि केंद्रीय जल आयोग के निर्देशन में काम करने के बाद भी दो साल तक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में आयोग को बार-बार पत्र लिखकर रिमाइंडर देना पड़ा है। वहीं आरोपी अधिकारियों ने तर्क दिया कि कोई जनहानि नहीं हुई, इस तर्क की वजह से उन्हें दोष मुक्त नहीं किया जा सकता है। रिपोर्ट में बताया कि विभागीय जांच के दौरान कुछ आरोपी इंजीनियरों ने तर्क दिया कि बांध पूरी तरह सुरक्षित था। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बांध में कट लगाने का निर्णय लिया गया, अगर ऐसा नहीं किया जाता तो बांध सुरक्षित रहता। इस कार्य से शासन को कोई वित्तीय हानि नहीं हुई है।

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