मप्र भाजपा के संगठन महामंत्री के नाम पर जल्द लगेगी मुहर!

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  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बड़ी बैठक हरियाणा के समालखा में

गौरव चौहान
मप्र के नेता इन दिनों राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच प्रदेश भाजपा के नेताओं की नजरें इन दिनों हरियाणा के समालखा में होने जा रही अहम बैठक पर टिकी हुई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बैठक में मप्र भाजपा के नए संगठन महामंत्री के नाम पर फैसला हो सकता है। इस संबंध में शीर्ष स्तर पर मंथन जारी है। प्रदेश भाजपा में संगठन महामंत्री का पद काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्तमान संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा को हाल ही में प्रदेश का सह बौद्धिक शिक्षण प्रमुख बनाए जाने के बाद यह पद रिक्त हो गया है। इसके चलते नए नाम को लेकर अटकलें तेज हैं। जानकारी के मुताबिक 13, 14 और 15 मार्च को हरियाणा के समालखा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होने जा रही है। इस बैठक में संघ प्रमुख सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी बैठक में शामिल हो सकते हैं। माना जा रहा है कि इसी बैठक में मध्य प्रदेश के संगठन महामंत्री के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि इस बार रणनीति में बदलाव संभव है। अब तक परंपरा रही है कि संघ अपने किसी प्रचारक को भाजपा में संगठन महामंत्री के रूप में नियुक्त करता रहा है। हालांकि, इस बार संघ किसी अनुषांगिक संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी को भी यह जिम्मेदारी दे सकता है। यदि ऐसा होता है तो इसे संगठनात्मक परंपरा में बड़े बदलाव के रूप में देखा जाएगा। संगठन महामंत्री का पद भाजपा में बेहद प्रभावशाली माना जाता है। यह पद संगठन और सरकार के बीच समन्वय की केंद्रीय कड़ी के रूप में कार्य करता है। ऐसे में आने वाला फैसला प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।
15 मार्च के बाद मिलेगा नया संगठन महामंत्री
मप्र भाजपा को 15 मार्च के बाद नया संगठन महामंत्री मिल जाएगा। हितानंद शर्मा की संघ में वापसी के बाद यह पद खाली है। इससे भाजपा के कई महत्वपूर्ण काम भी प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि संघ की वार्षिक बैठक में भाजपा का नया संगठन महामंत्री मिल जाएगा। गौरतलब है कि संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक 13 से 15 मार्च तक हरियाणा के पानीपत जिले के समालखा में आयोजित होगी। संघ के शताब्दी वर्ष के आयोजनों को लेकर यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और सभी सह-सरकार्यवाहों सहित संघ के शीर्ष पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। हालांकि संघ की छोटी टोली की तैयारी 9 मार्च से ही प्रारंभ हो जाएंगी। बैठक में शताब्दी वर्ष की कार्यक्रमों की समीक्षा होंगी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वार्षिक अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक हर साल मार्च होती है। भाजपा में संगठन महामंत्री का पद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। प्राय: संघ के ही किसी वरिष्ठ पदाधिकारी को यह अहम दायित्व दिया जाता है। ऐसे में प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा का दायित्व बदलकर उन्हें मध्यक्षेत्र का सह-बौद्धिक प्रमुख की जिम्मेदारी दी गई है। इस प्रकार संघ ने उन्हें मूल केडर में वापस बुला लिया है। बताया जा रहा है कि संगठन ने नई रणनीति के अंतर्गत हितानंद शर्मा की जिम्मेदारी बदलने का निर्णय लिया है। 2020 में उन्हें प्रदेश सह-संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई थी। दो साल बाद ही हितानंद शर्मा को प्रदेश संगठन महामंत्री बना दिया गया था। अब भाजपा के नए संगठन महामंत्री की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज हो गई है।
नई राज्य-केंद्रित संरचना लागू करेगा संघ
सूत्रों के अनुसार, संघ अपनी दशकों पुरानी प्रांतीय व्यवस्था को समाप्त कर एक नई राज्य-केंद्रित संरचना लागू करने जा रहा है। इसमें राज्य प्रचारक का नया पद सृजित किया जा सकता है। अब मप्र सहित प्रदेश के सभी राज्यों में प्रांत प्रचारकों के पद बने हुए है। इन पदों को समाप्त करने की तैयारी की जा रही है। इससे मप्र में भी प्रांत प्रचारक के पद समाप्त कर राज्य प्रचारक नियुक्त किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत पूरे राज्य के लिए एक राज्य प्रचारक नियुक्त किया जाएगा, जो संपूर्ण राज्य की गतिविधियों में समन्वय स्थापित करेगा। सूत्रों के अनुसार संगठन से जुड़े इन निर्णयों को शताब्दी वर्ष के समापन के बाद अगले साल 2027 से ही लागू किए जाने की संभावना है। वहीं भाजपा संगठन में अब राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर नए कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन की ताजपोशी के बाद अब राज्य स्तर पर परिवर्तन की आहट तेज हो गई है। माना जा रहा है कि पार्टी ऐसे चेहरों से परहेज करेगी, जिन्हें लेकर आमजन में धारणा ठीक नहीं है। संगठन चाहेगा कि चुनाव के दौरान विवादित चेहरे फ्रंट में न दिखें। इनके बजाए बेदाग, साफ सुथरी छवि और लोकप्रिय चेहरों को संगठन आगे बढ़ाएगा। ऐसे पुराने चेहरों को संगठन अब बदलने की कवायद में लग गया है, जो नेता हाल फिलहाल या पहले विवादों में रहे हैं। राष्ट्रीय नेतृत्व नहीं चाहता कि चुनाव के दौरान विवादित चेहरे फ्रंट पर दिखें। इसी कड़ी में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। इस फेरबदल में राष्ट्रीय नेतृत्व की भांति राज्य में भी युवाओं को तवज्जो दी जाएगी।

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