- सर्वे रिपोर्ट में उचित डेटा और पिछड़ेपन के वैज्ञानिक प्रमाणों की कमी

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मप्र की 32 ओबीसी जातियों को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने का इंतजार बढ़ गया है, क्योंकि इन जातियों के संबंध में तैयार की गई सर्वे रिपोर्ट में कमियां और विसंगतियां पाई गई हैं। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने इन जातियों को केंद्र की सूची में शामिल करने के लिए राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव की जांच की है, लेकिन रिपोर्ट में उचित डेटा और पिछड़ेपन के वैज्ञानिक प्रमाणों की कमी के कारण अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका है। इसे देखते हुए विभाग की ओर से इन जातियों के संबंध में अब मह स्थित डॉ. बीआर अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय के माध्यम से दोबारा सर्वे कराया जा रहा है।
गौरतलब है कि भोपाल में 17 फरवरी, 2025 को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने जनसुनवाई की थी। इसमें ओबीसी से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई थी। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष हंसराज गंगाराम अहीर और सदस्यों के समक्ष ओबीसी की लंबित सभी 32 जातियों को केंद्रीय सूची में शामिल करने की मांग रखी थी। इस पर आयोग के अध्यक्ष ने सर्वे में सामने आई त्रुटियां दूर कर दोबारा रिपोर्ट भेजने को कहा था। इस कृष्णा गौर ने एक महीने में सर्वे कराकर रिपोर्ट भेजने की बात कही थी। गौरतलब है कि आधिकारिक जानकारी के मुताबिक मप्र में 32 ओबीसी जातियां/उपजातियों कर ओर से उन्हें केंद्रीय सूची में शामिल कराने की मांग लंबे समय से की जा रही हैं। इसे देखते हुए पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने मप्र जन अभियान परिषद से 32 जाति/उपजातियों के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक एवं सेवा में पिछड़ेपन के आंकड़े एकत्रित करने के लिए सर्वे कराया था। करीब साल भर चले सर्वे के बाद परिषद द्वारा रिपोर्ट विभाग को प्रस्तुत की गई थी। फिर इस रिपोर्ट को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को सौंपा गया। रिपोर्ट का अध्ययन करने पर आयोग ने त्रुटियां गिनाते हुए फिर से रिपोर्ट भेजने की बात पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से कही थी। आयोग ने कहा था कि रिपोर्ट में सामने आईं कमियों को दूर किया जाए।
अब डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय करेगा सर्वे
जानकारी के अनुसार, आयोग ने स्पष्ट किया है कि त्रुटियों को दूर कर नई रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। इसके बाद ही इन जातियों को केंद्रीय सूची में शामिल करने पर विचार होगा। इसलिए इन जातियों को केंद्रीय सूची में शामिल होने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के रुख को देखते हुए मप्र सरकार के पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने अब इन ओबीसी जातियों के संबंध में सर्वे कराने की जिम्मेदारी महू स्थित डॉ. बीआर अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय को सौंपी है। विश्वविद्यालय इन ओबीसी जातियों के संबंध में विस्तृत सर्वे कर रिपोर्ट पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को सौंपेगा। विभाग फिर से इस रिपोर्ट को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के समक्ष पेश करेगा। इसके बाद आयोग इन 32 ओबीसी जातियों को केंद्रीय सूची में शामिल करने या नहीं करने के संबंध में अंतिम निर्णय लेगा।
ये जातियां केंद्रीय सूची में होंगी शामिल
पिछड़ा वर्ग की दवेज, भोपा मनभाव, दमामी, हरिदास, कोहरी, फूलमाली (फूलमारी), कलार, जायसवाल, डउसेना, लोढा (तंवर), गोलान, गौलान, गवलान, जादम, कुडमी, रूआला/रूहेला, अब्बासी के साथ सक्का, घोषी गवली और गोली है। इनके अतिरिक्त लिंगायत, महाकुल (राउत), थारवार, जमना लोधी, मनधाव डूकर, कोल्हाटी, घड़वा, झारिया, वोवरिया, मोवार, रजवार, सुत सारथी, तेलंगा, तिलंगा, गयार/परधनिया, बया महरा/कौशल, वया थोरिया, खरादी, कमलीगर, संतराम, शेख मेहतर केंद्रीय पिछड़ा वर्ग सूची में शामिल होंगी। राज्य मंत्री पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण कृष्णा गौर का कहना है कि प्रदेश की पिछड़ा वर्ग की 32 जातियों को केंद्रीय पिछड़ा वर्ग सूची में शामिल कराने को लेकर कार्रवाई लगातार चल रही है। हमारी पूरी कोशिश है कि जल्द से जल्द ये जातियां केंद्रीय पिछड़ा वर्ग की सूची में सम्मिलित हो जाएं।
