अभी फाइलों में ही रहेगा मास्टर प्लान!

  • मेट्रोपॉलिटन एरिया का दायरा नोटिफाई होने के बाद फिर से अटका प्लान

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। पिछले 21 सालों में भोपाल का मास्टर प्लान अटका हुआ है। हालांकि भोपाल और इंदौर का मास्टर प्लान एक बार फिर से तैयार कर लिया गया है, लेकिन प्रस्तावित मेट्रोपॉलिटन एरिया के कारण एक बार फिर से दोनों शहरों का मास्टर प्लान अभी अधर में ही रहेगा। गौरतलब है कि भोपाल और इंदौर को मिलाकर एक बड़े मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना मध्य भारत के शहरी ढांचे को बदलने वाली पहल मानी जा रही है। आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी होने के बाद संयुक्त क्षेत्र लगभग 26 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक विस्तार ले सकता है। इस बड़े विस्तार के कारण आसपास के जिलों में जमीन की मांग बढ़ेगी और निवेश के नए अवसर खुलेंगे, खासकर रियल एस्टेट, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े पैमाने पर मांग निकलेगी।
उल्लेखनीय है कि मेट्रोपॉलिटन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट-2025 को मंजूरी कैबिनेट की मंजूरी के साल भर के अंदर सरकार ने भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया का दायरा नोटिफाई कर दिया है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया का दायरा नोटिफाई होने के बाद भोपाल और इंदौर के मास्टर प्लान का मुद्दा चर्चा में है। दरअसल, भोपाल और इंदौर के मास्टर प्लान का ड्राफ्ट फाइनल हो गया है, लेकिन प्रस्तावित मेट्रोपॉलिटन एरिया के अनुरूप बनाने के लिए सरकार इसे जारी करने से पहले इस पर पुनर्विचार कर सकती है या इसे फिर से तैयार कर सकती है। विधानसभा के बजट सत्र में भी इसकी पुष्टि हो चुकी है। नगरीय विकास और आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने गत 24 फरवरी को विधानसभा में मास्टर प्लान के बारे में कहा था, मेरे विभाग ने इसे डेढ़ साल पहले तैयार कर लिया था और मास्टर प्लान तैयार है। उन्होंने आगे कहा, मैंने मुख्यमंत्री से बात की है। उन्होंने (मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे मेट्रोपॉलिटन एरिया के संबंध में हमें इस मास्टर प्लान पर एक बार फिर से विचार करना होगा। पहले हम उनका दृष्टिकोण देखेंगे, अगर वे इसे फिर से बनाने के लिए कहते हैं, तो हम इसे फिर से तैयार करेंगे और नए सिरे से सोचेंगे। इससे संकेत मिलता है कि भोपाल और इंदौर के लिए मास्टर प्लान जल्द नहीं आने वाला है। अधिकारियों का कहना है कि पुणे, चंडीगढ़, दिल्ली जैसे देश के बड़े शहरों के मास्टर प्लान के आधार पर प्रदेश के शहरों के मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में जरूरी रिफॉर्म (सुधार) किए गए हैं। इसका उद्देश्य भविष्य में प्रदेश के शहरों में जनसंख्या वृद्धि, बेहतर बुनियादी ढांचे, पर्यावरण की सुरक्षा जैसी चुनौतियों से निपटना है।
21 साल से अटका मास्टर प्लान
भोपाल जिला शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की निष्क्रियता से 21 साल से भोपाल का नया मास्टर प्लान अटका है। नया मास्टर प्लान लागू नहीं होने से शहर का बेतरतीब विकास हो रहा है। लोग महंगे दामों में प्लॉट खरीदकर मकान बनवाते हैं और सरकार उन्हें अवैध निर्माण घोषित कर देती है। अवैध कॉलोनियों में लोगों को बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1995 में कांग्रेस सरकार ने 2005 तक के लिए मास्टर प्लान लागू किया था, तब शहर की आबादी 11 लाख थी। आज आबादी बढकऱ 25 लाख से ज्यादा हो गई है, लेकिन सरकार नया मास्टर प्लान लागू नहीं कर पाई है। उन्होंने कहा कि सरकार नया मास्टर प्लान लागू करने की स्पष्ट समय सीमा तय करे। नया मास्टर प्लान लागू कराने की मांग को लेकर जिला कांग्रेस आने वाले दिनों में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन करेगी। सक्सेना ने कहा कि 2018 में कमलनाथ सरकार ने सत्ता में आते ही भोपाल के नए मास्टर प्लान के डाफ्ट पर तेजी से काम शुरू कर दिया था, लेकिन अचानक सरकार गिर गई और मास्टर प्लान ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद से प्रदेश में लगातार भाजपा की सरकार रही है, पर मास्टर प्लान लागू नहीं किया जा सका। जिला कांगेस ने एक हेल्पलाइन / व्हाट्सएप नंबर (7067634234) जारी किया है, जिस पर लोग मास्टर प्लान और शहर की समस्याएं और शिकायतें दर्ज करा सकते हैं।

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