
- नगरीय निकायों में होंगी नियुक्तियां
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में नगर निगमों और नगर पालिकाओं में एल्डरमैन के पद पर राजनीतिक नियुक्तियों का रास्ता साफ हो गया है। सबसे पहले भोपाल, इंदौर, नर्मदापुरम, रीवा, शहडोल, जबलपुर और उज्जैन संभाग के जिलों में आने वाले निकायों में नियुक्तियां होंगी। सत्ता व संगठन ने इन नियुक्तियों के लिए नाम तय कर लिए हैं। संभावना जताई जा रही है की इस महीने से नगरीय निकायों में राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला शुरू हो जाएगा।
मप्र में निकायों के चुनाव में बमुश्किल एक साल बचा है। उसके पहले सत्ता व संगठन को एल्डरमैन नियुक्त करने की याद आई है। नियुक्ति के पहले ही कई पदाधिकारी इसका विरोध कर रहे हैं। इनका कहना है कि जब नियुक्ति देना ही थी तो दो साल पहले दी जानी थी, लेकिन अब चुनाव का समय नजदीक है, ऐसे में केवल नाम के लिए नियुक्ति दिए जाने की प्रक्रिया की जा रही है। बताया जा रहा है कि भाजपा कार्यकर्ताओं को पद देने और सरकार व संगठन के बीच समन्वय बनाने प्रदेश के नगरीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है। भाजपा नेतृत्व ने संभावित नामों की सूची बनाने का जिम्मा जिला प्रभारियों को सौंपा था। प्रदेश के सभी जिला प्रभारियों ने जिलों का दौरा कर एल्डरमैन के लिए संभावित नामों की लिस्ट संगठन को सौंप दी है। जल्द ही एल्डरमैन की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
स्थानीय नेताओं को किया जाएगा उपकृत
दरअसल भाजपा संगठन और सरकार के बीच हुए समन्वय में यह बात भी स्पष्ट हुई है कि इन नियुक्तियों के माध्यम से भाजपा के स्थानीय नेताओं को उपकृत किया जाएगा, खासकर ऐसे नेताओं को जो संगठन में लगातार सक्रिय रहे हैं, लेकिन प्रदेश कार्यकारिणी और जिला कार्यकारिणी में जगह नहीं पा सके हैं। ऐसे सक्रिय कार्यकर्ताओं को एल्डरमैन का पद देकर जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। भाजपा इस प्रक्रिया को एक राजनीतिक रणनीति के रूप में देख रही है। संगठनात्मक नियुक्तियों में स्थान नहीं मिलने से कार्यकर्ताओं में अंदरूनी नाराजगी को दूर किया जा सके। राजनीतिक रूप से इन नियुक्तियों को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी से भी जोडकऱ देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि जमीनी स्तर पर सक्रिय हर कार्यकर्ता को संगठन या निकाय स्तर पर भूमिका मिले, जिससे चुनाव के समय मजबूत नेटवर्क तैयार रहे। कुल मिलाकर एल्डरमैन नियुक्तियां भाजपा के लिए केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संगठनात्मक संतुलन, कार्यकर्ता संतुष्टि और चुनावी तैयारी का अहम राजनीतिक कदम मानी जा रही हैं। प्रदेश संगठन ने एल्डरमैन नियुक्ति के लिए स्थानीय संगठन से नाम मांगे हैं। विधायकों ने अपने स्तर पर 3-3 तो किसी ने 4 नाम आगे बढ़ाए हैं। सांसद के साथ ही संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने भी अपने समर्थकों के नाम आगे बढ़ाए हैं। कुछ नाम प्रदेश स्तर पर भेजे जा चुके हैं, लेकिन संगठन अभी मौन है। 12 एल्डरमैन बनाए जाना है, जिसके लिए 50 से ज्यादा नाम हैं।
समन्वय से बनाई गई सूची
सूत्र बताते हैं कि इस बार सूची तैयार करने में स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद को प्राथमिकता दी गई है। जिन जिलों में संगठनात्मक विवाद रहे हैं, वहां विशेष सावधानी बरती गई है, ताकि नियुक्तियां संतुलित और स्वीकार्य बन सकें। नियुक्तियों की दृष्टि से प्रदेश के बड़े नगर निगमों पर खास ध्यान दिया जा रहा है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े नगर निगमों में 12-12 एल्डरमैन नियुक्त किए जाएंगे। वहीं मुरैना, सिंगरौली, रीवा, सतना, छिंदवाड़ा, उज्जैन, सागर, बुरहानपुर, खंडवा, देवास, रतलाम और कटनी नगर निगमों में 8-8 एल्डरमैन नियुक्त किए जाने का प्रावधान है। इसके अलावा प्रदेश की लगभग 99 नगर पालिकाओं में से करीब 70 नगर पालिकाओं में 6-6 एल्डरमैन नियुक्त किए जाने हैं, जबकि 264 नगर परिषदों में से लगभग 180 परिषदों में 4-4 एल्डरमैन नियुक्त करने की तैयारी चल रही है। जनसंख्या के आधार पर भी संख्या तय की जाती है। दस लाख से अधिक आबादी वाले नगर निगमों में अधिकतम 12 एल्डरमैन नियुक्त किए जा सकते हैं। भाजपा संगठन के अनुसार नियुक्ति से पहले संभाग स्तर पर बैठकों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें संभाग प्रभारी, जिला प्रभारी और जिला अध्यक्ष संभावित नामों पर चर्चा करेंगे। इसके बाद सूची प्रदेश अध्यक्ष की मंजूरी के लिए भेजी जाएगी। अंतिम स्वीकृति के बाद ही नामों की औपचारिक घोषणा होगी।
