टॉय ट्रेन बनकर रह गई राजधानी की मेट्रो

  • भोपाल मेट्रो को उम्मीद से कम मिल रहे यात्री

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में करीब एक महीने पहले जोर- शोर और दावों के साथ शुरू हुई भोपाल मेट्रो अपने शुरूआती जोश को खोती नजर आ रही है। सुभाष नगर से एम्स तक करीबन 6. 5 किमी रन करने वाली भोपाल मेट्रो, अब कमर्शियल पैसेंजर ट्रेन की बजाय टॉय ट्रेन बनकर रह गई है। शनिवार- रविवार या अवकाश के दिन केवल वही लोग आ रहे हैं, जिनको मेट्रो ट्रेन देखना हो। दूसरी ओर नियमित रूप से आवाजाही करने वाले यात्री भी अब इसके उपयोग से परहेज कर रहे हैं। क्योंकि यह उनके लिए किसी भी स्तर पर उपयोगी नहीं है। बता दें कि भोपाल मेट्रो का उद्घाटन पिछले 20 दिसंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्टर ने किया था। इसके अगले दिन यानी, 21 दिसंबर से कमर्शियल रन शुरू किया गया। इस दिन से आम लोग मेट्रो में सफर करने लगे। मेट्रो ट्रेन के चलते हुए मगंलवार को 30 दिन बीत गए, अब यात्री घट गए। शुरुआत में जिस संख्या में मेट्रो को यात्री मिले, वह अब एक चौथाई भी नहीं रही। पहले दिन 21 दिसंबर को यात्री संख्या सबसे ज्यादा 6568 थी, जबकि 20 जनवरी की शाम तक मेट्रो में औसतन 1290 यात्री ही मिले है। आलाम ये रहा कि 8 जनवरी को मेट्रो में केवल 396 यात्री मिले। देखा जाए, तो 5 जनवरी से 9 जनवरी तक रोज 400 से 700 यात्री ही मिल पाएं। भोपाल में मेट्रो के कमर्शियन रन को 1 महीना पूरा हो गया है। 20 दिसंबर को ष्टरू डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्टर ने मेट्रो का उद्घाटन किया था। अगले दिन 21 दिसंबर से आम लोगों के लिए मेट्रो दौड़ने लगी थी, लेकिन जिस उत्साह से मेट्रो शुरू की गई, नतीजे वैसे नहीं रहे। पैसेंजर नहीं मिलने से 14 दिन में ही न सिर्फ टाइमिंग बदल दी गई, बल्कि ट्रिप भी घटाई। दूसरी ओर, इसकी रफ्तार को लेकर भी सवाल उठे हैं। हालांकि, एक अच्छी बात फेयर कलेक्शन सिस्टम इंस्ट्रॉल करना है। सभी 8 स्टेशन पर सिस्टम लगने शुरू हो गए हैं। एक महीने के अंदर भोपाल मेट्रो ने कई उतार-चढ़ाव देखें। तमाम प्रयास के बावजूद मेट्रो को पैसेंजर नहीं मिल रहे हैं। स्थिति यह है कि दिन में 13 ट्रिप लगाने के बावजूद 300 यात्री भी नहीं बैठ पा रहे। यानी, 3 कोच की एक मेट्रो में प्रति ट्रिप एवरेज 30 यात्री ही बैठ रहे हैं। इतनी कम संख्या का अनुमान मेट्रो कॉरपोरेशन के अफसरों को भी नहीं था। हालांकि, आने वाले दिनों में यह संख्या बढऩे की उम्मीद भी है। अफसरों का कहना है कि भविष्य में पास सुविधा भी शुरू हो जाएगी। इसलिए डेली अप-डाउनर्स को फायदा मिलेगा। इसके अलावा, स्टूडेंट्स और बुजुर्गों के लिए भी टिकट में छूट दी जा सकती है।
8 लाख रुपए प्रतिदिन का संचालन खर्चा
जानकारी के अनुसार भोपाल में मेट्रो के संचालन पर रोज 8 लाख रुपए हो रहा है। 21 दिसंबर से 20 जनवरी मेट्रो पर संचालन पर करीबन 2.5 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं, लेकिन उस हिसाब से यात्री नहीं मिल पा रहे हैं। यात्री कम होने से मेट्रो प्रबंधन ने ट्रेन के फेरे भी कम कर दिए हैं। पहले दिन जहां दोनों दिशाओं में 17 फेरे चल रहे थे, वही अब दोपहर 12 से शाम 7 बजे तक कुल 13 ट्रिप कर दिया गया है। प्रत्येक ट्रेन के संचालन में 75 मिनट का अंतराल कर दिया गया है। इससे यात्री भी घटकर औसतन रोज 1 हजार के आसपास रह गए। इससे आय घटकर 39 हजार रुपए रह गई है। इनमें से सर्वाधिक टिकट एम्स से सुभाष नगर डिपो तक सीधी सफर करने वाले यात्रियों की है। यात्रियों के आवागमन आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन पर यात्रियों का आवागमन अन्य स्टेशनों की तुलना में अधिक दर्ज किया गया है।
क्या बोले एमपी मेट्रो रेल डीजीएम
एमपी मेट्रो रेल कार्पोरेशन के डीजीएम सोशल अरविंद सोनी ने बताया कि मेट्रो का संचालन सफलतापूर्वक जारी है। ये सही है कि यात्री संख्या कुछ कम हो गई है, लेकिन आने वाले समय में जोकि धीरे-धीरे बढ़ेगी। खासकर शनिवार-रविवार या अन्य अवकाश के दिन भोपाल के रहवासी मेट्रो का आनंद ले रहे हैं। फिलहाल मेट्रो में यात्री संख्या बढ़ाने के लिए कोई डिस्काउंट योजना नहीं है।
14 दिन में ही घटाई ट्रिप, इसके बाद भी कम हो गई संख्या
इंदौर में 31 मई 2025 को मेट्रो के कमर्शियल रन की शुरुआत की गई थी। यहां पहले ही दिन करीब 26 हजार पैसेंजर मेट्रो में सवार हुए थे। हालांकि, शुरुआती 7 दिन तक इंदौर में मेट्रो में सफर करना फ्री में था, लेकिन भोपाल में ऐसा नहीं किया गया। पहले दिन से ही लोगों को टिकट खरीदना पड़ी। बावजूद पहले दिन कुल 6568 पैसेंजर सवार हुए थे और मेट्रो को टिकट के बदले 2 लाख 5 हजार 350 रुपए मिले थे। इसके बाद पैसेंजर की संख्या घटती गई। 22, 23 ओर 28 दिसंबर को पैसेंजर 2 हजार से ज्यादा थी। वहीं, 25 दिसंबर को क्रिसमस की छुट्टी होने से 4264 लोगों ने मेट्रो में सवार किया था। 30 दिसंबर को सबसे कम 967 पैसेंजर मेट्रो में बैठे थे। नए साल के पहले दिन 2023 और दूसरे दिन 1065 यात्रियों ने सफर किया। यात्रियों की कम संख्या की वजह से ही मेट्रो के समय और ट्रिप दोनों में बदलाव कर दिया गया।

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