- नीति आयोग की फिस्कल हेल्थ इंडेक्स रिपोर्ट में खुलासा

गौरव चौहान
नीति आयोग की फिस्कल हेल्थ इंडेक्स रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय स्थिति ठीक न होने के कारण मप्र की रैंकिंग में गिरावट आई है। रिपोर्ट के अनुसार मप्र की औसत रैंकिंग एक अंक गिरकर नौवें से 10वें क्रम पर आ गई है। राज्य का स्कोर 37.8 है। सबसे अच्छी स्थिति में 73.1 अंक के साथ ओडिशा है। इसके बाद क्रमश: गोवा और झारखंड हैं, जबकि सबसे खराब स्थिति में पंजाब 18वें पायदान पर है। हालांकि, नीति आयोग ने मध्य प्रदेश को अभी भी अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों की श्रेणी में बरकरार रखा है। दूसरी ओर खर्च की गुणवत्ता के मामले में मप्र अच्छी स्थिति में है। इसमें प्रदेश सबसे अच्छी स्थिति वाले राज्यों में 60.8 अंक के साथ तीसरे नंबर पर है। इसका मतलब यह है कि राज्य सरकार पैसा पूंजीगत क्षेत्र और विकासात्मक गतिविधियों में खर्च कर रही है।
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार पर पांच लाख करोड़ रुपये का कर्ज है, जबकि राज्य का वर्ष 2026-27 का कुल बजट 4.38 लाख करोड़ रुपये है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, ऋण स्थिरता (डेब्ट सस्टेनेबिलिटी) ने मप्र की वित्तीय सेहत बिगाड़ दी है। नीति आयोग द्वारा जारी वित्तीय वर्ष 2023-24 की फिस्कल हेल्थ इंडेक्स (एफएचआई) रिपोर्ट के अनुसार यह स्कोर 2.2 है जो देश के 18 बड़े राज्यों में सबसे कम है। इसका मतलब यह है कि राज्य की अर्थव्यवस्था की वृद्धि और ब्याज भुगतान के बीच अंतर बहुत कम है। इससे कर्ज को संभालना मुश्किल हो सकता है। ऋण स्थिरता सूचकांक में अंक जितने अच्छे रहते हैं, उसमें यह माना जाता है कि कर्ज चुकाना राज्य के लिए उतना ही आसान है। वित्तीय स्वास्थ्य सूचकांक नीति आयोग द्वारा तैयार किया जाने वाला राज्यों का एक आर्थिक प्रगति पत्रक है। यह पांच पैमानों पर मापता है कि कौन सा राज्य अपनी कमाई, खर्च और कर्ज का प्रबंधन कितने बेहतर तरीके से कर रहा है। वहीं ऋण स्थिरता किसी राज्य द्वारा लिए गए कर्ज को बिना किसी आर्थिक संकट के आसानी से चुकाने की क्षमता। मध्य प्रदेश इसी मामले में पिछड़ गया है। जबकि पूंजीगत व्यय सरकार का वह पैसा जो लंबे समय तक काम आने वाली संपक्षियों जैसे नई सडक़ें अस्पताल या स्कूल को बनाने में खर्च होता है। मध्य प्रदेश इस अच्छे खर्च में देश में तीसरे नंबर पर है।
विकासात्मक कार्यों पर अधिक खर्च
रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार के सामने बड़ी चुनौती यह है की विकासात्मक कार्यों पर खर्च तो अधिक हो रहा है, लेकिन प्रतिबद्ध (कमिटेड) खर्च जैसे वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान आदि राजस्व आय की तुलना में अधिक होने के कारण वित्तीय स्थिति को अच्छा नहीं माना जा रहा है। रिपोर्ट में मध्य प्रदेश को परफॉर्मर की श्रेणी में रखा गया है। बता दें कि यह लगातार दूसरा वर्ष है जब नीति आयोग ने एफएचआई जारी किया है। साल 2025 में जारी वित्तीय वर्ष 2022-23 की रिपोर्ट में मध्य प्रदेश 42 अंकों के साथ नौवें पायदान पर था, इस बार रैंकिंग में एक अंक गिरकर दसवें नंबर पर आ गया है। रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश सरकार कर्ज लेकर उसे लुटा नहीं रही है। खर्च की गुणवत्ता के मामले में मध्य प्रदेश 60.8 अंकों के साथ ओडिशा और झारखंड के बाद देश में तीसरे स्थान पर है। इसका सीधा मतलब है कि राज्य सरकार अपना एक बड़ा हिस्सा सड़कों, पुलों, अस्पतालों व बुनियादी ढांचे जैसे पूंजीगत विकास कार्यों पर खर्च कर रही है।
इन आधारों पर तैयार होती है रिपोर्ट
फिस्कल हेल्थ इंडेक्स एक समग्र सूचकांक है जो राज्यों की वित्तीय स्थिति और प्रदर्शन का पांच प्रमुख संकेतकों के आधार पर मूल्यांकन करता है। पहला है व्यय की गुणवत्ता। दूसरा, राजस्व संकलन (रेवेन्यू मोबिलाइजेशन) यानी राज्य अपनी आय कर और गैर-कर स्रोतों से कितनी अच्छी तरह जुटा पा रहा है और केंद्र पर उसकी निर्भरता कितनी है। राजकोषीय अनुशासन बताता है कि वित्त का प्रबंधन कैसा है, जैसे राजकोषीय और राजस्व घाटा। ऋण सूचकांक यह राज्य के कुल कर्ज के स्तर और उसकी अर्थव्यवस्था के मुकाबले उसकी स्थिति का आकलन करता है। ऋण स्थिरता यानी राज्य लंबे समय तक अपने कर्ज का भुगतान और सेवा बिना वित्तीय संकट के कर सकता है या नहीं। रिपोर्ट एक कड़वा सच सामने लाती है। सरकार विकासात्मक कार्य तो कर रही है, लेकिन वेतन, पेंशन और पुराने कर्जा के ब्याज भुगतान जैसे अनिवार्य खर्चों में ही उसकी आय का एक बहुत बड़ा हिस्सा चला जाता है। राजस्व की कमाई के मुकाबले इन प्रतिबद्ध खचर्चों की अधिकता राज्य की वित्तीय सेहत को कमजोर कर रही है।
यह विकास के लिए पूंजीगत व्यय सर्वोच्च प्राथमिकता: देवड़ा
रिपोर्ट को लेकर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि दूसरी वार्षिक रिपोर्ट में मध्य प्रदेश के राजस्व प्रदर्शन का सकारात्मक आकलन राज्य की वित्तीय अनुशासन और विकासोन्मुख नीतियों का प्रमाण है। प्रदेश की राजकोषीय स्थिति में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय सुधार किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश ने वर्ष 2021-22 से लगातार राजस्व अधिशेष बनाए रखा है, जो मजबूत कर-संग्रह और राज्य के अपने राजस्व स्रोतों में वृद्धि का परिणाम है। इसके अनुसार राज्य की राजस्व प्राप्तियां सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ी हैं। यह वृद्धि मुख्य रूप से जीएसटी, आबकारी और व्यापार करों की प्रभावी वसूली के कारण संभव हुई है। सरकार विकास को गति देने के लिए पूंजीगत व्यय को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अधोसंरचनात्मक विकास के लिए पूंजीगत व्यय एक लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है, जो एक नया कीर्तिमान होगा।
