भाजपा-कांग्रेस में 30 लाख नाम हटने की संभावना से बढ़ी टेंशन

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  • एसआईआर: भाजपा ने मंत्रियों को गृह जिलों पर फोकस करने को कहा

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में प्रमुख राजनैतिक दल भाजपा और कांग्रेस भले ही अपनी मजबूत स्थिति होने का दावा करें, लेकिन हकीकत यह है कि एसआईआर में तक रीबन 30 लाख वोट कटने की संभावनाओं ने इन दोनों दलों की धडक़नें बढ़ा दी हैं। आलम यह है कि सरकार चला रही भाजपा ने अपने मंत्रियों को अपने गृह जिलों पर फोकस करने को कहा गया है तो कांग्रेस बीएलओ की शिकायतें लेकर आयोग के चक्कर लगा रही है। पिछले एक सप्ताह से भाजपा और कांग्रेस के रणनीतिकारों की नींद उड़ी हुई है, क्योंकि एसआईआर में लगभग 30 लाख मतदाताओं के नाम कटने की बात सामने आई है। सुनवाई के दौरान काफी नाम जोड़े गए हैं। ये सुनवाई 14 फरवरी तक चलेगी। भाजपा और कांग्रेस की कोशिशें हैं कि बाकी दिनों में उनके समर्थक मतदाताओं के नाम नहीं कटे। इसके लिए जहां भाजपा ने अपने मंत्रियों और विधायकों को मैदान पर उतार दिया है, तो वहीं कांग्रेस ने भी अपने बीएलओ 2 के जरिए नाम जोडऩे और काटे जाने पर पैनी नजर रखनी शुरु कर दी है। इधर दोनों दलों के लिए एसआईआर के बाद जी राम जी योजना भी बड़ा टास्क बन गया है। इसे लेकर जिस तरह से कांग्रेस भाजपा पर महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने पर सवाल खड़ा कर रही है, तो यहीं भाजपा कांग्रेस को राम विरोधी बताने का बताने का प्रयास कर रही है। कहा जा रहा है कि भाजपा ने अपने मंत्रियों से कहा है कि वे गणतंत्र दिवस पर जी राम जी को लेकर जनता तक संदेश पहुंचाए कि कांग्रेस इस मामले पर भ्रामक प्रचार कर रही है। इधर कांग्रेस मनरेगा बचाओ अभियान के जरिए लोगों को यह बताने की कोशिश कर रही है कि भाजपा ने मनरेगा के हितग्राहियों से जीविका छीनने की कोशिश की है। वह गरीबों की हितेषी नहीं है।
मंत्रियों को भेजा गृह जिलों में
भाजपा से जुड़े सूत्रों की मानें तो पार्टी की एक रणनीति के तहत कुछ मंत्रियों के गणतंत्र दिवस के ध्वाजारोहण समारोह के लिए जिले बदले जाए है। इनमें जहां कुंवर विजय शाह को उनके गृह जिले खंडवा, उदय प्रताप सिंह को नरसिंहपुर, एंदल सिंह कंसना को उनकी ही जिले मुरैना, वेतन्य काश्यप को रतलाम धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी को दमोह, राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी को सतना और राधा सिंह को अपने ही गृह जिले सिंगरौली में ध्वाजारोहण के लिए बतौर मुख्य अतिथि नामांकित किया गया है। जानकारों का कहना है कि इस रणनीति के पीछे भी एसआईआर प्रक्रिया है। जहां अपने गृह जिले में व्याजारोहण कटने के उपरांत मंत्री कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर एसआईआर को लेकर मंथन करेंगे, जिससे समर्थकों के नाम ज्यादा से ज्यादा जोड़े जा सके।
आधा जिलों में कार्यकारणी नहीं
भाजपा में भी अंदरुनी तौर पर नेताओं के बीच आपसी खींचतान मबी हुई है। जिसका परिणाम यह रहा कि जिलों की कार्यकारणी बनाने में बरिष्ठ नेताओं को पसीना आ गया। अभी भी भोपाल, नरसिंहपुर, सिवनी सहित आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में नेताओं के वर्चस्व की लड़ाई की वजह से जिलों की कार्यकारणी गठित नहीं हो सकी है जिससे वहां भी एसआईआर पर संगठन की नजर रखने का काम प्रभावित हो रहा है।
कांग्रेस के दावे पर प्रभारी भी संतुष्ट नहीं
उल्लेखनीय है कि प्रदेश कांग्रेस ने पिछले दिनों दावा किया था कि राज्य भर में उनके लगभग 65 हजार बीएलओ है, जो पूरी एसआईआर प्रक्रिया पर नजर रखें हुए हैं, लेकिन उनके इस दावे पर राज्य के प्रभारी हरीश चौधरी ने स्वयं यह कहते हुए प्रश्न चिन्ह लगा दिया था कि यदि सभी बीएलओं को बुलाएंगे, तो क्या वे आ सकते है। जानकारों का कहना है कि कांग्रेस प्रभारी स्वयं संतुष्ट नहीं है कि उनके कार्यकर्ता एसआईआर में काटे जा रहे नामों को रोक पाएंगे।

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