मजबूत सडकें… मजबूत प्रदेश

मजबूत सडकें…
  • विकास की लेन पर मप्र सबसे आगे

सडक़ें विकास का प्रतीक होती हैं। इसको मद्देनजर रखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का फोकस सडक़ों के विकास पर रहा है। उनका मंत्र है-मजबूत सडक़ें…तेज कनेक्टिविटी…नया निवेश और अधिक रोजगार। इसका परिणाम यह हुआ है कि विकास की लेन पर मप्र सबसे आगे है।

गौरव चौहान/बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)।
2047 तक भारत को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मप्र महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। मप्र ने यह सिद्ध कर दिया है कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण सिर्फ स्वप्न नहीं, एक संकल्प है और इस संकल्प को पूरा करने के लिए पूरा देश एकजुट और एकमत होकर काम कर रहा है। देश के समग्र विकास के इस महायज्ञ में सबसे बड़ी आहुति मप्र की ही होगी। इसी के मद्देनजर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का फोकस सडक़ों के विकास पर है। आम नागरिकों को बेहतर, सुरक्षित और सुविधाजनक सडक़ अवसंरचना उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। वर्तमान में मप्र में 61 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं क्रियान्वयन में हैं। प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 9,300 किलोमीटर से अधिक है, जो राज्य की आर्थिक प्रगति, औद्योगिक विकास, पर्यटन विस्तार और सुरक्षित यातायात व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। प्रदेशवासियों को सुगम और सुरक्षित यातायात उपलब्ध कराना राज्य शासन की प्राथमिकता है। सुगम मार्ग उपलब्ध कराने की पहली इकाई होने से लोक निर्माण विभाग का लक्ष्य मप्र को सडक़ों के निर्माण में आत्म-निर्भर बनाना और सडक़ दुर्घटनाओं की रोकथाम करना है। इस उद्देश्य से मप्र में गत वर्ष विशेष प्रयास किए गए हैं। प्रदेश से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग और मुख्य मार्गों में ब्लॉक स्पॉट को एक वर्ष में समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। सडक़ दुर्घटनाओं को चिन्हित करने और नियंत्रित करने में लोक निर्माण विभाग द्वारा शार्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों प्रयोग किए जा रहे हैं। सडक़ों का चौड़ीकरण, ज्योमैट्रिक विजन साइन बोर्ड का निर्माण नागरिकों को सुरक्षित यातायात उपलब्ध कराने में सहायक होगा।
गतदिनों केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने विदिशा में 4400 करोड़ रुपये की लागत वाली 8 राष्ट्रीय सडक़ परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं की लंबाई 181 किलोमीटर है, जो मध्य भारत एवं बुंदेलखंड क्षेत्र की सडक़ कनेक्टिविटी को मजबूती प्रदान करेंगी और प्रदेश के सडक़ एवं परिवहन अवसंरचना विकास की दिशा में एक ओर ऐतिहासिक अध्याय जुड़ा है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से भोपाल-विदिशा-सागर-राहतगढ़-ब्यावरा सहित प्रमुख औद्योगिक, कृषि एवं पर्यटन मार्गों पर यातायात सुगम होगा। ये केंद्र सडक़ दुर्घटनाओं में कमी लाने, सुरक्षित ड्राइविंग व्यवहार विकसित करने तथा युवाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। भोपाल-विदिशा खंड, विदिशा-ग्यारसपुर खंड, ग्यारसपुर-राहतगढ़ खंड के 4 लेन चौड़ीकरण से कनेक्टिविटी मजबूत और लॉजिस्टिक गतिविधियाँ सशक्त होंगी। सागर वेस्टर्न बॉयपास (ग्रीनफील्ड) 4 लेन निर्माण से शहरी ट्रैफिक दबाव कम होगा, यात्रा समय में कमी आएगी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ेगी। इस अवसर पर केंद्रीय सडक़ परिवहन मंत्री गडकरी ने कई महत्वपूर्ण सडक़ परियोजनाएं देने की घोषणा करते हुए कहा कि 16 हजार करोड़ रुपए लागत का सागर-विदिशा-कोटा तक नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे बनाया जाएगा। इससे सागर से कोटा के बीच की दूरी 75 किमी तक कम हो जाएगी। नसरुल्लागंज (भैरूंदा)-बुधनी रोड को 4 लेन राष्ट्रीय राजमार्ग के रूप में विकसित किया जाएगा। मध्यप्रदेश में अलग-अलग 50 सडक़ों के निर्माण के लिए 4500 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त भी जरूरत के अनुसार और भी राशि मंजूर की जाएगी। विदिशा में 4 हजार करोड़ रुपए लागत से उत्तरी बायपास बनाया जाएगा। 40 हजार करोड़ रुपए की लागत से ग्वालियर-भोपाल-नागपुर को जल्द मंजूरी मिलेगी, जो आगे जाकर हैदराबाद को भी कनेक्ट करेगा। सिंहस्थ के लिए उज्जैन-झालावाड़ 2500 करोड़ रुपए की लागत से हाईवे सहित अन्य रोड भी बनाए जाएंगे। सीआरएफ योजना में मध्यप्रदेश को सडक़ विकास कार्यों के लिए 1600 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। इसमें से 400 करोड़ रुपए विदिशा लोकसभा संसदीय क्षेत्र के लिए होंगे। प्रदेश को 5 ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर की सौगात मिली है। 20 अन्य ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर्स के प्रस्तावों को भी जल्द ही मंजूरी देंगे। अटल एक्सप्रेस-वे से जुड़े सभी विकास कार्यों को भी मंजूरी देंगे। गोपालपुर से भैरुंदा तक सडक़ मार्ग को भूमि अधिग्रहण के बाद व्हाइट टॉपिंग क्रॉन्क्रीट से निर्मित किया जाएगा।

बनेंगी 1 लाख किमी लंबाई की सडक़ें
मप्र में अधोसंरचनात्मक विकास पर जोर दिया जा रहा है। इसमें भी सडक़ निर्माण पर सबसे ज्यादा फोकस है। प्रदेश में जहां भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एनएचएआई, कई एक्सप्रेस वे, हाईवे बना रही है वहीं राज्य का लोक निर्माण विभाग यानि पीडब्लूडी भी उच्च स्तर की सडक़ें बनवा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी रोड निर्माण को अपनी प्राथमिकता में शामिल किया है। राज्य सरकार के दो साल पूरा होने के मौके पर उन्होंने अपनी उपलब्धियां गिनाईं तो अधोसंरनात्मक विकास का प्रमुखता से उल्लेख किया। सीएम मोहन यादव ने बताया कि अगले 5 सालों में प्रदेश में 1 लाख किमी लंबाई की सडक़ें बनाने का लक्ष्य है। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण के साथ 1 लाख करोड़ के करार का भी उल्लेख किया। सीएम मोहन यादव ने राज्य में बस, ट्रेन, मेट्रो और हवाई सेवाओं में विस्तार की बात बताई। उन्होंने कहा कि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन एवं सागर में प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत 550 से अधिक शहरी ई-बसों का संचालन होगा। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा प्रारम्भ करने की भी बात कही। मुख्यमंत्री ग्राम सडक़ योजना अंतर्गत प्रदेश के 8565 गांव 19378 किलोमीटर लंबी सडक़ों से जोड़े गए हैं। अप्रैल 2025 में केंद्र सरकार द्वारा मध्यप्रदेश की 4 महत्वपूर्ण सडक़ परियोजनाओं को स्वीकृत किया गया। इनपर 4300 करोड़ रुपए खर्च होंगे। उज्जैन-जावरा के बीच 4-लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे निर्माण के लिए 5017 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। भिण्ड चंबल संभाग के तीनों जिलो के लिए क्रांतिकारी माने जा रहे अटल प्रोग्रेस-वे के निर्माण पर 26 माह से बंद प्रक्रिया फिर से शुरू होगी। राज्य सरकार ने फिर से कवायद तेज करने के निर्देश जारी किए तो जिले के की उम्मीदें जाग उठीं। तीन राज्यों और पांच जिलों को सीधे प्रभावित करने वाले अटल प्रोग्रेस-वे की एनएचएआई स्तर पर निरंतर प्रक्रिया चल रही है। यही वजह है कि 11500 करोड़ रुपए का यह प्रस्ताव अब 23 हजार 700 करोड़ तक पहुंच गया है। इस मार्ग के बन जाने से कोटा के लिए सडक मार्ग से 10-11 घंटे की यात्रा छह से सात घंटे रह जाएगी। उत्तरप्रदेश में इटावा जिले के ननावा से शुरू होने वाला अटल प्रोग्रेस-वे मप्र में भिण्ड, मुरैना और श्योपुर होकर राजस्थान के कोटा जिले में सीमाल्या पर जुड़ेगा। सर्वाधिक करीब 168 किलोमीटर मुरैना जिले में और सबसे कम करीब 22 किलोमीटर का हिस्सा राजस्थान के खाते में आएगा। अटल प्रोग्रेस-वे को लेकर किसानों के तीखे विरोध के चलते अक्टूबर 2023 में तब के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने यह प्रक्रिया स्थगित कर दी थी। वर्ष 2017 से चंबल एक्सप्रेस के नाम से यह कवायद चल रही थी। वर्ष 2021 में भारत माला परियोजना में इसे शामिल करके नाम बदलकर अटल प्रगति पथ कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने दो दिन पहले भोपाल में हुई बैठक के बाद इसे फिर से शुरू करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं।

4 साल में 6 नए आर्थिक कॉरिडोर
मध्यप्रदेश में जल्द ही 6 नए आर्थिक कॉरिडोर पर काम शुरू होने जा रहा है। इनकी कुल लंबाई 3368 किमी होगी और इन पर लगभग 36,483 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इन कॉरिडोर में नर्मदा प्रगतिपथ, विंध्य एक्सप्रेसवे, मालवा-निमाड़ विकासपथ, अटल प्रगतिपथ, बुंदेलखंड विकास पथ और मध्यभारत विकास पथ शामिल हैं। इनमें से दो भोपाल से और दो इसके आस-पास से गुजरेंगे। इनका फाइनल ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग, एनएचएआई और मप्र सडक़ विकास निगम मिलकर करेंगे। फाइनल प्लान के मुताबिक, इन कॉरिडोर के माध्यम से प्रदेश को लगभग बराबर 8 हिस्सों में बांटा जाएगा। इससे प्रदेश के करीब 55 जिले प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इनसे जुड़ जाएंगे। सभी कॉरिडोर को वर्ष 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। इनमें अटल प्रगतिपथ सबसे छोटा (299 किमी) और सबसे महंगा (12,227 करोड़ रुपए) होगा। वहीं, बुंदेलखंड विकास पथ और मालवा-निमाड़ विकासपथ को सबसे पहले, दिसंबर 2026 तक पूरा किया जाएगा। विंध्य एक्सप्रेसवे को सबसे आखिर में, दिसंबर 2029 तक पूरा करने की योजना है। जानकारी के अनुसार, बुंदेलखंड और मालवा-निमाड़ विकासपथ सबसे पहले बनकर तैयार होंगे। विंध्य एक्सप्रेस वे की लागत 3809 करोड़ रूपए है। यह दिसंबर 2029 तक बनेगा। इसके जरिए भोपाल सीधे सिंगरौली से जुड़ जाएगा। रास्ते में 10 जिले आएंगे। इनमें भोपाल, सागर, दमोह, कटनी, रीवा आदि शामिल हैं। वहीं मालवा-निमाड़ विकास पथ की लागत 7972 करोड़ रूपए है। यह दिसंबर 2026 तक बनेगा। इसमें मंदसौर, उज्जैन, इंदौर, खंडवा और बुरहानपुर जुड़ेंगे। गरोठ-उज्जैन 136 किमी व इंदौर-बुरहानपुर 215 किमी पर काम जारी है। अटल प्रगतिपथ की लागत 12,227 करोड़ रूपए है। यहदिसंबर 2027 तक बनेगा। पश्चिम में दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से शुरू होकर बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। श्योपुर, मुरैना, भिंड इसके प्रमुख जिले होंगे। 3357 करोड़ की लागत वाला बुंदेलखंड प्रगतिपथ दिसंबर 2026 तक पूरा होगा। 5 जिले भोपाल, रायसेन, विदिशा, सागर और छतरपुर को फायदा होगा। इसके जरिए भोपाल से छतरपुर सीधे जुड़ जाएगा।3819 करोड़ का मध्यभारत विकास पथ दिसंबर 2028 तक पूरा होगा। इसके जरिए भीमबैठिका, भोजपुर, सांची, उदयगिरी, चंदेरी, ओरछा और दतिया जैसे पर्यटन क्षेत्र जुड़ेंगे। यह कॉरिडोर मुरैना से बैतूल को सीधे जोड़ेगा। नर्मदा विकास पथ की लागत 5299 करोड़ रूपए है जो दिसंबर 2027 तक बनेगा। यह झाबुआ, धार, इंदौर, देवास, सीहोर, रायसेन, नरसिंहपुर, जबलपुर, डिंडोरी सहित 10 जिलों से गुजरेगा। यह बिलासपुर-रायपुर से शुरू होकर गुजरात तक जाएगा।

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बढ़ाएंगे कनेक्टिविटी
वैसे तो मध्य प्रदेश में सागर एक ऐसा जिला है, जहां से देश का सबसे बड़ा नेशनल हाइवे 44 और कानपुर फोर-टू सिक्स लेन और कई बड़ी सडकें निकली है। अब सागर की रफ्तार को और पंख लगने वाले हैं, क्योंकि पिछले दिनों विदिशा के दौरे पर आए केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सागर संसदीय क्षेत्र के लिए कई सडक़ों की सौगात दी है, क्योंकि अब सागर को ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे के जरिए राजस्थान के कोटा से जोड़ा जा रहा है और दूसरी तरफ सिंरोज और बीना को फोरलेन से जोड़ा जाना प्रस्तावित है। इसके अलावा ग्वालियर-नागपुर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर में सिरोंज के लटेरी और कुरवाई को मिलाया जा रहा है। इसके अलावा बीना में रिंगरोड, बॉयपास की सौगात भी केंद्रीय मंत्री ने दी है। 17 जनवरी को केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मध्य प्रदेश में कई सडक़ परियोजनाओं के साथ सागर संसदीय क्षेत्र के लिए कई सौगातें दी है। सागर संसदीय क्षेत्र में विदिशा जिले की कुरवाई, सिरोंज और शमशाबाद विधानसभाएं आती है। इसके अलावा सागर की बीना, खुरई, सागर, सुरखी और नरयावली विधानसभा क्षेत्र इसका हिस्सा है। विदिशा पहुंचे केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सागर के लिए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे, फोरलेन, रिंगरोड और बॉयपास जैसी सुविधाएं दी है। सागर संसदीय क्षेत्र के सिंरोज की लटेरी और कुरवाई ग्वालियर नागपुर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से जोड़े जाने का एलान किया है। सागर की बात करें, तो नेशनल हाइवे 44 के जरिए वैसे भी सागर देश के चारों कोनों से जुड़ा है। इसके बाद निर्माणाधीन सागर कानपुर फोर-टू सिक्सलेन सागर की रफ्तार में पंख लगाने वाली है। अब 16000 करोड़ की लागत से कोटा विदिशा सागर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे की सौगात केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले दिनों विदिशा दौरे के दौरान दी है। बताया जा रहा है कि इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे सागर और कोटा के बीच की दूरी कम होगी और सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी। इस एक्सप्रेस वे के बनने के बाद सागर और कोटा के बीच की दूरी 75 किमी कम हो जाएगी। फिलहाल ये दूरी करीब 405 किमी है। खास बात ये है कि ये ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे भोपाल-कानपुर, लखनऊ-कानपुर और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे को जोड़ेगा। इतना ही नहीं नितिन गडकरी ने विदिशा के सिरोंज से सागर के बीना तक फोरलेन सडक़ के लिए भी मंजूरी दी है। ये फोरलेन सिंरोज से मेहुला, कुरवाई और बीना होते हुए बनेगी, जो करीब 70 किमी की होगी। इसके साथ ही बीना में लंबे समय से चली आ रही रिंगरोड और बॉयपास की मांग को भी मंजूरी दी गयी है। इससे सफर तेज और आसान होगा। इसके अलावा सागर संसदीय क्षेत्र के सिंरोज के लटेरी और कुरवाई को ग्वालियर नागपुर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से जोड़े जाने का एलान किया गया है। सागर संसदीय क्षेत्र की सांसद लता वानखेड़े ने इन सौगातों पर पीएम नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सागर लोकसभा क्षेत्र को दी गयी सौगातों के लिए मैं क्षेत्र की जनता की तरफ आभार व्यक्त करती हूं। इन सडक़ परियोजनाओं से हमारे क्षेत्र में कनेक्टिविटी सुदृढ़ होगी। रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और आर्थिक प्रगति को एक नई दिशा मिलेगी।

3 लाख करोड़ की सडक़ परियोजनाएं
अगस्त 2025 में केन्द्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 4250 करोड़ से अधिक की लागत वाली 174 किलोमीटर लंबी 9 सडक़ परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इनमें देश का सबसे बड़ा दमोह नाका-रानीताल-मदनमहल-मेडिकल रोड फ्लाय ओवर भी शामिल है। जबलपुर के महानद्दा में आयोजित कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री गडकरी ने मध्यप्रदेश के लिये 60 हजार करोड़ से अधिक लागत की विभिन्न सडक़ परियोजनाओं की घोषणाएं भी की। गडकरी ने कहा कि मध्यप्रदेश के लिए 3 लाख करोड़ रुपए की सडक़ परियोजनाएं स्वीकृत की हैं, जिनमें से 75 हजार करोड़ के कार्य पूरे किए हैं और 65 हजार करोड़ के कार्य प्रगति पर हैं। आगामी समय में डेढ़ लाख करोड़ रुपए लागत से करीब ढाई हजार किलोमीटर के कार्य डीपीआर के लिए रखे हैं। मध्यप्रदेश में 33 हजार करोड़ रुपए की लागत से 5 ग्रीन फील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। इंदौर से हैदराबाद कॉरिडोर पर ओंकारेश्वर के पास नर्मदा नदी पर एक भव्य ब्रिज का निर्माण किया गया है। जल्द ही इसका उद्घाटन किया जाएगा। उज्जैन-गरोठ 4 लेन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे, भोपाल से कानपुर 440 किलोमीटर लंबा 4 लेन इकोनॉमिक कॉरिडोर बनने पर 15 घंटे की यात्रा 8 घंटे में पूरी होगी। आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेस-वे का भूमिपूजन भी जल्द होगा। साढ़े 4 घंटे में ग्वालियर से दिल्ली पहुंचेंगे। दिल्ली से मुंबई के बीच बनाए जा रहे एक्सप्रेस वे में मध्यप्रदेश में 245 किलोमीटर का हिस्सा बनकर पूरा हो गया है। मुंबई में भी कार्य अंतिम चरण में है। केन्द्रीय मंत्री 15 हजार करोड़ रुपए लागत की सडक़ परियोजनाओं की घोषणा की जा रही है। जबलपुर से मंडला और छत्तीसगढ़ सीमा तक 2.5 हजार करोड़ रुपए का 150 किलोमीटर का 6 लेन के चौड़ीकरण का कार्य किया जाएगा, यह कार्य 6 महीने में शुरू होगा। सिवनी-छिंदवाड़ा-सावनेर 4 लेन चौड़ीकरण का कार्य 2.5 हजार करोड़ रुपए लागत से आगामी 6 माह में शुरू किया जाएगा। खरगोन-देशगांव-जुलवानिया मार्ग के 108 किलोमीटर 4 लेन चौड़ीकरण का कार्य 2300 करोड़ रुपए से किया जाएगा तथा महाराष्ट्र सीमा तक बैतूल-परसवाड़ा 2 लेन मार्ग को भी मंजूरी दी गई है। बालाघाट से मंडला के बीच बेहतर संपर्क के लिए सडक़ बनाई जाएगी। मध्य प्रदेश में टाइगर कॉरिडोर बनाया जाएगा। इसके अंतर्गत जबलपुर से बांधवगढ़ तक 4600 करोड़ रुपए की लागत से 4 लेन सडक़ बनाई जानी थी, जिसे बढ़ाकर अब 5500 करोड़ रुपए किया गया है। यह रोड कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना और पेंच टाइगर रिजर्व को कनेक्ट करेगी। इससे मध्यप्रदेश के टूरिज्म, आर्थिक विकास और रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी होगी। प्रदेश में सीआरएफ फंड से 1500 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की घोषणा की गई है। इससे उज्जैन, जबलपुर और रीवा में नए फ्लाई ओवर बनाए जाएंगे। उज्जैन में 510 करोड़ रुपए की लागत से नई सडक़ और फ्लाई ओवर बनेंगे। अशोकनगर से विदिशा के बीच 96 करोड़ रुपए की लागत से सडक़ बनाई जाएगी। उज्जैन में कालभैरव मंदिर की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए ब्रिज बनाया जाएगा। वहीं भोपाल से जबलपुर के बीच 255 किलोमीटर लंबा नया ग्रीन फील्ड हाईवे बनाया जाएगा, जिसकी लागत 15 हजार करोड़ रुपए होगी। इसके लिए डीपीआर दिसंबर तक पूर्ण कर लिया जाएगा। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूर्ण होने पर अप्रैल-मई 2026 से हाईवे निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा। लखनादौन से रायपुर के बीच 220 किलोमीटर लंबा 4 लेन हाईस्पीड कॉरिडोर, 10 हजार करोड़ रुपए की लागत से बनाया जाएगा, यह रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर से कनेक्ट होगा। इस प्रकार मध्यप्रदेश सीधे विशाखापट्टनम बंदरगाह से जुड़ेगा। इंदौर से भोपाल 160 किलोमीटर ग्रीन फील्ड कॉरिडोर को स्वीकृति दी जा रही है। इसकी लागत 12 हजार करोड़ रुपए होगी।
60 हजार करोड़ से ज्यादा लागत की सडक़ विकास परियोजनाओं की घोषणा की गई है। सतना-चित्रकूट 4 लेन, रीवा-सीधी 4 लेन, ग्वालियर-भिंड 4 लेन बनाए जाएंगे। उज्जैन-झालावाड़ मार्ग 2 हजार करोड़ रुपए, बदनावर-टिमरनी मार्ग 2 हजार करोड़ रुपए से विकसित होगा। बमीठा-पन्ना-सतना 4 लेन, खजुराहो और बांघवगड़ राष्ट्रीय उद्यानों को कनेक्ट करेगा। खंडवा-बैतूल 4 लेन 4 हजार करोड़ रुपए, इंदौर 6 लेन पूर्वी बायपास 3.5 हजार करोड़ रुपए, जबलपुर-दमोह 1700 करोड़ रुपए, संदलपुर-नसरुल्लागंज-बुधनी-शाहगंज 3.5 हजार करोड़ रुपए से जून 2027 तक पूरा होगा। जबलपुर-डिंडौरी 4 लेन 200 किलोमीटर मार्ग दिसंबर 2026 तक पूरा होगा। इंदौर से हरदा 4 लेन 3400 करोड़ रुपए, ग्वालियर में पश्चिमी बायपास 1300 करोड़ रुपए, इंदौर में 6 लेन बायपास 3 हजार करोड़ रुपए लागत की परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की जा रही है। मध्यप्रदेश में 2100 करोड़ रुपए की लागत से 7 रोपवे बनाए जा रहे हैं। इसमें उज्जैन स्टेशन से महाकाल मंदिर, जबलपुर में एम्पायर टॉकीज से गुरुद्वारा, जबलपुर में सिविक सेंटर से बड़ाफुआरा भी शामिल हैं। केंद्र सरकार ने वार्षिक पास जारी कर टोल को कम कर दिया है। इसका अच्छा रिस्पांस मिला है। एक साल के 3000 रुपए का पास दिया जा रहा है, जिससे 200 टोल नि:शुल्क क्रास किए जा सकेंगे।

2200 करोड़ में बनेगी फोरलेन सडक़
टू-लेन नर्मदापुरम पिपरिया स्टेट हाईवे को बनखेड़ी तक फोरलेन बनाया जाएगा। सडक़ विकास निगम (एमपीआरडीसी) ने 78 किलो मीटर तक फोरलेन निर्माण के लिए पहले से सर्वे कर रही है। इसकी लागत लगभग 2200 करोड़ रुपए आंकी गई है। अब इसकी लंबाई और बढ़ जाएगी। इसमें कई ब्रिज, पुलिया, बायपास बनाए जाएंगे। इसके भूमि की जरूरत पड़ेगी। इसलिए वर्तमान टू-लेन के दोनों तक तरफ सडक़ किनारे भूमि की पड़ताल की जा रही है। जानकारी के मुताबिक नर्मदापुरम से पिपरिया, बनखेड़ी तक टूलेन सडक़ के दोनों तरफ कहां कितनी सरकारी और निजी भूमि है। इसका आंकलन किया जा रहा है। इसके बाद नियम अनुसार अधिग्रहण की कार्रवाई की जाएगी। प्रस्तावित फोरलेन का स्वरूप वर्तमान टूलेन सडक़ से अलग होगा। इसकी लागत लगभग 2200 करोड़ से बढ़ जाएगी। एमपीआरडीसी की टीम फोरलेन के लिए सर्वे कर रही है। इसमें जितने आंकड़े आते जाएंगे उसे डीपीआर में जोड़ा जाएगा। नर्मदापुरम से बनखेड़ी तक प्रस्तावित फोरलेन में कई जगह नई पुलि या, ब्रिज, टर्निंग और बायपास का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए संभावनाएं तलाश की जा रही है। एमपीआरडीसी के अधिकारी निर्माण के लिए स्थान का चयन कर निर्माण कार्यों की लंबाई, चौड़ाई निकल रहे हैं। नर्मदापुरम से पिपरिया तक टूलेन स्टेट हाईवे को फोरलेन करने के लिए एमपीआरडीसी ने पूर्व में डीपीआर बनाई थी। इसमें 1285 करोड़ की लागत से 78 किलोमीटर की सडक़ निर्माण होना था लेकिन इसे प्रशासकीय स्वीकृति नहीं मिली। इसलिए योजना फाइलों में दबकर रह गई। शहरी क्षेत्र में नर्मदा कॉलेज तिराहा से मालाखेड़ी तिराहा तक स्टेट हाईवे की टू-लेन सडक़ किनारे सरकारी भूमि रिक्त पड़ी हैं लेकिन इस पर अतिक्रमण है। तिराहा, चौराहा पर सडक किनारे अतिक्रमण कर टप, गुमठियां जमा दी गई हैं। एमपीआरडीसी की टीम भूमि के वर्तमान स्थिति की जांच भी कर रही हैं। इसमें कहां कितना अतिक्रमण है। इसे भी देखा जा रहा है। संभागीय महाप्रबंधक एमपीआरडीसी सियाराम अहिरवार का कहना है कि 2200 करोड़ से अधिक में नर्मदापुरम से बनखेड़ी तक फोरलेन का निर्माण होगा। इसके लिए भूमि अधिग्रहण भी करना पड़ेगा। अभी तक सर्वे में सडक़ पर पुल, पुलिया और बायपास आदि चिह्नित किए हैं। डीपीआर का फाइनल होना बाकी है।

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