- भाजपा चुनावी रणनीति में माहिर नेताओं को भेजेगी मोर्चे पर

गौरव चौहान
जब भी किसी राज्य में विधानसभा चुनाव होता है, वहीं मप्र के भाजपा नेता रणनीति बनाने से लेकर चुनाव प्रचार तक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी का परिणाम है कि चुनावी राज्यों में मप्र भाजपा के नेताओं की तैनाती हर मोर्चे पर की जाती है। इस वर्ष देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होंगे, जहां चुनावी रणनीति संभालने के लिए मप्र भाजपा ने नेताओं की सूची तैयार की है। सूत्रों की मानें तो प्रदेश के कई बड़े नेताओं को ऐसे राज्यों की जिम्मेदारी दी जा सकती है, जहां पर गैर भाजपाई सरकार है।
गौरतलब है कि मप्र के नेताओं का दूसरे राज्यों के चुनाव में भी स्ट्राइक रेट हाई रहता है। इसको देखते हुए यहां के नेताओं की मांग अन्य राज्यों में अधिकतर रहती है। इस साल असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव कराए जाने हैं, जिसके लिए अभी से भाजपा के केन्द्रीय संगठन ने अपनी तैयारी प्रारंभ कर दी है। राजनीति के जानकारों का कहना है कि भले ही इन राज्यों में विधानसभा के चुनाव हो रहे हों, लेकिन यहां के परिणाम राष्ट्रीय राजनीति में काफी प्रभाव डाल सकते हैं। भाजपा नए राज्यों में अपनी सत्ता लाने की कोशिश में है, तो विपक्ष और कांग्रेस किसी भी स्थिति में भाजपा को सफल नहीं होने देना चाहती है। असम में जहां भाजपा की सरकार है, तो पुडुचेरी में भाजपा गठबंधन के साथ सरकार चला रही है। पश्चिम बंगाल में भी भाजपा सरकार बनाने के लिए रात दिन मेहनत कर रही है, तो केरल में कांग्रेस को अपनी वापसी की उम्मीद है, जिसे भाजपा रोकना चाहती है।
संगठनात्मक दृष्टि से मप्र बेहतर
जानकारों की मानें तो मप्र संगठनात्मक दृष्टि से बेहतर माना जाता है, ऐसे में यहां के नेताओं को हमेशा ही दूसरे राज्यों के चुनावों की कमान सौंपी जाती है। इस बार भाजपा के लिए सबसे बड़ा पश्चिम बंगाल मना जा रहा है। बताया जा रहा है कि यहां के लिए मध्यप्रदेश के तकरीबन 1 दर्जन से ज्यादा नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इनमें सरकार के मंत्रियों के अलावा सांसद, पूर्व सांसद, विधायक व वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। असम राज्य में भी विधानसभा चुनाव होने है, जहां के लिए मध्यप्रदेश भाजपा से 16 नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन नेताओं को गणतंत्र दिवस के उपरांत दिल्ली बुलाया जाएगा। जहां उन्हें बताया जाएगा कि असम के किन-किन क्षेत्रों में उन्हें अपनी जिम्मेदारी को निभाना है। सूत्रों का कहना है कि असम में जल्द मध्यप्रदेश में सक्रिय एक वरिष्ठ पदाधिकारी को तैनात कर वहां के संगठन की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, जबकि उनके स्थान पर किसी दूसरे राज्य के नेता को मध्यप्रदेश भेजा जा सकता है।
भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि केरल और तमिलनाडु राज्यों में भी भाजपा मध्यप्रदेश के अपने नेताओं को चुनाव रणनीति संभालने के लिए भेजना चाहती है। लेकिन भाषाई दिक्कतों की वजह से अब तक ऐसे नेता चिन्हित नहीं हो सके हैं, जिन्हें इन राज्यों में भेजा जा सके। कहा जा रहा है कि मध्यप्रदेश से राज्यसभा में भेजे गए केन्द्रीय मंत्री जार्ज कुरियन और डॉ. एल. मुरुगन सहित दूसरे नेताओं को इन राज्यों की कमान सौंपी जा सकती है। जानकारी के अनुसार, निगम-मंडल सहित दूसरे सरकारी पदों पर नियुक्ति मिलने के ठीक बाद भाजपा नेताओं को दूसरे राज्यों की चुनावी कमान सौंप दी जाएगी। पद ग्रहण करने के बाद ये नेता राज्यों में चुनाव होने तक भोपाल या मप्र में ज्यादा समय नहीं दे पाएंगे। कहा जा रहा है कि कुछ नेताओं को अभी से संकेत दिए जा चुके है कि उन्हें निगम मंडल का पद ग्रहण करने के तत्काल बाद अपने दायित्व वाले राज्यों में डेरा जमाना होगा।
4 सौ से ज्यादा पूर्णकालिकों की जमावट
जानकारों की मानें तो मध्यप्रदेश में पिछले कई वर्षों से विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 4 सौ से ज्यादा पूर्णकालिकों को इन राज्यों में चुनावी सहयोग के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने संघ से इन पूर्णकालिकों की मांग की है। हालांकि अब तक संघ की ओर से स्वीकृति मिलने की जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन कहा जा रहा है कि फरवरी के अंत तक ये पूर्णकालिक इन राज्यों में अपनी भूमिका निभानी शुरु कर देंगे। भाजपा से जुड़े सूत्रों की मानें तो इस विषय को लेकर फरवरी के प्रथम सप्ताह में नई दिल्ली में भाजपा की एक बड़ी बैठक होगी। जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष के अलावा राष्ट्रीय संगठन महामंत्री सहित दूसरे वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। इस बैठक में ही तय होगा कि मध्य प्रदेश से कौन से नेताओं को चुनावी राज्यों में कमान संभालने के लिए भेजा जाना है।
