आवारा मवेशियों को मिलेगी ‘केसरिया पहचान’

केसरिया पहचान
  • 40 लाख गायों पर लगेगा 12 अंकों का खास टैग

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। सडक़ों और खेतों में बढ़ते आवारा मवेशियों के संकट से निपटने के लिए मध्य प्रदेश सरकार की एक बड़ी योजना को केंद्र सरकार से सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। राज्य सरकार ने करीब 40 लाख आवारा मवेशियों को अलग पहचान देने के लिए उनके कानों में 12 अंकों वाले केसरिया पहचान टैग लगाने का प्रस्ताव दिया था, जिसे केंद्र ने सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया है। इस योजना के तहत मवेशियों के लिए अलग-अलग रंग के टैग लागू किए जाएंगे, जिनमें केसरिया और लाल जैसे रंग शामिल हो सकते हैं। इसका उद्देश्य पालतू और आवारा मवेशियों के बीच स्पष्ट अंतर करना है, ताकि प्रशासनिक टीमें उन्हें जल्दी पहचान सकें और बेहतर तरीके से प्रबंधन कर सकें।
स्कैन से तुरंत पता चलेगा पशु के बारे में: अधिकारियों के अनुसार, रंग-कोड वाले टैग से नगर निगम और मवेशी पकडऩे वाली टीमों को बिना स्कैन किए ही तुरंत यह पता चल सकेगा कि पशु आवारा है या पालतू। इससे मवेशियों के प्रबंधन की प्रक्रिया और तेज और प्रभावी होने की उम्मीद है। यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है जब प्रदेश में आवारा मवेशियों की समस्या सडक़ सुरक्षा और खेती दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। विधानसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार पिछले दो वर्षों में मवेशियों से जुड़े 237 सडक़ हादसे दर्ज हुए, जिनमें 94 लोगों की मौत हुई और 133 लोग घायल हुए। यानी औसतन हर तीसरे दिन प्रदेश में मवेशियों से जुड़े सडक़ हादसे में एक व्यक्ति की जान जा रही है।
अभी लगाए जाते हैं पीले टैग
पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव उमाकांत उमराव ने बताया कि मौजूदा व्यवस्था में सभी मवेशियों को पीले रंग के टैग लगाए जाते हैं, जिससे यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कौन सा पशु किसी किसान का है और कौन सा आवारा है। उमराव ने कहा, अभी सभी मवेशियों पर पीले रंग के टैग लगाए जाते हैं। इससे यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि कौन सा पशु पालतू है और कौन आवारा। इसलिए राज्य सरकार ने आवारा मवेशियों के लिए केसरिया या लाल जैसे अलग रंग के टैग का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। इस योजना के तहत गोशालाओं में रहने वाले या सडक़ों पर घूमने वाले हर आवारा या परित्यक्त पशु को भारत पशुधन परियोजना के तहत 12 अंकों का एक विशिष्ट पहचान टैग दिया जाएगा।

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